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ओडिशा सरकार ने ‘ज्ञानोदय–शिक्षारु समृद्धि’ योजना के तहत केजी से पीजी तक मुफ्त शिक्षा की घोषणा की। 32 लाख छात्रों को मिलेगा लाभ।
ओडिशा सरकार ने राज्य के शैक्षणिक परिदृश्य में एक क्रांतिकारी बदलाव करते हुए ‘ज्ञानोदय–शिक्षारु समृद्धि’ नामक एक महत्वाकांक्षी योजना को मंजूरी दी है। इस ऐतिहासिक निर्णय के साथ, ओडिशा देश का पहला ऐसा राज्य बन गया है जहाँ किंडरगार्टन (केजी) से लेकर पोस्ट ग्रेजुएशन (पीजी) तक की शिक्षा को पूरी तरह से निःशुल्क बना दिया गया है। मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी के नेतृत्व में राज्य कैबिनेट द्वारा लिया गया यह निर्णय लाखों गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए एक बड़ी राहत बनकर आया है।
छात्रों पर से हटेगा आर्थिक बोझ, सरकार उठाएगी पूरी जिम्मेदारी
इस योजना के तहत शैक्षणिक सत्र 2026-27 से सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त संस्थानों में नियमित रूप से अध्ययनरत पात्र छात्रों की पूरी प्रवेश शुल्क (एडमिशन फीस) का भार राज्य सरकार उठाएगी। इस सुविधा के दायरे में सरकारी और सहायता प्राप्त स्कूलों की कक्षा 9 से 12 तक के विद्यार्थी और राज्य के सार्वजनिक विश्वविद्यालयों, सरकारी कॉलेजों व सहायता प्राप्त कॉलेजों के स्नातक (यूजी) तथा स्नातकोत्तर (पीजी) स्तर के नियमित छात्र शामिल हैं। पहले से ही केजी से कक्षा 8 तक शिक्षा मुफ्त थी, लेकिन इस नई योजना ने अब पूरे शैक्षणिक सफर को बाधा मुक्त कर दिया है।
मुख्यमंत्री का विजन: शिक्षित और सक्षम मानव संसाधन का निर्माण
योजना के शुभारंभ के अवसर पर मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने कहा, “यह ओडिशा के इतिहास में एक स्वर्णिम अध्याय है। हमारा मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी छात्र को आर्थिक तंगी के कारण अपनी पढ़ाई बीच में न छोड़नी पड़े।” मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि हर साल इस योजना से 32 लाख से अधिक छात्रों को सीधा लाभ मिलेगा। उन्होंने कहा कि शिक्षा केवल एक अधिकार नहीं, बल्कि राज्य के विकास की आधारशिला है। इस पहल से युवाओं का कौशल विकास होगा और राज्य को एक भविष्योन्मुखी शिक्षित मानव संसाधन प्राप्त होगा, जो विकसित ओडिशा के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
बजट और कार्यान्वयन: पांच वर्षों का वृहद रोडमैप
सरकार ने इस परियोजना को सुचारू रूप से चलाने के लिए भारी बजट का प्रावधान किया है। पहले वर्ष में सरकार लगभग 895.57 करोड़ रुपये खर्च करेगी। वहीं, अगले पांच वर्षों में इस महत्वाकांक्षी योजना पर कुल 5,467.55 करोड़ रुपये व्यय किए जाएंगे। इतनी बड़ी धनराशि का निवेश यह दर्शाता है कि सरकार शिक्षा के प्रति कितनी गंभीर और प्रतिबद्ध है। यह योजना न केवल छात्रों के व्यक्तिगत जीवन को संवारेगी, बल्कि उनके परिवारों पर पड़ने वाले शिक्षा के भारी वित्तीय बोझ को भी कम करेगी।
योजना के दायरे और पात्रता की शर्तें
योजना को पूरी तरह पारदर्शी बनाने के लिए सरकार ने कुछ स्पष्ट दिशा-निर्देश भी जारी किए हैं। इस योजना का लाभ केवल सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त संस्थानों के नियमित पाठ्यक्रमों में पढ़ने वाले छात्रों को ही मिलेगा। सेल्फ-फाइनेंसिंग कोर्सेस, निजी शिक्षण संस्थान, पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल पर आधारित संस्थान और कुछ विशेष प्रोफेशनल व तकनीकी कोर्स इस योजना के दायरे से बाहर रखे गए हैं।
राष्ट्रीय लक्ष्यों के अनुरूप एक समावेशी पहल
‘ज्ञानोदय–शिक्षारु समृद्धि’ योजना को राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020, ‘ओडिशा विजन 2036’ और ‘ओडिशा विजन 2047’ के व्यापक लक्ष्यों के अनुरूप तैयार किया गया है। इसका उद्देश्य केवल स्कूलों या कॉलेजों की फीस माफ करना नहीं है, बल्कि समाज के अंतिम पायदान पर खड़े बच्चे को भी वही गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना है, जो साधन संपन्न वर्ग के बच्चों को मिलती है। सरकार का यह कदम समानता और समावेशिता को बढ़ावा देता है।
राज्य सरकार के इस कदम से स्कूलों और कॉलेजों में दाखिला अनुपात (GER) बढ़ने की उम्मीद है, साथ ही स्कूल छोड़ने (ड्रॉपआउट) की दर में भी भारी गिरावट आएगी। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि ओडिशा का यह मॉडल आने वाले समय में अन्य राज्यों के लिए एक प्रेरणा स्रोत बनेगा। यह योजना यह सुनिश्चित करती है कि आर्थिक स्थिति चाहे जो भी हो, हर छात्र अपनी प्रतिभा को निखार सके और अपने सपनों को पूरा कर सके।