जी7 शिखर सम्मेलन में पीएम मोदी ने एआई के लिए मानव-केंद्रित दृष्टिकोण और भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने पर जोर दिया।
फ्रांस के इवियन में आयोजित जी7 शिखर सम्मेलन के आउटरीच सत्र को संबोधित करते हुए, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने “आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का सुरक्षित, तीव्र और कुशल रोलआउट” सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर जोर दिया। प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि एआई एक परिवर्तनकारी शक्ति है जिसमें मानव सभ्यता की दिशा को फिर से परिभाषित करने की क्षमता है। हालाँकि, उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि तकनीक का उद्देश्य केवल विकास नहीं, बल्कि आम लोगों का सशक्तिकरण होना चाहिए। भारत की ‘मानव-केंद्रित’ (MANAV) दृष्टि को रेखांकित करते हुए, उन्होंने कहा कि एआई को समावेशिता, सुरक्षा और सार्वजनिक कल्याण के सिद्धांतों पर आधारित होना चाहिए। भारत का मानना है कि साइबरस्पेस एक वैश्विक सार्वजनिक वस्तु है, और लोकतांत्रिक देशों के पास ऐसे एआई मॉडल तक पहुंच होनी चाहिए जो उनकी महत्वपूर्ण सूचना अवसंरचना को सुरक्षित कर सकें और साइबर खतरों से निपटने में मदद कर सकें।
प्रधानमंत्री ने एआई के विकास के लिए एक एकीकृत दृष्टिकोण का आह्वान किया है जहाँ सुरक्षा, गति और दक्षता को एक साथ संबोधित किया जाए। इस दिशा में उन्होंने चार महत्वपूर्ण सुझाव रखे: पहला, एआई सिस्टम ‘सेफ-बाय-डिज़ाइन’ होने चाहिए; दूसरा, एआई की तैनाती के साथ-साथ सामान्य मानक, परीक्षण ढाँचे और नियामक दिशा-निर्देश होने चाहिए; तीसरा, डीपफेक, दुष्प्रचार और साइबर धोखाधड़ी से निपटने के लिए वैश्विक सहयोग अनिवार्य है; और चौथा, एआई का लाभ ‘ग्लोबल साउथ’ के देशों तक पहुंचना चाहिए ताकि एक समावेशी विश्व का निर्माण हो सके। उन्होंने अपने संबोधन का समापन इस संकल्प के साथ किया कि एआई को मानवीय क्षमता का विस्तार करना चाहिए, मानवीय विकल्पों को सशक्त बनाना चाहिए और मानवीय गरिमा की रक्षा करनी चाहिए।
भारत-अमेरिका रणनीतिक संबंधों में नई गति
जी7 शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच हुई द्विपक्षीय वार्ता ने दोनों देशों के बीच संबंधों की गहराई को एक बार फिर प्रदर्शित किया। प्रधानमंत्री मोदी ने पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष को समाप्त करने और क्षेत्र में शांति व स्थिरता बहाल करने के प्रयासों के लिए राष्ट्रपति ट्रंप की सराहना की। इस चर्चा में समुद्री सुरक्षा का मुद्दा भी प्रमुख रहा, जहाँ प्रधानमंत्री ने होर्मुज जलडमरूमध्य में नौवहन की स्वतंत्रता, अबाधित वाणिज्य और नाविकों की सुरक्षा बनाए रखने के महत्व पर जोर दिया।
दोनों नेताओं ने फरवरी 2025 में वाशिंगटन डीसी में हुई अपनी पिछली मुलाकात के बाद से ‘भारत-अमेरिका कॉम्पेक्ट’ (कंप्रिहेंसिव ग्लोबल स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप – भारत-यू.एस. कॉम्पैक्ट) के तहत हुई महत्वपूर्ण प्रगति की समीक्षा की। इस साझेदारी ने रक्षा, रणनीतिक प्रौद्योगिकियों, ऊर्जा और द्विपक्षीय व्यापार के क्षेत्रों में उल्लेखनीय विकास को गति दी है। विशेष रूप से, दोनों नेताओं ने अंतरिम द्विपक्षीय व्यापार समझौते की दिशा में हुई बातचीत पर संतोष व्यक्त किया। इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए, उन्होंने अपने अधिकारियों को एक संतुलित, पारस्परिक रूप से लाभकारी और व्यावसायिक रूप से सार्थक समझौता जल्द से जल्द सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है। इस संदर्भ में, अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जेमिसन ग्रीर के अगले सप्ताह भारत दौरे का कार्यक्रम तय किया गया है, जो इस आर्थिक सहयोग को और अधिक मजबूती प्रदान करेगा।
अंत में, प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप ने भारत-अमेरिका व्यापक वैश्विक रणनीतिक साझेदारी को और अधिक सुदृढ़ करने की अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया। दोनों देशों के बीच बढ़ता यह सहयोग न केवल आपसी लाभ के लिए है, बल्कि वैश्विक स्थिरता और विकास के लिए भी एक आधारस्तंभ के रूप में देखा जा रहा है। एआई के क्षेत्र में जिम्मेदारीपूर्ण नेतृत्व और रक्षा व व्यापार में गहराते संबंध, भारत और अमेरिका के भविष्य के साझा लक्ष्यों की दिशा में एक स्पष्ट और सकारात्मक संकेत हैं। यह शिखर सम्मेलन इस बात का प्रमाण है कि भारत वैश्विक मंच पर तकनीकी और रणनीतिक, दोनों मोर्चों पर एक निर्णायक भूमिका निभा रहा है।