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केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने जोधपुर में ऑपरेशन सिंदूर पर कहा, ‘हम धर्म नहीं, कर्म देखकर मारते हैं’। उन्होंने भारत की सैन्य ताकत और नैतिक युद्ध नीति पर जोर देते हुए प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व की प्रशंसा की।
केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने जोधपुर में मारवाड़ राजपूत सभा भवन में आयोजित भव्य कार्यक्रम में कहा कि मारवाड़ का इतिहास गौरवशाली रहा है। उन्होंने कहा कि जब वे सीमाओं पर जवानों से मिलते हैं तो गर्व महसूस होता है। इस अवसर पर राजनाथ सिंह ने ऑपरेशन सिंदूर पर भी महत्वपूर्ण टिप्पणी की।
राजस्थान: शक्ति और भक्ति की धरती
राजनाथ सिंह ने कहा कि राजस्थान को दुनिया शक्ति और भक्ति की भूमि के रूप में पहचानती है। उन्होंने भामाशाहों की दानशीलता और भारत के युद्ध में नैतिकता के महत्व को भी रेखांकित किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारतीय सेना आतंकवादियों से धर्म के आधार पर नहीं, बल्कि उनके कर्मों के आधार पर निपटती है।
ऑपरेशन सिंदूर पर खास बयान
रक्षा मंत्री ने ऑपरेशन सिंदूर का उल्लेख करते हुए कहा, “हम धर्म देखकर नहीं, कर्म देखकर मारते हैं। हमारे सैनिक धर्म की परवाह किए बिना अपने कर्तव्य और नैतिकता के आधार पर लड़ते हैं। भारत का युद्ध नीति नैतिकता पर आधारित है।”
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‘भारत किसी को छेड़ेगा नहीं, लेकिन छेड़ा तो छोड़ेगा नहीं’
राजनाथ सिंह ने कहा कि 22 अगस्त को पहलगाम में हुई घटना के तुरंत बाद सेना प्रमुखों की बैठक बुलाई गई थी और सभी युद्ध के लिए पूरी तरह तैयार थे। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, “भारत किसी को छेड़ेगा नहीं, लेकिन अगर कोई भारत को छेड़ेगा तो भारत उसे छोड़ने वाला नहीं।”
प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व की प्रशंसा
राजनाथ सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि आज भारत “न झुकेंगे, न टूटेंगे” के नारे के साथ मजबूती से दुनिया में आगे बढ़ रहा है। आर्थिक क्षेत्र में भारत चौथा सबसे बड़ा और सबसे तेजी से बढ़ता हुआ देश बन चुका है।
गजेंद्र सिंह शेखावत का संबोधन
कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने मारवाड़ के सपूतों के 1965, 1971 और कारगिल युद्धों में योगदान का उल्लेख किया। उन्होंने राजस्थान के लिए EWS लाभ और सैनिक स्कूलों की मान्यता की मांग भी की।
महाराजा गज सिंह के प्रति सम्मान
रक्षा मंत्री ने पूर्व महाराजा गज सिंह के प्रति अपना सम्मान व्यक्त किया और कहा कि वे उनके लिए हमेशा सम्मान की भावना रखते हैं। इस कार्यक्रम ने राजपूत समाज की वीरांगना परंपराओं, भारत की सुरक्षा और आर्थिक मजबूती का संदेश भी दिया।