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पश्चिम एशिया संकट के बीच भारत को बड़ी राहत। 66 हजार टन से अधिक रसोई गैस (LPG) लेकर दो विशाल जहाज होर्मुज स्ट्रेट को सुरक्षित पार कर भारत आ रहे हैं।
पश्चिम एशिया संकट के बीच भारत को बड़ी राहत: होर्मुज जलडमरूमध्य पार कर 66 हजार टन से अधिक एलपीजी लेकर भारत आ रहे दो विशाल जहाज
पश्चिम एशिया (मिडल ईस्ट) में जारी भारी भू-राजनीतिक तनाव और इसके कारण घरेलू बाजार में पेट्रोल, डीजल और सीएनजी की बढ़ती कीमतों के बीच भारत के लिए एक बड़ी और बेहद राहत भरी खबर सामने आई है। इस अशांत क्षेत्र में जारी युद्ध के खतरों के बावजूद, पिछले 24 घंटों के दौरान भारत आ रहे दो विशाल वाणिज्यिक जहाजों ने दुनिया के सबसे संवेदनशील और खतरनाक समुद्री मार्ग ‘होर्मुज स्ट्रेट’ (Hormuz Strait) को सुरक्षित तरीके से पार कर लिया है।
इन दोनों जहाजों में कुल मिलाकर 66,392 मीट्रिक टन रसोई गैस (LPG) लदी हुई है। यह सफलता ऐसे समय में मिली है जब अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव के कारण खाड़ी क्षेत्र के इस समुद्री मार्ग पर जहाजों की आवाजाही पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है। इन दोनों जहाजों की सुरक्षित वापसी से देश में रसोई गैस की आपूर्ति को बड़ी मजबूती मिलेगी।
कतर से कांडला पोर्ट आ रहा है एलपीजी कैरियर ‘सिमी’
इस मिशन में शामिल पहला जहाज मार्शल द्वीप के ध्वज (Flag) वाला एलपीजी टैंकर ‘सिमी’ (Simi) है। बंदरगाह, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव मुकेश मंगल द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक, एलपीजी कैरियर ‘सिमी’ बुधवार, 13 मई को अत्यंत सुरक्षित तरीके से होर्मुज स्ट्रेट को पार करने में सफल रहा।
यह जहाज कतर के प्रसिद्ध ‘रास लफान’ (Ras Laffan) टर्मिनल से 19,965 मीट्रिक टन रसोई गैस लेकर भारत के लिए रवाना हुआ था। इस जहाज पर चालक दल (क्रू) के 21 सदस्य सवार हैं। सभी सुरक्षा मानकों को पूरा करते हुए यह जहाज आज, 16 मई को गुजरात के कांडला में स्थित दीनदयाल बंदरगाह (Deendayal Port) पर पहुँचने वाला है, जहाँ इस गैस की अनलोडिंग की जाएगी।
यूएई से 46 हजार टन गैस लेकर चला ‘एनवी सनशाइन’
इसी कड़ी में राहत पहुंचाने वाला दूसरा जहाज वियतनाम के ध्वज वाला ‘एनवी सनशाइन’ (NV Sunshine) है। इस बड़े शिप ने गुरुवार, 14 मई की सुबह करीब 9:30 बजे बेहद कुशलता और सुरक्षा के साथ होर्मुज जलडमरूमध्य को पार किया।
‘एनवी सनशाइन’ संयुक्त अरब अमीरात (UAE) की प्रतिष्ठित ‘रुवैस रिफाइनरी’ (Ruwais Refinery) से 46,427 मीट्रिक टन एलपीजी लेकर भारत आ रहा है। समुद्री दूरी और गति के आकलन के अनुसार, इस जहाज के 18 मई तक कर्नाटक के न्यू मंगलुरु पोर्ट (New Mangaluru Port) पर सुरक्षित लैंड करने की पूरी संभावना जताई गई है।
सरकारी तेल कंपनी IOC का है दोनों जहाजों में लदा माल
राहत की बात यह भी है कि इन दोनों जहाजों में लदा कुल 66,392 मीट्रिक टन रसोई गैस का माल भारत की सबसे बड़ी सरकारी तेल कंपनी ‘इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन’ (IOC) का है। युद्ध के इस दौर में जहाँ वैश्विक स्तर पर सप्लाई चेन (आपूर्ति श्रृंखला) पूरी तरह बाधित हो चुकी है, वहीं आईओसी के इस कंसाइनमेंट का सुरक्षित निकल आना भारतीय ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से एक बड़ी जीत माना जा रहा है। इससे भारतीय बाजारों में एलपीजी की उपलब्धता सामान्य बनाए रखने में मदद मिलेगी।
तनाव के बीच अब तक 13 भारतीय जहाज सुरक्षित निकले, कई अभी भी फंसे
मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, मार्च की शुरुआत से लेकर अब तक पश्चिम एशिया के इस संकटग्रस्त समुद्री मार्ग से कुल 13 भारतीय चार्टर्ड जहाज सुरक्षित रूप से निकल चुके हैं, जिनमें 12 एलपीजी टैंकर और 1 कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) का टैंकर शामिल है।
हालांकि, राहत की इस बड़ी खबर के बीच चिंताएं पूरी तरह खत्म नहीं हुई हैं। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, मौजूदा समय में भी खाड़ी क्षेत्र के अलग-अलग हिस्सों में भारत के करीब 12 वाणिज्यिक पोत फंसे हुए हैं। इसके अतिरिक्त, दुनिया के अन्य देशों के कई ऐसे विदेशी जहाज भी प्रभावित हैं जो भारत के लिए महत्वपूर्ण माल और कच्चा तेल लेकर आ रहे थे। भारतीय नौसेना और जहाजरानी मंत्रालय लगातार इन फंसे हुए जहाजों की सुरक्षा की निगरानी कर रहे हैं ताकि उन्हें सुरक्षित गलियारा (Safe Passage) दिया जा सके।