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एन चंद्रशेखरन ने Tata Sons के चेयरमैन पद पर दोबारा नियुक्ति नहीं लेने का फैसला किया है। उनका मौजूदा कार्यकाल 20 फरवरी 2027 को खत्म होगा।
टाटा समूह के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन ने Tata Sons के चेयरमैन पद पर दोबारा नियुक्ति की दौड़ से खुद को अलग करने का फैसला किया है। उनका मौजूदा कार्यकाल 20 फरवरी 2027 को समाप्त होने वाला है और उन्होंने स्पष्ट किया है कि इसके बाद वह पुनर्नियुक्ति के लिए अपना नाम पेश नहीं करेंगे। इस फैसले के बाद Tata Trusts ने उनके निर्णय को स्वीकार करते हुए नए चेयरमैन की तलाश की प्रक्रिया शुरू करने का फैसला किया है। CNBC-TV18 की रिपोर्ट के अनुसार, Sir Dorabji Tata Trust ने चंद्रशेखरन के योगदान की सराहना की है और उनके उत्तराधिकारी के चयन के लिए एक चयन समिति बनाने की प्रक्रिया शुरू करने को मंजूरी दी है। हालांकि, समिति में कौन-कौन शामिल होंगे और नए चेयरमैन के चयन की अंतिम समयसीमा क्या होगी, इसकी जानकारी अभी सामने नहीं आई है।
Tata Trusts ने जताया चंद्रशेखरन के योगदान के लिए आभार
एन चंद्रशेखरन के फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए Sir Dorabji Tata Trust ने कहा कि वह उनके पुनर्नियुक्ति के लिए खुद को उपलब्ध नहीं कराने के निर्णय का सम्मान करता है। ट्रस्ट ने पिछले करीब एक दशक के दौरान Tata Sons और पूरे Tata Group के नेतृत्व में चंद्रशेखरन के योगदान की सराहना की। ट्रस्ट के मुताबिक, उनके कार्यकाल के दौरान समूह ने महत्वपूर्ण बदलाव, विकास और परिवर्तन का दौर देखा है। चंद्रशेखरन ने 2017 में Tata Sons के चेयरमैन का पद संभाला था और वर्तमान में अपने दूसरे कार्यकाल में हैं। उनके नेतृत्व में Tata Group ने कई रणनीतिक क्षेत्रों में विस्तार और बदलाव की दिशा में कदम बढ़ाए हैं।
ट्रस्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि उत्तराधिकारी की तलाश के लिए जल्द से जल्द प्रक्रिया आगे बढ़ाने का इरादा है। इसके लिए एक चयन समिति के गठन का प्रस्ताव पारित किया गया है। समिति संभावित उम्मीदवारों की समीक्षा करके Tata Sons के अगले चेयरमैन की नियुक्ति के लिए सिफारिश करेगी। हालांकि, फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि समिति में ट्रस्ट, बोर्ड या अन्य हितधारकों की ओर से किन लोगों को शामिल किया जाएगा।
छह महीने से अटका था कार्यकाल बढ़ाने का प्रस्ताव
चंद्रशेखरन ने 12 अगस्त 2026 को जारी अपने बयान में अपने फैसले की वजह भी स्पष्ट की। उन्होंने बताया कि उनके अगले पांच साल के कार्यकाल के विस्तार की सिफारिश Sir Dorabji Tata Trust और Sir Ratan Tata Trust ने सर्वसम्मति से की थी। इस प्रस्ताव को Tata Sons की Nomination and Remuneration Committee और बोर्ड की ओर से भी दर्ज और अनुशंसित किया गया था। इसके बाद प्रस्ताव को 24 फरवरी 2026 को Tata Sons Board के सामने रखा गया।
हालांकि, चंद्रशेखरन के अनुसार बोर्ड के एक सदस्य ने प्रस्ताव का समर्थन नहीं किया। चूंकि प्रस्ताव के लिए सर्वसम्मत समर्थन नहीं मिल सका, इसलिए उन्होंने उस समय निर्णय को आगे बढ़ाने से परहेज किया। इसके बाद करीब छह महीने बीत गए, लेकिन बोर्ड इस मुद्दे पर किसी अंतिम प्रस्ताव तक नहीं पहुंच सका। चंद्रशेखरन ने अपने बयान में कहा कि Tata Sons एक बहुत बड़ा संस्थान है और समूह के कई रणनीतिक प्रोजेक्ट इस समय महत्वपूर्ण चरण में हैं। ऐसे में फरवरी 2027 के बाद नेतृत्व को लेकर स्पष्टता होना जरूरी है।
तुरंत पद नहीं छोड़ रहे चंद्रशेखरन
चंद्रशेखरन के फैसले को लेकर एक महत्वपूर्ण बात यह है कि वह तत्काल Tata Sons के चेयरमैन पद से इस्तीफा नहीं दे रहे हैं। उनका मौजूदा कार्यकाल 20 फरवरी 2027 तक जारी रहेगा। उन्होंने केवल यह फैसला लिया है कि कार्यकाल समाप्त होने के बाद वह दोबारा नियुक्ति के लिए खुद को पेश नहीं करेंगे। इसका मतलब है कि अगले कुछ महीनों तक वह Tata Sons के चेयरमैन के रूप में अपनी जिम्मेदारियां निभाते रहेंगे।
उन्होंने बोर्ड से उत्तराधिकारी के चयन की प्रक्रिया जल्द शुरू करने का अनुरोध किया है, ताकि नए चेयरमैन को जिम्मेदारी सौंपने के लिए पर्याप्त समय मिल सके। चंद्रशेखरन के मुताबिक, नेतृत्व में समय रहते स्पष्टता कर्मचारियों, निवेशकों, कारोबारी साझेदारों और अन्य हितधारकों के लिए भी महत्वपूर्ण है।
Tata Group के नेतृत्व में आएगा बड़ा बदलाव
एन चंद्रशेखरन का Tata Sons चेयरमैन पद से हटने का फैसला Tata Group के लिए एक महत्वपूर्ण नेतृत्व परिवर्तन होगा। उन्होंने 2017 में यह जिम्मेदारी संभाली थी और तब से समूह की रणनीतिक दिशा में उनकी भूमिका बेहद महत्वपूर्ण रही है। उनका कार्यकाल Tata Group के लिए डिजिटल विस्तार, तकनीकी निवेश, वैश्विक कारोबार और कई बड़े रणनीतिक फैसलों के दौर के रूप में देखा गया है।
करीब चार दशक Tata Group में बिताने वाले चंद्रशेखरन ने अपने बयान में कहा कि उन्होंने समूह के साथ 40 साल का पेशेवर जीवन पूरा किया है। उन्होंने इस प्रतिष्ठित संस्थान में योगदान करने का अवसर मिलने के लिए आभार जताया। उनके मुताबिक, पिछले एक दशक तक Tata Sons का नेतृत्व करना उनके लिए सम्मान और बड़ी जिम्मेदारी दोनों रहा है।
अब नए चेयरमैन की तलाश पर नजर
Tata Trusts द्वारा चयन समिति बनाने की प्रक्रिया शुरू किए जाने के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि Tata Sons की कमान किसे सौंपी जाएगी। फिलहाल किसी संभावित उत्तराधिकारी का नाम आधिकारिक तौर पर सामने नहीं आया है। चयन समिति उम्मीदवारों के अनुभव, नेतृत्व क्षमता और Tata Group की भविष्य की रणनीति के अनुरूप उनकी उपयुक्तता का आकलन कर सकती है।
आने वाले महीनों में उत्तराधिकारी की तलाश Tata Group की सबसे महत्वपूर्ण कॉरपोरेट प्रक्रियाओं में से एक होगी। चूंकि चंद्रशेखरन ने बोर्ड से जल्द निर्णय लेने का अनुरोध किया है, इसलिए चयन प्रक्रिया को समय पर पूरा करना प्राथमिकता हो सकती है। नए चेयरमैन को समूह की मौजूदा रणनीतिक परियोजनाओं को आगे बढ़ाने के साथ-साथ बदलते वैश्विक कारोबारी माहौल में Tata Group की स्थिति मजबूत करने की जिम्मेदारी भी संभालनी होगी।
फरवरी 2027 तक जारी रहेगा चंद्रशेखरन का कार्यकाल
फिलहाल एन चंद्रशेखरन Tata Sons के चेयरमैन बने रहेंगे और उनका वर्तमान कार्यकाल 20 फरवरी 2027 को समाप्त होगा। उनके ताजा फैसले का अर्थ तत्काल विदाई नहीं, बल्कि कार्यकाल पूरा होने के बाद पुनर्नियुक्ति से इनकार है। उन्होंने उत्तराधिकार प्रक्रिया जल्द शुरू करने की मांग इसलिए की है ताकि नेतृत्व परिवर्तन सुचारु तरीके से हो सके। Tata Trusts ने भी उनके योगदान को स्वीकार करते हुए उत्तराधिकारी की तलाश की दिशा में कदम बढ़ा दिया है। अब आने वाले महीनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि चयन समिति किसे Tata Sons की अगली कमान सौंपने की सिफारिश करती है और चंद्रशेखरन के करीब एक दशक लंबे नेतृत्व के बाद Tata Group किस नए नेतृत्व मॉडल के साथ आगे बढ़ता है।