AAP विधायक कुलदीप कुमार ने दिल्ली के कथित चावल घोटाले को लेकर BJP सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने पूछा कि असम की कंपनी को ठेका क्यों दिया गया और गरीबों का राशन हरियाणा के बाजार में कैसे पहुंचा।
दिल्ली में कथित चावल घोटाले को लेकर आम आदमी पार्टी (AAP) के विधायक कुलदीप कुमार ने BJP सरकार पर तीखा हमला बोला है। कुलदीप कुमार ने आरोप लगाया कि BJP सरकार के कार्यकाल में भ्रष्टाचार इस स्तर तक पहुंच गया है कि गरीबों और पिछड़े वर्गों के लिए निर्धारित राशन के चावल को भी कथित तौर पर निजी कंपनी तक पहुंचाने की कोशिश की गई। उन्होंने दिल्ली के खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री मंजिंदर सिंह सिरसा से सवाल किया कि आखिर असम की एक कंपनी को यह ठेका किस आधार पर दिया गया और गरीबों तक पहुंचने वाला चावल हरियाणा के बाजारों में कैसे पहुंच गया।
AAP विधायक का यह बयान दिल्ली विधानसभा में कथित सब्सिडी वाले चावल की आपूर्ति और वितरण को लेकर चल रहे राजनीतिक विवाद के बीच आया है। AAP ने इस मामले को लेकर विधानसभा में चर्चा की मांग की है और इसे बड़े पैमाने की कथित वित्तीय अनियमितता बताया है।
असम की कंपनी को ठेका देने पर सवाल
कुलदीप कुमार ने अपने बयान में सरकार से सीधे सवाल किया कि जिस चावल का उद्देश्य गरीब और जरूरतमंद लोगों तक खाद्यान्न पहुंचाना था, उसकी व्यवस्था में असम की कंपनी को क्यों शामिल किया गया। उन्होंने पूछा कि ठेका देने की प्रक्रिया क्या थी और इस कंपनी की भूमिका क्या थी।
AAP की ओर से लगाए गए आरोपों के मुताबिक, असम स्थित एक कॉरपोरेशन और दिल्ली सरकार की ओर से भारतीय खाद्य निगम (FCI) से भारी सब्सिडी वाला चावल लेने की मांग की गई थी। पार्टी का दावा है कि बड़ी मात्रा में चावल गरीबों तक पहुंचाने के नाम पर मांगा गया, लेकिन कथित तौर पर इसे हरियाणा की एक निजी कंपनी तक पहुंचाने की व्यवस्था की गई।
‘गरीबों के बजाय हरियाणा के बाजार में कैसे पहुंचा चावल?’
कुलदीप कुमार ने अपने बयान में सबसे बड़ा सवाल यही उठाया कि अगर चावल गरीबों के लिए था, तो वह हरियाणा के बाजारों में बिक्री के लिए कैसे पहुंच गया। AAP का आरोप है कि सब्सिडी वाले चावल को जरूरतमंद लाभार्थियों तक पहुंचाने के बजाय निजी कंपनी को लाभ पहुंचाने की कथित व्यवस्था की गई।
पार्टी के अनुसार, यह मामला केवल चावल की खरीद तक सीमित नहीं है, बल्कि सरकारी सब्सिडी और सार्वजनिक वितरण व्यवस्था के उद्देश्य पर भी सवाल खड़ा करता है। AAP का दावा है कि यदि सब्सिडी वाला खाद्यान्न खुले बाजार में मुनाफे के लिए बेचा जाता, तो इससे सरकारी संसाधनों और गरीबों के अधिकारों को नुकसान पहुंच सकता था। इन आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच और आधिकारिक दस्तावेजों के आधार पर ही हो सकती है।
AAP ने बताया 22 हजार करोड़ का कथित मामला
चावल विवाद को लेकर AAP ने करीब 22,000 करोड़ रुपये के कथित घोटाले की योजना का आरोप लगाया है। पार्टी का दावा है कि सब्सिडी वाले चावल की बड़ी मात्रा की आपूर्ति और कथित बिक्री से हर सप्ताह भारी वित्तीय अंतर पैदा हो सकता था और तीन वर्षों में यह रकम हजारों करोड़ रुपये तक पहुंच सकती थी।
AAP नेता सौरभ भारद्वाज ने भी इससे पहले दावा किया था कि करीब 31,000 मीट्रिक टन चावल प्रति सप्ताह की मांग की गई थी। पार्टी ने आरोप लगाया कि इस पूरी व्यवस्था के जरिए कथित तौर पर प्रति सप्ताह लगभग 143 करोड़ रुपये के स्तर का वित्तीय लाभ या अंतर पैदा हो सकता था। हालांकि, ये आंकड़े और आरोप AAP की ओर से लगाए गए हैं और BJP सरकार ने इन्हें खारिज किया है।
मंत्री मंजिंदर सिंह सिरसा ने आरोपों को किया खारिज
भाजपा भ्रष्टाचार में इस कदर डूब गई कि जो राशन गरीब या पिछड़े वर्ग को मिलना चाहिए था, उसे भी ये लोग बेचकर खा गए।
मंत्री सिरसा जी ये बताएं कि आखिर क्यों उन्होंने असम की कंपनी को ये ठेका दिया और गरीबों को मिलने की बजाय ये चावल हरियाणा के बाज़ार में कैसे बिका?@KuldeepKumarAAP pic.twitter.com/OtV8hDN9Jw
— Aam Aadmi Party Delhi (@AAPDelhi) August 11, 2026
AAP के आरोपों पर दिल्ली सरकार के खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री मंजिंदर सिंह सिरसा ने पलटवार किया है। उन्होंने आरोपों को बेबुनियाद और झूठा बताया तथा AAP नेताओं को अपने बयान वापस लेने की मांग की है। सिरसा ने इस विवाद को लेकर कानूनी कार्रवाई की चेतावनी भी दी है।
सिरसा का कहना है कि दिल्ली सरकार ने कथित रूप से न तो चावल खरीदा और न ही उसे बेचा। उन्होंने AAP पर राजनीतिक लाभ के लिए मामले को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करने का आरोप लगाया है। ऐसे में इस पूरे विवाद में AAP के आरोप और सरकार का पक्ष दोनों सामने आ चुके हैं।
विधानसभा में भी हुआ जोरदार हंगामा
कथित चावल घोटाले को लेकर दिल्ली विधानसभा में भी जमकर हंगामा हुआ। AAP विधायकों ने चावल की बोरियों के साथ विरोध प्रदर्शन किया और मामले पर तत्काल चर्चा की मांग की। इस दौरान विधानसभा की कार्यवाही में भारी हंगामा हुआ और कई AAP विधायकों को सदन से मार्शल आउट किया गया।
AAP का आरोप है कि सरकार इस मुद्दे पर चर्चा से बच रही है, जबकि BJP का कहना है कि विपक्ष ने सदन की मर्यादा और कार्यवाही को बाधित किया। इसी टकराव के कारण चावल का मुद्दा अब दिल्ली की राजनीति में प्रमुख विवाद बन गया है।
कुलदीप कुमार ने मांगा जवाब
कुलदीप कुमार ने मंत्री मंजिंदर सिंह सिरसा से मांग की कि सरकार स्पष्ट करे कि असम की कंपनी को ठेका देने का आधार क्या था, चावल की आपूर्ति की पूरी प्रक्रिया क्या रही और गरीबों के लिए निर्धारित चावल हरियाणा के बाजारों तक कैसे पहुंचा।
AAP विधायक का कहना है कि यदि सरकारी रिकॉर्ड और पूरी प्रक्रिया पारदर्शी है तो सरकार को विधानसभा में सभी सवालों के जवाब देने चाहिए। वहीं, BJP सरकार के इनकार के बाद अब इस विवाद में दस्तावेजी और आधिकारिक जांच की भूमिका महत्वपूर्ण हो गई है।
फिलहाल दिल्ली का कथित चावल घोटाला BJP और AAP के बीच बड़े राजनीतिक टकराव का मुद्दा बन चुका है। एक ओर AAP इसे गरीबों के राशन और सरकारी सब्सिडी से जुड़ा गंभीर मामला बता रही है, वहीं BJP सरकार आरोपों को खारिज कर रही है। आने वाले दिनों में विधानसभा में इस मुद्दे पर बहस और जांच की मांग और तेज होने की संभावना है।