गृह मंत्रालय ने नागरिकता (संशोधन) नियम 2026 अधिसूचित किए हैं। अब OCI आवेदन ऑनलाइन होंगे, e-OCI दस्तावेज मिलेगा और अपराध की स्थिति में पंजीकरण रद्द करने के नियम सख्त किए गए हैं।
OCI आवेदन प्रक्रिया का आधुनिकीकरण और e-OCI
गृह मंत्रालय द्वारा जारी नए दिशा-निर्देशों के अनुसार, ओवरसीज सिटीजन ऑफ इंडिया (OCI) की आवेदन प्रक्रिया को अब पूरी तरह डिजिटल कर दिया गया है। भविष्य में सभी आवेदन अनिवार्य रूप से ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से ही स्वीकार किए जाएंगे। एक महत्वपूर्ण बदलाव के रूप में, सरकार ने अब पारंपरिक भौतिक कार्ड के साथ-साथ ई-ओसीआई (e-OCI) दस्तावेज़ का विकल्प भी प्रदान किया है, जिससे सत्यापन की प्रक्रिया तेज और सुगम हो सकेगी। इसके अतिरिक्त, नाबालिगों के लिए नियमों को स्पष्ट करते हुए यह अनिवार्य किया गया है कि वे एक साथ भारतीय और विदेशी पासपोर्ट नहीं रख सकते।
आजीवन वीजा लाभ और राजनीतिक प्रतिबंध
OCI कार्ड धारकों को भारत में बहु-प्रवेश (Multiple-entry) और बहु-उद्देश्यीय आजीवन वीजा की सुविधा मिलती रहती है, जो उन्हें बिना किसी अतिरिक्त औपचारिकता के भारत आने-जाने और रहने की अनुमति देता है। उन्हें आर्थिक, वित्तीय और शैक्षिक क्षेत्रों में कुछ विशेष अधिकार भी प्राप्त हैं। हालाँकि, सरकार ने कड़ा रुख अपनाते हुए स्पष्ट किया है कि OCI का दर्जा राजनीतिक अधिकारों तक विस्तारित नहीं होता है। कार्ड धारक न तो भारत में मतदान कर सकते हैं और न ही किसी संवैधानिक पद (जैसे राष्ट्रपति, उप-राष्ट्रपति या न्यायाधीश) के लिए पात्र हो सकते हैं।
पात्रता मानदंड और वर्जित श्रेणियां
नागरिकता अधिनियम, 1955 के ढांचे के तहत, OCI पंजीकरण उन व्यक्तियों के लिए खुला है जो 26 जनवरी, 1950 को या उसके बाद भारत के नागरिक थे। पात्रता का यह दायरा उनके बच्चों और पोते-पोतियों तक भी जाता है। फिर भी, राष्ट्रीय सुरक्षा और ऐतिहासिक संदर्भों को ध्यान में रखते हुए, पाकिस्तान और बांग्लादेश के वर्तमान या पूर्व नागरिकों (या जिनके पूर्वज वहां के नागरिक रहे हों) को इस योजना से पूरी तरह बाहर रखा गया है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि OCI का दर्जा प्राप्त करना एक कानूनी ‘विशेषाधिकार’ है, न कि कोई जन्मजात ‘अधिकार’।
पंजीकरण रद्द करने के कड़े सुरक्षा प्रावधान
संशोधित नियमों में सुरक्षा और कानून के अनुपालन पर विशेष जोर दिया गया है। गृह मंत्रालय ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि कोई OCI धारक भारतीय कानूनों का उल्लंघन करता है, तो उसका पंजीकरण रद्द किया जा सकता है। विशेष रूप से, यदि किसी धारक को दो साल या उससे अधिक की जेल की सजा होती है, या उसके खिलाफ किसी ऐसे अपराध के लिए आरोप पत्र (Charge-sheet) दाखिल होता है जिसमें सात साल या उससे अधिक की सजा का प्रावधान है, तो उसका OCI दर्जा तुरंत वापस ले लिया जाएगा। ये प्रावधान नागरिकता ढांचे के भीतर सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए धारा 7D के तहत लागू किए गए हैं।