ओडिशा के सीएम मोहन चरण माझी ने महिला आरक्षण विधेयक के गिरने पर विपक्ष को आड़े हाथों लिया। उन्होंने इसे नारी शक्ति और समावेशी भारत के साथ धोखा बताया।
ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने लोकसभा में महिला आरक्षण से संबंधित संविधान संशोधन विधेयक के गिर जाने पर विपक्षी दलों की कड़ी निंदा की है। उन्होंने इस घटनाक्रम को ‘नारी शक्ति’ और एक समावेशी भारत की आकांक्षाओं के साथ “घोर विश्वासघात” करार दिया। मुख्यमंत्री ने चेतावनी देते हुए कहा कि जो लोग महिला सशक्तिकरण के रास्ते में बाधा बनेंगे, उन्हें इसके परिणाम भुगतने होंगे।
“तुच्छ राजनीति” के कारण प्रगति में बाधा
शुक्रवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर एक पोस्ट के माध्यम से मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने अपना आक्रोश व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि लोकसभा में विपक्ष द्वारा महिला आरक्षण विधेयक में डाला गया अवरोध शर्मनाक है। माझी के अनुसार, विपक्ष ने प्रगति के ऊपर अपनी “तुच्छ राजनीति” को प्राथमिकता दी है और महिलाओं को उनके उचित संवैधानिक स्थान से वंचित करने का प्रयास किया है।
नारी शक्ति के साथ छल का आरोप
मुख्यमंत्री ने इसे भारतीय लोकतंत्र के लिए एक निराशाजनक मोड़ बताते हुए कहा कि यह देश की आधी आबादी के साथ किया गया एक बड़ा छल है। उन्होंने स्पष्ट किया कि महिलाओं को विधायिकाओं में 33 प्रतिशत आरक्षण प्रदान करना देश के समावेशी विकास के लिए अनिवार्य था, लेकिन विपक्ष की बाधाओं ने इस ऐतिहासिक कदम को रोक दिया। उनके मुताबिक, 2029 से आरक्षण लागू करने का जो लक्ष्य था, उसे बाधित करना महिलाओं के लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन है।
परिणाम भुगतने की दी चेतावनी
मोहन चरण माझी ने अपने बयान में कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि जनता सब देख रही है। उन्होंने जोर देकर कहा कि महिला सशक्तिकरण के मार्ग में रोड़ा अटकाने वाले तत्वों को आने वाले समय में गंभीर राजनीतिक और सामाजिक परिणामों का सामना करना पड़ेगा। ओडिशा के मुख्यमंत्री का यह बयान उन अन्य भाजपा नेताओं के सुर में सुर मिलाता है जिन्होंने इस विधेयक के असफल होने के लिए पूरी तरह से विपक्ष को जिम्मेदार ठहराया है।