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लद्दाख के उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने ‘साझा दृष्टिकोण का निर्माण’ रिपोर्ट जारी की। इसमें जल सुरक्षा, पर्यटन और 5 नए जिलों समेत 100 दिनों के काम का ब्योरा है।
लद्दाख के केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद से यहाँ के विकास को एक नई दिशा देने के प्रयास लगातार जारी हैं। इसी कड़ी में, लद्दाख के लेफ्टिनेंट गवर्नर (उपराज्यपाल) विनय कुमार सक्सेना ने रविवार को अपने कार्यकाल के शुरुआती 100 दिनों का एक विस्तृत रिपोर्ट कार्ड जारी किया। 13 मार्च को कार्यभार संभालने के बाद से, उन्होंने लद्दाख के समग्र विकास के लिए एक रणनीतिक दृष्टिकोण अपनाया है। इस रिपोर्ट को “लद्दाख के लिए साझा दृष्टिकोण का निर्माण” नाम दिया गया है, जो इस बात का प्रतीक है कि प्रशासन स्थानीय जनता की आकांक्षाओं और क्षेत्र की जरूरतों को ध्यान में रखकर काम कर रहा है। पिछले 100 दिनों में प्रशासन ने बुनियादी ढांचे से लेकर पर्यावरण संरक्षण और रोजगार सृजन तक के मोर्चे पर कई बड़े नीतिगत फैसले लिए हैं।
सरकार की प्राथमिकता वाले छह प्रमुख क्षेत्र
लद्दाख प्रशासन द्वारा जारी की गई इस विस्तृत रिपोर्ट में मुख्य रूप से छह ऐसे क्षेत्रों को रेखांकित किया गया है, जिन पर सरकार ने पिछले तीन महीनों में सबसे ज्यादा ध्यान केंद्रित किया है। ये छह क्षेत्र निम्नलिखित हैं:
- दीर्घकालिक जल सुरक्षा: लद्दाख जैसे ठंडे रेगिस्तान में पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करना।
- पर्यावरणीय स्थिरता: यहां के संवेदनशील इकोसिस्टम की रक्षा करना।
- सांस्कृतिक और पर्यटन पुनर्जागरण: स्थानीय संस्कृति का संरक्षण और पर्यटन को बढ़ावा देना।
- सामाजिक न्याय और सुरक्षा: समाज के हर वर्ग तक बुनियादी सुविधाएं पहुंचाना।
- रोजगार और अर्थव्यवस्था: युवाओं को नए अवसर देना और व्यापार को आसान बनाना।
- टिकाऊ बुनियादी ढांचा: पर्यावरण को नुकसान पहुंचाए बिना इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास।
जल सुरक्षा: हिम सरोवर और सिंधु जल समृद्धि अभियान
लद्दाख जैसे भौगोलिक रूप से दुर्गम और कम वर्षा वाले क्षेत्र में पानी की कमी हमेशा से एक बड़ी चुनौती रही है। विनय कुमार सक्सेना सक्सेना की अगुआई में प्रशासन ने इसे अपनी प्राथमिकताओं में सबसे ऊपर रखा है। इस संकट से निपटने के लिए दो बेहद महत्वाकांक्षी परियोजनाएं—’हिम सरोवर परियोजना’ और ‘सिंधु जल समृद्धि अभियान’ शुरू की गई हैं। हिम सरोवर परियोजना के पहले चरण के तहत, ग्लेशियरों के पिघलने वाले पानी और मौसमी बारिश के पानी को सहेजने के लिए 50 सामुदायिक जल निकायों (Community Water Bodies) को विकसित किया जा रहा है। इसके अलावा, सिंचाई व्यवस्था को मजबूत करने के लिए सिंधु नदी पर भारत का पहला ‘हिमालयी रॉक चेक डैम’ बनाया गया है। प्रशासन ने सालों से बंद पड़ी 43 किलोमीटर लंबी ‘इगू-फे सिंचाई नहर’ को भी पुनर्जीवित किया है, जिससे लगभग 4,500 हेक्टेयर कृषि भूमि को नया जीवन मिला है।
पर्यावरण संरक्षण और पर्यटन को नई रफ़्तार
पर्यावरण की दृष्टि से बेहद नाजुक होने के कारण लद्दाख में विकास के साथ-साथ प्रकृति का संतुलन बनाना बेहद जरूरी है। रिपोर्ट के मुताबिक, शुरुआती 100 दिनों में रिकॉर्ड 35,000 से अधिक पेड़ लगाए गए हैं और ‘सिंधु नदी हरित गलियारा’ (Indus River Green Corridor) पहल की शुरुआत की गई है। सिंगल यूज प्लास्टिक के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा रही है और वनों के जीर्णोद्धार पर काम चल रहा है।
पर्यटन के मोर्चे पर भी लद्दाख ने नई ऊंचाइयों को छुआ है। इस साल जनवरी से मई 2026 के बीच पर्यटकों की आमद में पिछले साल के मुकाबले 43.65 प्रतिशत की शानदार बढ़ोतरी दर्ज की गई है। भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेषों की प्रदर्शनी को 1.18 लाख से अधिक लोगों ने देखा। इसके अलावा, भारत के पहले ‘पेट्रोग्लिफ संरक्षण पार्क’ की स्थापना, लद्दाख बाइक वीक और ऊंचाई वाले क्षेत्रों में फूलों की खेती जैसी पहलों ने वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर लद्दाख की स्थिति को और मजबूत किया है।
सामाजिक न्याय और प्रशासनिक सुधार
प्रशासनिक पहुंच को जमीनी स्तर तक ले जाने के लिए लद्दाख में पांच नए जिलों का सृजन किया गया है, जो स्थानीय लोगों के लिए एक बड़ी राहत है। इसके साथ ही, सामाजिक सुरक्षा का दायरा बढ़ाते हुए दैनिक वेतन भोगियों के मानदेय में संशोधन किया गया है और लंबे समय से लटके भूमि पट्टों (Land Leases) के नवीनीकरण की प्रक्रिया को हरी झंडी दे दी गई है। स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए लद्दाख में अधिक डॉक्टरों को आकर्षित करने के उद्देश्य से कई बड़े नीतिगत बदलावों की घोषणा की गई है, ताकि दूरदराज के गांवों में भी लोगों को बेहतर इलाज मिल सके।
आर्थिक नीतियां और भविष्य का विजन
लद्दाख की अर्थव्यवस्था को आत्मनिर्भर बनाने के लिए होटलों और गेस्ट हाउसों को ‘उद्योग का दर्जा’ दिया गया है, जिससे इस सेक्टर को टैक्स और ऋण में बड़ी राहत मिलेगी। व्यापार को आसान बनाने के लिए ‘सिंगल-विंडो ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ प्रणाली और स्थानीय युवाओं के लिए एक समर्पित ‘जॉब पोर्टल’ लॉन्च किया गया है। लद्दाख के विश्वप्रसिद्ध पश्मीना को बढ़ावा देने के लिए ‘लद्दाख पश्मीना विकास बोर्ड’ का गठन किया गया है, जबकि स्थानीय खुबानी (Apricot) के अंतरराष्ट्रीय निर्यात को बढ़ावा देने की योजना पर काम शुरू हो चुका है।
उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने लद्दाख को “भारत का मुकुट” बताते हुए संकल्प जताया कि आने वाले समय में भी प्रशासन यहां की नाजुक पारिस्थितिकी और अनूठी सांस्कृतिक विरासत से समझौता किए बिना विकास की इस यात्रा को और तेजी से आगे बढ़ाएगा।