80वें स्वतंत्रता दिवस पर PM नरेंद्र मोदी का बड़ा संदेश: 100 GW परमाणु ऊर्जा, 5 नए रिएक्टर और विकसित भारत 2047 का संकल्प

80वें स्वतंत्रता दिवस पर PM नरेंद्र मोदी का बड़ा संदेश: 100 GW परमाणु ऊर्जा, 5 नए रिएक्टर और विकसित भारत 2047 का संकल्प

 

80वें स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले से PM नरेंद्र मोदी ने ऊर्जा सुरक्षा, आत्मनिर्भर भारत और विकसित भारत 2047 का संकल्प दोहराया। 100 GW परमाणु ऊर्जा और 5 नए रिएक्टर का लक्ष्य बताया।

भारत के 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली के ऐतिहासिक लाल किले की प्राचीर से राष्ट्र को संबोधित किया। अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने राष्ट्रीय सुरक्षा, आर्थिक मजबूती, ऊर्जा आत्मनिर्भरता, किसानों के हित और भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के संकल्प पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि पिछले एक दशक में सरकार ने दूरदर्शी नीतियों और रणनीतिक तैयारियों के जरिए देश को वैश्विक संकटों के प्रभाव से बचाने की कोशिश की है। कोरोना महामारी से लेकर दुनिया के विभिन्न हिस्सों में चल रहे युद्ध और पश्चिम एशिया के संकट तक, भारत ने अपनी जरूरतों को पूरा करने और नागरिकों को राहत देने के लिए पहले से तैयारियां कीं। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत का लक्ष्य केवल वर्तमान चुनौतियों से निपटना नहीं, बल्कि वर्ष 2047 तक देश को विकसित भारत के रूप में स्थापित करना है।

ऊर्जा सुरक्षा के लिए परमाणु ऊर्जा पर बड़ा लक्ष्य

प्रधानमंत्री नरेंद्र  मोदी ने अपने संबोधन में ऊर्जा सुरक्षा को आज के समय की सबसे बड़ी जरूरतों में से एक बताया। उन्होंने कहा कि भारत को ऊर्जा के क्षेत्र में किसी दूसरे देश पर निर्भर नहीं रहना चाहिए। प्रधानमंत्री ने बताया कि संसद में SHANTI Act पारित होने के बाद परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए एक नया ढांचा तैयार हुआ है। सरकार का लक्ष्य भारत की परमाणु ऊर्जा क्षमता को 100 गीगावाट तक पहुंचाना है। इसके साथ ही इस दशक में पांच नए परमाणु रिएक्टर शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है। प्रधानमंत्री ने कहा कि बढ़ती अर्थव्यवस्था और आधुनिक भारत की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए मजबूत और आत्मनिर्भर ऊर्जा व्यवस्था जरूरी है।

आत्मनिर्भर भारत और स्वदेशी पर जोर

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत को अपनी आवश्यकताओं के लिए दूसरे देशों पर निर्भर रहने के बजाय अपनी क्षमताओं को लगातार मजबूत करना होगा। उन्होंने आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को देश के विकास से जोड़ते हुए Make in India, Swadeshi और Vocal for Local जैसे अभियानों का उल्लेख किया। उनका कहना था कि आत्मनिर्भरता केवल आर्थिक नीति नहीं, बल्कि राष्ट्रीय हितों की सुरक्षा का भी महत्वपूर्ण माध्यम है। भारत को उत्पादन, तकनीक, रक्षा और रणनीतिक क्षेत्रों में अपनी क्षमता बढ़ानी होगी, ताकि वैश्विक संकटों के दौरान देश की अर्थव्यवस्था और आम नागरिकों पर अनावश्यक दबाव न पड़े।

100 प्रतिशत रेलवे विद्युतीकरण का दावा

प्रधानमंत्री मोदी ने रेलवे क्षेत्र की उपलब्धियों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारत ने रेलवे नेटवर्क के विद्युतीकरण में बड़ी प्रगति की है और अब 100 प्रतिशत रेलवे विद्युतीकरण हासिल किया जा चुका है। प्रधानमंत्री ने तुलना करते हुए कहा कि 1925 से रेलवे विद्युतीकरण की शुरुआत के बाद लंबे समय तक नेटवर्क का सीमित हिस्सा ही विद्युतीकृत था, जबकि पिछले वर्षों में इस दिशा में तेजी से काम किया गया। रेलवे का विद्युतीकरण ऊर्जा दक्षता बढ़ाने, ईंधन पर निर्भरता कम करने और परिवहन क्षेत्र को अधिक आधुनिक बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

वैश्विक संकट के बीच पेट्रोल-डीजल की उपलब्धता

पश्चिम एशिया में जारी संकट और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले 10 से 12 वर्षों में की गई तैयारियों का लाभ भारत को मौजूदा परिस्थितियों में मिला। उन्होंने उन आशंकाओं और अफवाहों का भी जिक्र किया, जिनमें ईंधन और जरूरी वस्तुओं की उपलब्धता को लेकर लोगों को चिंतित किया जा रहा था। प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार ने रणनीतिक तैयारियों और योजनाओं के जरिए यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया कि देश में गैस, पेट्रोल और डीजल जैसी आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता बनी रहे। उन्होंने प्रशासन के लिए “नागरिक देवो भव” के मंत्र को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि सरकार का प्रयास रहा कि वैश्विक संकट का आर्थिक बोझ आम नागरिकों पर सीधे न डाला जाए।

किसानों को सस्ती दर पर यूरिया और DAP

प्रधानमंत्री ने किसानों को उपलब्ध कराई जा रही खाद पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में यूरिया की कीमत करीब 3,000 रुपये तक पहुंचने के बावजूद भारतीय किसानों को इसे लगभग 300 रुपये में उपलब्ध कराया जा रहा है। सरकार सब्सिडी के जरिए किसानों पर बढ़ती अंतरराष्ट्रीय कीमतों का बोझ कम कर रही है। इसी तरह DAP को भी किसानों को कम कीमत पर उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है। प्रधानमंत्री ने कहा कि वैश्विक परिस्थितियों के कारण कृषि लागत बढ़ने की स्थिति में सरकार किसानों के हितों की रक्षा करने के लिए आर्थिक बोझ खुद उठाने को तैयार है।

रक्षा और विनिर्माण क्षेत्र में तेज बढ़ोतरी

प्रधानमंत्री ने भारत की औद्योगिक और विनिर्माण क्षमता में हुए विस्तार को भी रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि पिछले 12 वर्षों में देश का रक्षा उत्पादन लगभग चार गुना बढ़ा है। खादी और ग्रामोद्योग का उत्पादन करीब पांच गुना बढ़ने का दावा करते हुए उन्होंने इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग में लगभग सात गुना वृद्धि का उल्लेख किया। आधुनिक रेलवे कोच के उत्पादन में 21 गुना और मोबाइल फोन उत्पादन में 33 गुना बढ़ोतरी की बात भी प्रधानमंत्री ने कही। उन्होंने कहा कि भारत ने डिजिटल तकनीक और नवाचार के क्षेत्र में भी अपनी मजबूत पहचान बनाई है।

2047 तक विकसित भारत का सपना

अपने संबोधन के अंत में प्रधानमंत्री मोदी ने देशवासियों से बड़े सपने देखने और उन्हें पूरा करने के लिए दृढ़ संकल्प के साथ काम करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि कोई भी राष्ट्र तब महान बनता है जब वह अपने सपनों, संकल्प और सामर्थ्य के साथ आगे बढ़ता है। प्रधानमंत्री ने कहा कि अब भारत को छोटे सपनों से संतुष्ट नहीं होना है, बल्कि बड़े लक्ष्य निर्धारित करने हैं। उनका जोर वर्ष 2047 तक विकसित भारत के निर्माण पर रहा। उन्होंने नागरिकों से राष्ट्र निर्माण में अपनी भूमिका निभाने और आत्मनिर्भर, मजबूत तथा विकसित भारत के संकल्प को साकार करने का आह्वान किया।

स्वदेशी हथियारों के साथ हुआ ध्वजारोहण

प्रधानमंत्री मोदी ने लाल किले की प्राचीर से राष्ट्रीय ध्वज फहराया। ध्वजारोहण के साथ 1721 फील्ड बैटरी (सेरेमोनियल) के गनरों द्वारा 21 तोपों की सलामी दी गई। इस समारोह में स्वदेशी 105 एमएम लाइट फील्ड गनों का इस्तेमाल किया गया। सेरेमोनियल बैटरी की कमान मेजर पवन सिंह शेखावत ने संभाली, जबकि नायब सूबेदार (असिस्टेंट इंस्ट्रक्टर इन गनरी) अनुतोष सरकार ने गन पोजिशन ऑफिसर की भूमिका निभाई। इस तरह 80वें स्वतंत्रता दिवस पर प्रधानमंत्री का संबोधन भारत की आत्मनिर्भरता, ऊर्जा सुरक्षा, आर्थिक मजबूती और 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने के संकल्प पर केंद्रित रहा।

 

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