नीट पेपर लीक का दंश: कर्ज के बोझ और भविष्य की चिंता में एक और होनहार छात्रा ने दी जान, ‘एग्जाम देने का साहस नहीं’

नीट पेपर लीक का दंश: कर्ज के बोझ और भविष्य की चिंता में एक और होनहार छात्रा ने दी जान, 'एग्जाम देने का साहस नहीं'

 

नीट पेपर लीक और परीक्षा रद्द होने से दुखी एक और छात्रा ने की आत्महत्या। सुसाइड नोट में लिखा- ‘दोबारा परीक्षा देने का साहस नहीं’। पढ़ें पूरा मामला।

देश की प्रतिष्ठित मेडिकल प्रवेश परीक्षा ‘नीट’ (NEET) में धांधली और पेपर लीक के कारण मचे बवाल के बीच एक अत्यंत हृदयविदारक घटना सामने आई है। मध्य प्रदेश के मऊगंज जिले की रहने वाली एक नीट आकांक्षी आकांक्षा चतुर्वेदी ने आत्महत्या कर ली है। परिवार ने बताया कि बेटी की डॉक्टर बनने की हसरत पूरी करने के लिए उन्होंने 3 लाख रुपये का कर्ज लिया था, लेकिन परीक्षा रद्द होने और पेपर लीक की खबरों ने उसे अंदर से तोड़ दिया।

सुसाइड नोट में लिखा- ‘माँ-पापा, मुझमें दोबारा परीक्षा देने का साहस नहीं’

परिजनों को आकांक्षा की किताबों के बीच से एक सुसाइड नोट मिला है, जिसमें उसने लिखा, “माँ-पापा, मुझे नीट में अच्छे अंक लाने की उम्मीद थी, लेकिन अब इसकी कोई गारंटी नहीं है कि अगर मुझे दोबारा परीक्षा देनी पड़ी तो मैं वैसा ही प्रदर्शन कर पाऊँगी। मुझे माफ करना, मैंने सब कुछ बर्बाद कर दिया।” इस घटना ने पूरे देश में छात्रों के भविष्य और शिक्षा व्यवस्था की बदहाली पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।

क्या सिर्फ दोबारा परीक्षा लेना न्याय है?

आम आदमी पार्टी (AAP) समेत कई राजनीतिक दलों ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। पार्टी का स्पष्ट कहना है कि केवल परीक्षा दोबारा आयोजित करना समाधान या न्याय नहीं है। शिक्षा व्यवस्था को अपनी गिरफ्त में लेने वाले ‘एजुकेशन माफिया’ का खात्मा किए बिना छात्रों का भविष्य सुरक्षित नहीं है।

‘व्यवस्था की विफलता’, कब मिलेगा छात्रों को न्याय?

नीट परीक्षा के पेपर लीक और इसके बाद बार-बार परीक्षा रद्द होने से लाखों छात्रों में भारी निराशा और मानसिक तनाव व्याप्त है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भी इस घटना पर तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री के पिछले 12 वर्षों के शासन में शिक्षा व्यवस्था पूरी तरह बर्बाद हो चुकी है और इसका खामियाजा आज युवाओं की पूरी पीढ़ी भुगत रही है।

सवाल यह है कि आखिर इन होनहार छात्रों की मौत का जिम्मेदार कौन है? कब तक सिस्टम की खामियों की कीमत छात्र अपनी जान देकर चुकाते रहेंगे? प्रशासन की ओर से सुरक्षा के बड़े-बड़े दावों के बावजूद, छात्र इस ‘सिस्टम फेल’ का शिकार हो रहे हैं। अब समय आ गया है कि सरकार केवल जांच के नाम पर खानापूर्ति न करे, बल्कि जवाबदेही तय करे और शिक्षा माफियाओं के नेटवर्क को जड़ से उखाड़ फेंके ताकि किसी और परिवार को अपना चिराग न खोना पड़े।

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