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महाराष्ट्र की राजनीति में उथल-पुथल! उद्धव ठाकरे और एकनाथ शिंदे गुट के बीच छिड़ी जुबानी जंग। जानिए संजय राउत के हालिया बयान और शिवसेना के संभावित विभाजन से जुड़ी पूरी जानकारी।
महाराष्ट्र की राजनीति में शिवसेना के दो धड़ों—उद्धव बालासाहेब ठाकरे (UBT) की शिवसेना और एकनाथ शिंदे की शिवसेना—के बीच चल रहा वाकयुद्ध अब एक नए और तीखे स्तर पर पहुँच गया है। शिवसेना के 60वें स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में हुए आयोजनों के बाद से दोनों गुटों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर और अधिक तेज हो गया है। हालिया घटनाक्रमों ने राज्य की राजनीतिक फिज़ा में तनाव और अनिश्चितता का माहौल पैदा कर दिया है।
संजय राउत का तंज और सोशल मीडिया वार
शिवसेना (UBT) के वरिष्ठ नेता संजय राउत ने शनिवार को अपने प्रतिद्वंद्वी गुट पर एक तीखा और विवादास्पद हमला किया। राउत ने सोशल मीडिया पर एक इन्फोग्राफिक पोस्ट किया, जिसमें लिखा था, “कुछ लोग कुत्ते तो होते हैं, लेकिन वफादार नहीं होते।” इस पोस्ट के साथ उन्होंने कैप्शन में “जय महाराष्ट्र!” लिखा। यह टिप्पणी उस घटना के बाद आई है जब महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने पार्टी के 60वें स्थापना दिवस पर अपने कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए UBT सेना पर जमकर निशाना साधा था।
मुख्यमंत्री शिंदे ने अपने भाषण में चार साल पहले किए गए अपने विद्रोह का बचाव किया और दावा किया कि जनता ने उनके द्वारा लिए गए निर्णय का समर्थन किया है। शिंदे ने आक्रामक रुख अपनाते हुए कहा, “यह शेर आपके सामने है। कुत्ते झुंड में आकर भौंकते हैं, शेर अकेला आता है।” मुख्यमंत्री की यह टिप्पणी सीधे तौर पर UBT नेताओं द्वारा हाल ही में की गई प्रेस कॉन्फ्रेंस और उनके बयानों पर एक करारा प्रहार मानी जा रही है।
‘ऑपरेशन टाइगर’ और संभावित विभाजन
महाराष्ट्र की राजनीति इस समय शिवसेना के भीतर एक संभावित दूसरे विभाजन की चर्चाओं से थर्रा रही है। ‘ऑपरेशन टाइगर’ के नाम से चल रही राजनीतिक सरगर्मियों ने उस समय जोर पकड़ लिया जब शिवसेना एमएलसी चंद्रकांत रघुवंशी ने दावा किया कि UBT सेना के छह सांसद एकनाथ शिंदे के प्रति अपना विश्वास जता चुके हैं और उनके गुट में शामिल हो गए हैं।
इस बीच, संजय राउत ने इन छह सांसदों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के संकेत दिए हैं। उन्होंने गुरुवार को घोषणा की कि अनुपस्थित रहने वाले इन छह सांसदों को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं और उनकी लोकसभा सदस्यता रद्द करने की औपचारिक प्रक्रिया शुरू हो गई है। राउत ने जोर देकर कहा कि यदि लोकसभा अध्यक्ष नियमों और सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुसार कार्य करते हैं, तो इन सांसदों को अयोग्य घोषित होना ही पड़ेगा।
उद्धव ठाकरे का आक्रामक रुख
पार्टी की अंदरूनी कलह और दलबदल की खबरों के बीच, उद्धव ठाकरे ने शुक्रवार को अपने कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए भाजपा और एकनाथ शिंदे पर कड़ा प्रहार किया। ठाकरे ने स्पष्ट किया कि यदि उन पर लगाए गए आरोप सच साबित होते हैं, तो वह अपने पद से इस्तीफा देने के लिए तैयार हैं, लेकिन उन्होंने यह भी जोड़ा कि वह कभी भी शिवसेना को “किसी चोर” के हाथों में नहीं सौंपेंगे।
उन्होंने स्पष्ट रूप से उन अटकलों को खारिज कर दिया कि शिवसेना (UBT) कांग्रेस के साथ विलय कर रही है। ठाकरे ने भाजपा पर लोकतंत्र में लोगों का भरोसा कम करने और राजनीति के स्तर को गिराने का गंभीर आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि शिवसेना के साथ जो कुछ भी हुआ, वह एक सोची-समझी साजिश का हिस्सा है।
महाराष्ट्र का राजनीतिक भविष्य
महाराष्ट्र में शिवसेना के दो गुटों के बीच का यह संघर्ष केवल एक राजनीतिक लड़ाई नहीं है, बल्कि यह पार्टी की विरासत और विचारधारा पर कब्जे की जंग भी है। स्थापना दिवस के मौके पर दोनों ही तरफ से की गई बयानबाजी यह दर्शाती है कि आने वाले दिनों में यह तनाव और अधिक बढ़ सकता है। जहां शिंदे गुट अपनी सत्ता और जनता के समर्थन को अपनी ताकत बता रहा है, वहीं ठाकरे गुट इसे लोकतंत्र और पार्टी की निष्ठा की लड़ाई के रूप में पेश कर रहा है।
आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या UBT सेना अपने सांसदों को टूटने से बचा पाती है, या महाराष्ट्र की राजनीति एक और बड़े उलटफेर की ओर बढ़ रही है। फिलहाल, राज्य का राजनीतिक पारा चरम पर है और दोनों पक्ष अपने-अपने तरीके से ‘असली शिवसेना’ होने का दावा कर रहे हैं।