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मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने टैक्स और राजस्व व्यवस्था को आधुनिक, पारदर्शी और नागरिक-केंद्रित बनाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि राजस्व का लाभ बेहतर जनसेवाओं और लोगों के जीवन में सुधार के रूप में दिखना चाहिए।
हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने टैक्स और राजस्व व्यवस्था को आधुनिक, पारदर्शी और नागरिक-केंद्रित बनाने पर जोर दिया है। राष्ट्रीय सम्मेलन में बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य की वित्तीय क्षमता को मजबूत करना सरकार का लक्ष्य है, लेकिन इसके लिए नागरिकों पर अतिरिक्त कर का बोझ डालना उद्देश्य नहीं है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राजस्व व्यवस्था का अंतिम उद्देश्य केवल सरकारी आय बढ़ाना नहीं, बल्कि बेहतर सार्वजनिक सेवाओं के माध्यम से लोगों के जीवन में सुधार लाना होना चाहिए।
बिना अतिरिक्त टैक्स बोझ के वित्तीय क्षमता मजबूत करने पर जोर
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के मुताबिक हरियाणा सरकार ऐसी राजस्व व्यवस्था विकसित करने की दिशा में काम कर रही है, जो आधुनिक तकनीक पर आधारित होने के साथ-साथ पारदर्शी और नागरिकों के लिए सुविधाजनक हो। उन्होंने कहा कि सरकार का स्पष्ट लक्ष्य राज्य की वित्तीय क्षमता को मजबूत करना है, लेकिन इसके लिए आम नागरिकों पर अतिरिक्त टैक्स का बोझ नहीं डाला जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि बेहतर राजस्व संग्रह से राज्य सरकार के पास विकास और जनकल्याण से जुड़ी योजनाओं के लिए अधिक संसाधन उपलब्ध हो सकते हैं। हालांकि, राजस्व व्यवस्था का मूल्यांकन केवल संग्रह की मात्रा से नहीं, बल्कि उससे मिलने वाले सार्वजनिक लाभ के आधार पर भी किया जाना चाहिए।
SGST संग्रह में 29 प्रतिशत बढ़ोतरी का दावा
मुख्यमंत्री श्री @NayabSainiBJP ने कर एवं राजस्व को सुदृढ़ करने, आधुनिक, पारदर्शी एवं नागरिक-केंद्रित बनाने पर आयोजित राष्ट्रीय सम्मेलन में बतौर मुख्य अतिथि शिरकत की।
“नागरिकों पर अतिरिक्त कर का बोझ डाले बिना राज्य की वित्तीय क्षमता बढ़ाना हमारा स्पष्ट लक्ष्य है। हरियाणा विजन…
— DPR Haryana (@DiprHaryana) September 30, 2026
मुख्यमंत्री ने वित्त वर्ष 2026-27 के शुरुआती पांच महीनों में हरियाणा के राज्य वस्तु एवं सेवा कर यानी SGST संग्रह में वृद्धि का आंकड़ा भी साझा किया। उनके अनुसार, इस अवधि में राज्य का SGST संग्रह 29 प्रतिशत बढ़कर 24,662 करोड़ रुपये हो गया है। पिछले वर्ष इसी अवधि में यह आंकड़ा 19,174 करोड़ रुपये था।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उनके द्वारा साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार, यह वृद्धि राष्ट्रीय औसत 16 प्रतिशत की तुलना में अधिक है। उन्होंने इसे राज्य की राजस्व व्यवस्था में हो रहे बदलावों से जोड़ते हुए कहा कि कर संग्रह को मजबूत बनाने के साथ-साथ व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाना जरूरी है।
हरियाणा विजन डॉक्यूमेंट-2047 में भी राजस्व सुधार का लक्ष्य
नायब सिंह सैनी ने हरियाणा विजन डॉक्यूमेंट-2047 का उल्लेख करते हुए कहा कि राज्य के दीर्घकालिक विकास के लिए टैक्स और राजस्व व्यवस्था को मजबूत करना महत्वपूर्ण लक्ष्य है। इसके तहत ऐसी व्यवस्था पर जोर दिया जा रहा है जिसमें तकनीक के बेहतर इस्तेमाल, पारदर्शिता और नागरिकों की सुविधा को प्राथमिकता मिले।
राजस्व प्रणाली में आधुनिकीकरण से करदाताओं के लिए प्रक्रियाओं को आसान बनाने, अनुपालन को बेहतर करने और सरकारी स्तर पर निगरानी को मजबूत करने में मदद मिल सकती है। सरकार की ओर से राजस्व संग्रह और सार्वजनिक सेवाओं के बीच बेहतर तालमेल बनाने पर भी जोर दिया जा रहा है।
राजस्व बढ़ने का लाभ जनता तक पहुंचना चाहिए
मुख्यमंत्री ने कहा कि राजस्व संग्रह अपने आप में अंतिम लक्ष्य नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि राजस्व का वास्तविक उद्देश्य लोगों के जीवन में सुधार लाना है। उनके अनुसार, मजबूत राजस्व व्यवस्था का परिणाम बेहतर सार्वजनिक सेवाओं और नागरिकों के जीवन स्तर में सुधार के रूप में दिखाई देना चाहिए।
उन्होंने कहा कि सरकार के पास उपलब्ध अतिरिक्त वित्तीय संसाधनों का इस्तेमाल शिक्षा, स्वास्थ्य, बुनियादी ढांचे, सामाजिक कल्याण और अन्य जनसेवाओं को बेहतर बनाने में किया जा सकता है। इस दृष्टि से राजस्व प्रशासन को नागरिक-केंद्रित बनाना महत्वपूर्ण है।
आधुनिक और पारदर्शी राजस्व व्यवस्था पर फोकस
राष्ट्रीय सम्मेलन में टैक्स और राजस्व व्यवस्था को भविष्य की जरूरतों के अनुरूप तैयार करने पर चर्चा हुई। मुख्यमंत्री के वक्तव्य के मुताबिक हरियाणा सरकार का जोर ऐसी प्रणाली पर है जिसमें राजस्व संग्रह बढ़ाने के साथ नागरिकों के लिए प्रक्रियाएं सरल हों और पारदर्शिता बनी रहे।
हरियाणा सरकार की आधिकारिक गतिविधियों में भी प्रशासनिक सुधार और सेवा वितरण को मजबूत करने पर जोर दिया गया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि वित्तीय क्षमता को मजबूत करने और नागरिकों पर अतिरिक्त कर भार नहीं डालने के बीच संतुलन बनाना सरकार की प्राथमिकता है। उनके अनुसार, एक प्रभावी राजस्व प्रणाली वही है जो राज्य की आर्थिक क्षमता को बढ़ाने के साथ-साथ जनता को बेहतर सेवाएं उपलब्ध कराने में मदद करे।