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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम में समावेशी विकास पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि तकनीक, डेटा और एआई का लाभ सभी लोगों तक पहुंचना चाहिए। पीएम ने 25 करोड़ लोगों को गरीबी से बाहर निकालने का भी जिक्र किया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तकनीक, डेटा, ज्ञान और नवाचार के बढ़ते प्रभाव के बीच विकास का नया नजरिया पेश किया है। भारत में पहली बार आयोजित हो रहे ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि आज दुनिया के सामने सबसे बड़ा सवाल यह नहीं है कि ताकत किसके पास है, बल्कि यह है कि उस ताकत का इस्तेमाल किस तरह किया जा रहा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि अगर तकनीक का लाभ केवल कुछ लोगों तक सीमित रह जाता है, तो उसके विकास का उद्देश्य अधूरा है। तकनीक की असली सफलता तब है, जब वह लाखों लोगों के लिए नए अवसर पैदा करे और उनकी क्षमताओं को बढ़ाए। पीएम मोदी ने भारत के विकास मॉडल का जिक्र करते हुए बताया कि सरकार का उद्देश्य नागरिकों को व्यवस्था पर निर्भर बनाना नहीं, बल्कि उन्हें सशक्त और आत्मनिर्भर बनाना है। उन्होंने गरीबी उन्मूलन, लोकतंत्र, डिजिटल तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई की भूमिका पर भी अपने विचार रखे।
तकनीक की ताकत का इस्तेमाल लोगों को सशक्त बनाने में हो
ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि वर्तमान समय में तकनीक, डेटा, ज्ञान और नवाचार दुनिया की बड़ी शक्तियां बन चुके हैं। ऐसे में यह देखना जरूरी है कि इन संसाधनों का इस्तेमाल समाज के कितने लोगों के हित में किया जा रहा है। उनके मुताबिक, तकनीक का उद्देश्य केवल कुछ चुनिंदा लोगों को आगे बढ़ाना नहीं होना चाहिए, बल्कि इससे समाज के बड़े वर्ग को लाभ मिलना चाहिए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि तकनीक के जरिए लोगों की क्षमताओं को बढ़ाने और उनके लिए नए अवसर पैदा करने की दिशा में काम करना जरूरी है। प्रधानमंत्री के अनुसार, ज्ञान का लाभ भी केवल कुछ लोगों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। जब अधिक से अधिक लोगों को जानकारी, संसाधन और तकनीकी सुविधाएं मिलती हैं, तो वे अपने जीवन को बेहतर बनाने के साथ देश के विकास में भी योगदान दे सकते हैं। इस नजरिए के तहत विकास को केवल आर्थिक प्रगति तक सीमित रखने के बजाय आम नागरिकों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने से जोड़कर देखा जाना चाहिए।
25 करोड़ लोगों को गरीबी से बाहर निकालने का दावा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत में गरीबी कम करने के प्रयासों का उल्लेख करते हुए कहा कि पिछले दस वर्षों में देश ने 25 करोड़ लोगों को गरीबी से बाहर निकाला है। उन्होंने इसे भारत की विकास यात्रा की एक बड़ी उपलब्धि के रूप में पेश किया। पीएम मोदी ने कहा कि सरकार के पास अधिकार और संसाधन होने का उद्देश्य नागरिकों को सरकारी व्यवस्था पर निर्भर बनाए रखना नहीं होना चाहिए। इसके बजाय, सरकारी नीतियों और योजनाओं का लक्ष्य लोगों को मजबूत बनाना और उन्हें अपने पैरों पर खड़ा होने के अवसर देना होना चाहिए। उनके अनुसार, विकास का सही अर्थ तभी पूरा होता है, जब इसका लाभ आम लोगों तक पहुंचे और वे अपनी क्षमता के अनुसार आगे बढ़ सकें। गरीबी से बाहर निकलने की प्रक्रिया में रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य, बुनियादी सुविधाओं और आर्थिक अवसरों की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में इसी व्यापक सोच पर जोर दिया और भारत के विकास मॉडल को लोगों को सशक्त बनाने की दिशा में आगे बढ़ने वाला बताया।
भारत को बताया लोकतंत्र की जननी
प्रधानमंत्री मोदी ने भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था और विविधता का जिक्र करते हुए कहा कि देश में अलग-अलग भाषाएं बोलने वाले लोग रहते हैं और उन्हें अपनी बात रखने की स्वतंत्रता है। उन्होंने भारत को लोकतंत्र की जननी बताते हुए कहा कि यहां विभिन्न मुद्दों पर खुलकर बहस होती है और लोग अलग-अलग विचारों तथा नजरियों पर चर्चा करते हैं। प्रधानमंत्री ने देश में भाषाई और मीडिया विविधता के उदाहरण भी दिए। उनके मुताबिक, भारत में 100 से अधिक भाषाएं, लगभग 80,000 पंजीकृत अखबार और प्रकाशन तथा 1,000 से ज्यादा सैटेलाइट टीवी चैनल मौजूद हैं। उन्होंने डिजिटल दौर में सोशल मीडिया की पहुंच का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत में 50 करोड़ से अधिक यूट्यूब उपयोगकर्ता और 50 करोड़ से ज्यादा इंस्टाग्राम उपयोगकर्ता हैं। पीएम मोदी के अनुसार, डिजिटल तकनीक ने लोगों के बीच संवाद और विचारों के आदान-प्रदान को बढ़ावा देने में अहम भूमिका निभाई है। भारत की भाषाई, सांस्कृतिक और वैचारिक विविधता को उन्होंने लोकतांत्रिक व्यवस्था की महत्वपूर्ण विशेषता के तौर पर प्रस्तुत किया।
AI का इस्तेमाल मानवता के साथ जानवरों के हित में भी
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में भारत में आयोजित एआई इम्पैक्ट समिट का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इस आयोजन की ब्लूमबर्ग ने भी सराहना की थी। प्रधानमंत्री के अनुसार, समिट में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के इस्तेमाल को मानवता के हित में आगे बढ़ाने पर चर्चा हुई। इसके साथ ही यह सवाल भी उठाया गया कि एआई का उपयोग जानवरों के कल्याण और उनके हितों की रक्षा के लिए किस तरह किया जा सकता है। इस संदर्भ में उनका संदेश था कि नई तकनीक का विकास केवल व्यावसायिक लाभ तक सीमित नहीं रहना चाहिए। इसका इस्तेमाल व्यापक सामाजिक और मानवीय उद्देश्यों को पूरा करने के लिए भी किया जाना चाहिए। एआई स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा, कृषि, शोध और विभिन्न सार्वजनिक सेवाओं में नए अवसर पैदा कर सकता है। हालांकि, इसके लाभों को व्यापक बनाने के लिए तकनीक तक पहुंच, कौशल विकास और जिम्मेदार इस्तेमाल पर ध्यान देना भी जरूरी है।
भारत की प्रगति से दुनिया को मिल सकता है लाभ
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत की क्षमताओं में होने वाली वृद्धि का लाभ केवल देश तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इससे पूरी मानवता और दुनिया को फायदा मिल सकता है। उनके संबोधन का प्रमुख संदेश यही रहा कि तकनीक और नवाचार का इस्तेमाल अधिक समावेशी विकास के लिए होना चाहिए। भारत जैसे बड़े और विविधतापूर्ण देश में डिजिटल सुविधाओं, ज्ञान और नए अवसरों को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाना विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकता है। प्रधानमंत्री ने तकनीक को लोगों की क्षमता बढ़ाने, गरीबी कम करने और लोकतांत्रिक संवाद को मजबूत बनाने के साधन के रूप में प्रस्तुत किया। ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम में उनका यह संदेश ऐसे समय में आया है, जब दुनिया भर में एआई, डेटा और डिजिटल अर्थव्यवस्था की भूमिका लगातार बढ़ रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि तकनीकी प्रगति का वास्तविक महत्व तभी है, जब उसका फायदा समाज के व्यापक वर्ग तक पहुंचे और लोगों को बेहतर भविष्य बनाने के लिए सशक्त करे।