अटल बिहारी वाजपेयी की पुण्यतिथि पर PM मोदी समेत देश के वरिष्ठ नेताओं ने उन्हें श्रद्धांजलि दी। जानिए पूर्व प्रधानमंत्री के राजनीतिक जीवन, योगदान और विरासत के बारे में।
भारत के पूर्व प्रधानमंत्री और भारतीय राजनीति के दिग्गज नेता अटल बिहारी वाजपेयी की पुण्यतिथि पर देश ने उन्हें श्रद्धापूर्वक याद किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उन्हें असाधारण राजनेता और अद्भुत दूरदृष्टि से संपन्न व्यक्तित्व बताया। प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि अटल जी ने अपना पूरा जीवन राष्ट्र की सेवा के लिए समर्पित कर दिया। उन्होंने कहा कि वाजपेयी के विचार और उनके प्रयास आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करते रहेंगे। प्रधानमंत्री के मुताबिक अटल जी के नेतृत्व ने देश को मजबूत किया और सुशासन तथा जनकल्याण पर उनका जोर आज भी देश के लिए मार्गदर्शक है। इस अवसर पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन, बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन समेत कई वरिष्ठ नेताओं ने नई दिल्ली स्थित ‘सदैव अटल’ स्मारक पहुंचकर पूर्व प्रधानमंत्री को श्रद्धांजलि दी।
तीन बार देश के प्रधानमंत्री बने अटल बिहारी वाजपेयी
अटल बिहारी वाजपेयी भारतीय राजनीति के उन चुनिंदा नेताओं में शामिल रहे, जिन्होंने लंबे समय तक देश की राजनीति को प्रभावित किया। उनका जन्म 25 दिसंबर 1924 को मध्य प्रदेश के ग्वालियर में हुआ था। राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाते हुए उन्होंने भारतीय जनसंघ से लेकर भारतीय जनता पार्टी तक के सफर में महत्वपूर्ण योगदान दिया। वह भारतीय जनता पार्टी के संस्थापक नेताओं में शामिल रहे और पार्टी को राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में स्थापित करने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही। अटल बिहारी वाजपेयी पहली बार 1996 में देश के प्रधानमंत्री बने, हालांकि उनकी पहली सरकार बहुत कम समय तक चली। इसके बाद उन्होंने 1998 से 1999 तक प्रधानमंत्री के रूप में देश का नेतृत्व किया। वर्ष 1999 में वह दोबारा प्रधानमंत्री बने और 2004 तक इस पद पर रहे। इस तरह उन्होंने तीन अलग-अलग कार्यकाल में देश की कमान संभाली।
ओजस्वी वक्ता और प्रभावशाली सांसद
अटल बिहारी वाजपेयी की पहचान केवल एक राजनेता के रूप में नहीं, बल्कि एक प्रभावशाली वक्ता, कुशल सांसद और प्रखर विचारक के रूप में भी रही। संसद में उनके भाषणों को आज भी भारतीय लोकतांत्रिक राजनीति के महत्वपूर्ण अध्याय के तौर पर याद किया जाता है। उनकी भाषण शैली में तर्क, संवेदनशीलता, व्यंग्य और राष्ट्रहित का अनूठा मेल दिखाई देता था। राजनीतिक मतभेदों के बावजूद अलग-अलग दलों के नेता उनके व्यक्तित्व और संसदीय योगदान का सम्मान करते थे। यही वजह थी कि वह राजनीतिक सीमाओं से ऊपर उठकर व्यापक सम्मान हासिल करने वाले नेताओं में गिने जाते हैं।
प्रधानमंत्री के रूप में राष्ट्र निर्माण पर जोर
अटल बिहारी वाजपेयी के प्रधानमंत्री कार्यकाल में देश ने बुनियादी ढांचे, कूटनीति, अर्थव्यवस्था और राष्ट्रीय सुरक्षा के क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण बदलाव देखे। उनकी सरकार के दौरान सड़क और राजमार्ग जैसे बुनियादी ढांचे को विशेष प्राथमिकता दी गई। देश के विभिन्न हिस्सों को बेहतर सड़क संपर्क से जोड़ने की दिशा में कई बड़ी योजनाओं को गति मिली। उनकी सरकार ने आर्थिक सुधारों और विकास को आगे बढ़ाने के साथ-साथ राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर भी महत्वपूर्ण फैसले लिए। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी भारत की भूमिका को मजबूत करने के लिए उनके नेतृत्व में कूटनीतिक प्रयास किए गए। वाजपेयी का राजनीतिक दृष्टिकोण राष्ट्रहित, विकास और लोकतांत्रिक मूल्यों के संतुलन पर आधारित माना जाता रहा।
राजनीति के साथ साहित्य से भी गहरा रिश्ता
अटल बिहारी वाजपेयी का व्यक्तित्व राजनीति तक सीमित नहीं था। वह एक संवेदनशील कवि और लेखक भी थे। हिंदी भाषा और साहित्य से उनका गहरा लगाव था। उनकी कविताओं में राष्ट्रप्रेम, संघर्ष, मानवीय संवेदनाएं, आशा और जीवन के उतार-चढ़ाव दिखाई देते हैं। सार्वजनिक जीवन की व्यस्तताओं के बीच भी उन्होंने साहित्यिक अभिरुचि को बनाए रखा। यही कारण है कि उन्हें एक ऐसे राजनेता के रूप में भी याद किया जाता है, जिनकी पहचान राजनीतिक भाषणों के साथ-साथ उनकी साहित्यिक संवेदनशीलता से भी बनी।
भारत रत्न से सम्मानित हुए अटल बिहारी वाजपेयी
राष्ट्र के लिए उनके लंबे सार्वजनिक जीवन और योगदान को देखते हुए भारत सरकार ने वर्ष 2015 में उन्हें देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘भारत रत्न’ से सम्मानित किया। यह सम्मान उनके राजनीतिक, सामाजिक और राष्ट्रीय योगदान की औपचारिक मान्यता थी। इससे पहले भी उन्हें देश के विभिन्न सम्मानों से नवाजा जा चुका था। वाजपेयी का सार्वजनिक जीवन कई दशकों तक देश की राजनीति के महत्वपूर्ण घटनाक्रमों से जुड़ा रहा और उन्होंने लोकतांत्रिक संस्थाओं में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई।
16 अगस्त 2018 को हुआ निधन
अटल बिहारी वाजपेयी का निधन 16 अगस्त 2018 को नई दिल्ली में हुआ। वह 93 वर्ष के थे। उनके निधन से भारतीय राजनीति ने एक ऐसे नेता को खो दिया, जिसकी स्वीकार्यता अपने राजनीतिक दल से कहीं आगे तक थी। हर वर्ष उनकी पुण्यतिथि पर देशभर में उन्हें श्रद्धांजलि दी जाती है और उनके सार्वजनिक जीवन तथा राष्ट्र के प्रति योगदान को याद किया जाता है। अटल बिहारी वाजपेयी की विरासत आज भी भारतीय राजनीति में चर्चा का विषय है। उनके विचार, लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति प्रतिबद्धता, सुशासन की सोच और राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखने का दृष्टिकोण आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बना हुआ है। उनकी पुण्यतिथि केवल एक पूर्व प्रधानमंत्री को याद करने का अवसर नहीं, बल्कि उस राजनीतिक परंपरा को स्मरण करने का दिन भी है जिसमें विचारों की दृढ़ता के साथ संवाद, लोकतंत्र और राष्ट्रसेवा को महत्व दिया जाता है।