मुंबई में 11 दिवसीय गणेशोत्सव की शुरुआत हो गई है। ढोल-नगाड़ों और ‘गणपति बप्पा मोरया’ के जयघोष के बीच घरों और भव्य पंडालों में भगवान गणेश की प्रतिमाएं विराजमान की गईं।
मुंबई में सोमवार को 11 दिवसीय गणेशोत्सव की शुरुआत के साथ ही पूरा शहर भक्ति और उत्साह के रंग में रंग गया। भगवान गणेश के स्वागत के लिए सुबह से ही मुंबई की गलियां, सड़कें और मोहल्ले ‘गणपति बप्पा मोरया’ के जयकारों से गूंजते रहे। ढोल-नगाड़ों की गूंज, भक्ति गीतों और श्रद्धालुओं की भीड़ के बीच लोग अपने आराध्य भगवान गणेश की छोटी-बड़ी प्रतिमाओं को घरों और सार्वजनिक पंडालों में स्थापित करने के लिए ले जाते नजर आए। मुंबई में गणेशोत्सव केवल धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि शहर की सांस्कृतिक पहचान का भी अहम हिस्सा माना जाता है। यही वजह है कि गणपति के आगमन के साथ ही शहर का माहौल पूरी तरह उत्सवमय हो जाता है। कहीं परिवार अपने घर में गणपति की स्थापना की तैयारियों में जुटे दिखाई दिए, तो कहीं बड़े-बड़े सार्वजनिक मंडलों में आकर्षक सजावट और भव्य पंडाल श्रद्धालुओं का ध्यान खींचते नजर आए।
गणपति बप्पा के स्वागत में सजा पूरा मुंबई
गणेशोत्सव की शुरुआत के साथ मुंबई की संकरी गलियों से लेकर प्रमुख इलाकों तक भगवान गणेश के स्वागत की तैयारियां दिखाई दीं। जगह-जगह रंग-बिरंगी सजावट, फूलों की मालाएं, रोशनी और आकर्षक पंडाल बनाए गए हैं। कई मोहल्लों में पंडालों को विशेष थीम पर सजाया गया है। इन पंडालों में भगवान गणेश की भव्य प्रतिमाएं स्थापित की जाती हैं, जिन्हें देखने के लिए उत्सव के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। घरों में भी गणपति की स्थापना को लेकर विशेष तैयारियां की गई हैं। परिवारों ने पूजा स्थल को सजाया और भगवान गणेश के लिए विशेष आसन तैयार किए। गणपति की प्रतिमा को घर लाते समय लोग ढोल-नगाड़ों और भक्ति गीतों के बीच नाचते-गाते नजर आए। कई जगह गुलाल उड़ाकर और जयकारे लगाकर गणपति का स्वागत किया गया।
ढोल-नगाड़ों और जयघोष से गूंजती रहीं सड़कें
मुंबई में गणपति आगमन की परंपरा अपने आप में बेहद खास है। परिवार और सार्वजनिक गणेश मंडल भगवान गणेश की प्रतिमा को बड़े उत्साह के साथ अपने स्थान तक लेकर जाते हैं। इस दौरान ढोल-ताशों की गूंज वातावरण को और भक्तिमय बना देती है। सोमवार को भी शहर के अलग-अलग हिस्सों में श्रद्धालुओं की भीड़ नजर आई। लोग ‘गणपति बप्पा मोरया’ के जयघोष के साथ भगवान गणेश का स्वागत करते दिखाई दिए। कई स्थानों पर पारंपरिक वाद्य यंत्रों के साथ जुलूस निकाले गए। युवाओं से लेकर बुजुर्गों तक सभी वर्ग के लोग इस उत्सव में उत्साह के साथ शामिल हुए। गणपति के आगमन को लेकर बच्चों में भी खास उत्साह दिखाई दिया। परिवारों के लिए यह पर्व एक साथ पूजा करने और धार्मिक-सांस्कृतिक परंपराओं को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने का अवसर भी होता है।
बड़े गणेश मंडलों ने पहले ही शुरू कर दी थी तैयारी
मुंबई के बड़े गणेश मंडलों में गणेशोत्सव की तैयारियां कई सप्ताह पहले से शुरू हो जाती हैं। विशाल प्रतिमाओं को पंडाल तक पहुंचाने, उन्हें सुरक्षित तरीके से स्थापित करने और श्रद्धालुओं के लिए दर्शन की व्यवस्था करने में काफी तैयारी की जाती है। कई बड़े मंडलों ने अपनी विशाल गणेश प्रतिमाओं को पहले ही पंडालों में स्थापित कर दिया था। वहीं, छोटे गणेश मंडलों और परिवारों ने रविवार रात से ही गणपति को घर और मोहल्ले में लाने की प्रक्रिया शुरू कर दी थी। भक्ति गीतों, ढोल-नगाड़ों, आतिशबाजी और जयघोष के बीच भगवान गणेश का स्वागत किया गया। मुंबई की पहचान बन चुके इस उत्सव में हर साल बड़ी संख्या में लोग हिस्सा लेते हैं और शहर की सामूहिक धार्मिक भावना देखने को मिलती है।
11 दिनों तक चलेगा गणेशोत्सव
मुंबई में गणेशोत्सव 11 दिनों तक मनाया जाएगा। इस दौरान श्रद्धालु भगवान गणेश की नियमित पूजा-अर्चना करेंगे। घरों और सार्वजनिक पंडालों में सुबह और शाम आरती का आयोजन होगा। भक्त भगवान गणेश को मोदक, लड्डू और अन्य प्रसाद अर्पित करेंगे। मान्यता है कि भगवान गणेश बुद्धि, ज्ञान, समृद्धि और शुभता के देवता हैं। इसलिए गणेशोत्सव के दौरान लोग उनसे परिवार की सुख-शांति, सफलता और समृद्धि की प्रार्थना करते हैं। कई घरों में गणपति की स्थापना के दौरान विशेष पूजा और धार्मिक अनुष्ठान भी किए जाते हैं। सार्वजनिक पंडालों में भजन, सांस्कृतिक कार्यक्रम और सामाजिक गतिविधियों का आयोजन भी उत्सव का हिस्सा बनता है।
अनंत चतुर्दशी पर होगा गणपति विसर्जन
गणेशोत्सव का समापन अनंत चतुर्दशी के दिन होगा। इस वर्ष अनंत चतुर्दशी 25 सितंबर को मनाई जाएगी। इस दिन मुंबई में गणपति विसर्जन का भव्य दृश्य देखने को मिलेगा। श्रद्धालु भगवान गणेश की प्रतिमाओं को शोभायात्रा के साथ समुद्र तटों और निर्धारित विसर्जन स्थलों तक लेकर जाएंगे। ढोल-ताशों, भक्ति गीतों और ‘गणपति बप्पा मोरया, अगले बरस तू जल्दी आ’ के जयघोष के बीच गणपति प्रतिमाओं का विसर्जन किया जाएगा। इस दौरान मुंबई की सड़कों पर भारी भीड़ उमड़ने की संभावना रहती है और प्रशासन की ओर से भीड़ प्रबंधन तथा सुरक्षा को लेकर विशेष इंतजाम किए जाते हैं।
आस्था के साथ सामाजिक एकता का संदेश
मुंबई का गणेशोत्सव धार्मिक आस्था के साथ सामाजिक एकता और भाईचारे का भी प्रतीक है। अलग-अलग समुदायों और वर्गों के लोग इस उत्सव में शामिल होते हैं। सार्वजनिक गणेश मंडल स्थानीय लोगों को एक साथ जोड़ने का काम करते हैं। गणपति पंडालों में दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं के बीच सामूहिकता और उत्साह देखने को मिलता है। इस तरह गणेशोत्सव शहर की भागदौड़ भरी जिंदगी के बीच लोगों को अपनी परंपराओं और संस्कृति से जुड़ने का अवसर देता है। गणपति बप्पा के आगमन के साथ मुंबई एक बार फिर भक्ति, संगीत, रंग और उत्साह से भर उठी है। अगले 11 दिनों तक शहर में गणेश आराधना का यह सिलसिला जारी रहेगा और अनंत चतुर्दशी के दिन भावुक विदाई के साथ गणपति बप्पा को अगले वर्ष फिर आने का निमंत्रण दिया जाएगा।