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आईपीएल के पूर्व चेयरमैन ललित मोदी ने कोच्चि फ्रेंचाइजी विवाद को लेकर शशि थरूर पर गंभीर आरोप लगाए हैं। जानिए क्या था पूरा मामला और क्यों हुआ था विवाद।
भारतीय क्रिकेट और राजनीति के गलियारों में ‘कोच्चि टस्कर केरला’ फ्रेंचाइजी का विवाद एक ऐसा अध्याय रहा है जिसने तत्कालीन सरकार और आईपीएल के भविष्य पर गहरे प्रश्नचिन्ह खड़े कर दिए थे। हाल ही में, आईपीएल के पूर्व चेयरमैन ललित मोदी ने एएनआई (ANI) को दिए एक साक्षात्कार में इस पूरे प्रकरण को लेकर कई चौंकाने वाले दावे किए हैं। उनके अनुसार, यह विवाद तब शुरू हुआ जब उन्होंने कोच्चि कंसोर्टियम की विवादास्पद इक्विटी संरचना पर सवाल उठाए, जिसमें सुनंदा पुष्कर का नाम भी शामिल था।
विवाद की जड़: वित्तीय अनियमिताओं पर सवाल
ललित मोदी का दावा है कि कोच्चि कंसोर्टियम ने आईपीएल विस्तार के दौरान 350 मिलियन डॉलर की भारी-भरकम बोली लगाई थी, लेकिन उनके द्वारा पेश किया गया वित्तीय मॉडल पूरी तरह से अव्यवहारिक था। ललित मोदी के अनुसार, उन्होंने पाया कि कंसोर्टियम में एक व्यक्ति, सुनंदा पुष्कर, को बिना किसी स्पष्ट योगदान के 25 प्रतिशत ‘मुफ्त इक्विटी’ दी जा रही थी। ललित मोदी ने सवाल किया कि जो अन्य शेयरधारक 100 प्रतिशत लागत का वहन कर रहे थे, उन्हें यह संरचना स्वीकार्य कैसे थी? उनका आरोप था कि सुनंदा पुष्कर के पास मौजूद 10 रुपये के शेयर की कीमत टीम मिलने वाले दिन ही एक लाख रुपये हो गई थी, जबकि अन्य शेयरधारकों की हिस्सेदारी का मूल्य गिर रहा था। मोदी का तर्क था कि यह वित्तीय ढांचा ढहने के लिए ही बना था, और अंततः दो साल बाद ऐसा ही हुआ।
शशि थरूर का फोन कॉल और ललित मोदी का दावा
इस विवाद का सबसे विवादास्पद हिस्सा ललित मोदी द्वारा शशि थरूर के साथ कथित फोन कॉल का दावा है। मोदी का आरोप है कि जब उन्होंने सुनंदा पुष्कर की भूमिका और वित्तीय संरचना पर सवाल उठाए, तो तत्कालीन विदेश राज्य मंत्री शशि थरूर ने उन्हें फोन कर इस मामले को आगे न बढ़ाने की चेतावनी दी। ललित मोदी के शब्दों में, थरूर ने उनसे कहा, “ललित, सुनंदा पुष्कर के बारे में मत पूछो। वह मेरी अच्छी दोस्त हैं।” ललित मोदी का दावा है कि जब उन्होंने विरोध किया, तो थरूर ने कथित तौर पर धमकी दी कि यदि उन्होंने सवाल पूछना बंद नहीं किया, तो सुबह तक उनके यहाँ छापे पड़वा दिए जाएंगे। ललित मोदी ने इस धमकी को सिरे से नकारते हुए फोन काट दिया और कहा कि वह किसी भी हाल में इन कागजातों पर हस्ताक्षर नहीं करेंगे।
कोच्चि फ्रेंचाइजी का उदय और पतन
ललित मोदी ने यह भी खुलासा किया कि उन्होंने उस समय कोच्चि टीम को आईपीएल की बोली में शामिल होने की अनुमति दी थी, जबकि केरल में उस वक्त कोई स्टेडियम भी मौजूद नहीं था। उन्होंने स्वीकार किया कि शशि थरूर एक कुशल वाकपटु (smooth talker) थे और उन्होंने उन्हें अपनी बातों में फंसा लिया था। हालाँकि, यह साझेदारी लंबे समय तक नहीं चली। आईपीएल के नियमों का पालन न करने और वित्तीय अनियमिताओं के चलते, 2011 में बीसीसीआई (BCCI) ने कोच्चि फ्रेंचाइजी को आईपीएल से बाहर कर दिया। टीम ने केवल एक सत्र (2011) में भाग लिया, जहाँ वह दस टीमों में आठवें स्थान पर रही थी।
राजनीतिक और खेल जगत पर प्रभाव
यह पूरा प्रकरण केवल क्रिकेट तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसका राजनीतिक असर भी गहरा था। अप्रैल 2010 में उठे इस विवाद के कारण शशि थरूर को विदेश राज्य मंत्री के पद से इस्तीफा देना पड़ा था। ललित मोदी के ताजा दावों ने एक बार फिर उस दौर की यादें ताजा कर दी हैं, जब खेल, व्यापार और राजनीति का घालमेल चर्चा का मुख्य विषय बना था। ललित मोदी का कहना है कि उन्होंने उस वक्त जो रुख अपनाया था, वह आईपीएल की अखंडता और स्पष्टता बनाए रखने के लिए आवश्यक था। भले ही यह मामला सालों पुराना है, लेकिन जिस तरह से इसके नए विवरण सामने आए हैं, वह यह समझने के लिए महत्वपूर्ण है कि आईपीएल के शुरुआती वर्षों में प्रबंधन के सामने कितनी बड़ी चुनौतियां थीं। यह विवाद आज भी यह दर्शाता है कि पारदर्शिता के अभाव में बड़े व्यावसायिक मॉडल कैसे असफलता की भेंट चढ़ सकते हैं।