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कुलदीप सिंह धालीवाल ने ड्रग तस्करी मामले में बिक्रम मजीठिया और जगदीश भोला से आमने-सामने पूछताछ की मांग की। उन्होंने अमित शाह और BJP से गुजरात में नशे पर सवाल किए।
पंजाब में नशे के मुद्दे को लेकर आम आदमी पार्टी (AAP) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के बीच सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। AAP पंजाब के मुख्य प्रवक्ता और विधायक कुलदीप सिंह धालीवाल ने नशा तस्करी से जुड़े मामले में शिरोमणि अकाली दल के नेता बिक्रम सिंह मजीठिया और जगदीश सिंह भोला से आमने-सामने पूछताछ करने की मांग की है। धालीवाल ने कहा कि स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) को दोनों से आमने-सामने पूछताछ कर मामले से जुड़े हर पहलू की जांच करनी चाहिए, ताकि पूरे मामले की सच्चाई सामने आ सके।
SIT के सामने आमने-सामने पूछताछ की मांग
कुलदीप सिंह धालीवाल ने कहा कि किसी भी व्यक्ति को उसके राजनीतिक प्रभाव या हैसियत के आधार पर विशेष छूट नहीं मिलनी चाहिए। उनके मुताबिक, मजीठिया और जगदीश भोला को आमने-सामने बैठाकर पूछताछ करने से कथित ड्रग नेटवर्क की कड़ियों की जांच में मदद मिल सकती है। उन्होंने कहा कि नशे से जुड़े मामले में हर पहलू की जांच होनी चाहिए और कानून सभी के लिए समान होना चाहिए।
यह बयान ऐसे समय आया है जब पंजाब पुलिस की SIT ने मजीठिया और भोला को पूछताछ के लिए बुलाया है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, दोनों को 5 अक्टूबर को पूछताछ के लिए पेश होने को कहा गया है। मजीठिया के खिलाफ 2021 में NDPS Act के तहत मामला दर्ज किया गया था। हालांकि, मामले में आरोप और जांच की स्थिति को लेकर अलग-अलग राजनीतिक पक्षों के दावे सामने आते रहे हैं।
2007-2017 के अकाली-BJP शासन को लेकर भी सवाल
ਬਿਕਰਮ ਮਜੀਠੀਆ ਤੇ ਜਗਦੀਸ਼ ਭੋਲਾ ਨੂੰ ਆਹਮੋ-ਸਾਹਮਣੇ ਬਿਠਾ ਕੇ ਕੀਤੇ ਜਾਣ ਨਸ਼ਾ ਤਸਕਰੀ ਬਾਰੇ ਸਵਾਲ-ਜਵਾਬ!
👉🏻 ਕੋਈ ਵੀ ਕਿੰਨਾ ਵੀ ਰਸੂਖ਼ਦਾਰ ਅਤੇ ਸਿਆਸੀ ਪਹੁੰਚ ਵਾਲ਼ਾ ਹੋਵੇ, ਨਸ਼ਿਆਂ ਸੰਬੰਧੀ ਸਭ ‘ਤੇ ਸਖ਼ਤ ਕਾਰਵਾਈ ਹੋਣੀ ਚਾਹੀਦੀ
👉🏻 ਅਮਿਤ ਸ਼ਾਹ ਨੂੰ ਨਸ਼ਿਆਂ ਵਿਰੁੱਧ ਯਾਤਰਾ ਤੇ ਰੈਲੀ ਦਾ ਹੱਕ ਨਹੀਂ, ਪਹਿਲਾਂ ਗੁਜਰਾਤ ‘ਚ ਨਸ਼ੇ ‘ਤੇ ਕਾਬੂ… pic.twitter.com/j8mWQVRGb3
— AAP Punjab (@AAPPunjab) September 30, 2026
धालीवाल ने पंजाब में नशे की समस्या के लिए 2007 से 2017 के अकाली-BJP शासनकाल को जिम्मेदार ठहराते हुए राजनीतिक आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि इसी अवधि में राज्य में नशे का नेटवर्क व्यापक हुआ और मजीठिया तथा उनके सहयोगियों की भूमिका की जांच होनी चाहिए। ये AAP नेता द्वारा लगाए गए राजनीतिक आरोप हैं, जिनका संबंधित विपक्षी पक्षों की ओर से अलग रुख रहा है।
धालीवाल ने कहा कि नशे के कारोबार में जो भी व्यक्ति शामिल पाया जाता है, उसके खिलाफ कानून के तहत कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि राजनीतिक प्रभाव या पद किसी व्यक्ति को जांच से बाहर रखने का आधार नहीं होना चाहिए।
अमित शाह और BJP से गुजरात को लेकर सवाल
कुलदीप सिंह धालीवाल ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और BJP के नशा विरोधी अभियान पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि गुजरात के बंदरगाहों के जरिए देश में नशीले पदार्थों की बड़ी खेप आने के आरोप सामने आते रहे हैं और ऐसे में BJP को पहले गुजरात से जुड़े सवालों का जवाब देना चाहिए। उन्होंने सवाल किया कि BJP की ‘नशा मुक्त पंजाब यात्रा’ की शुरुआत गुजरात से क्यों नहीं की जाती।
धालीवाल के मुताबिक, पंजाब को नशे के मुद्दे पर घेरने से पहले केंद्र सरकार को देश में नशीले पदार्थों की सप्लाई और तस्करी के अलग-अलग रास्तों पर भी ध्यान देना चाहिए। उन्होंने नशे की समस्या को केवल पंजाब तक सीमित करके देखने के बजाय राष्ट्रीय स्तर पर कार्रवाई की जरूरत बताई।
सीमा सुरक्षा और ड्रोन तस्करी का मुद्दा
धालीवाल ने पंजाब-पाकिस्तान सीमा से होने वाली कथित ड्रग और हथियार तस्करी का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि ड्रोन के जरिए सीमा पार से नशीले पदार्थ और हथियार भेजे जाने की घटनाएं चिंता का विषय हैं। उन्होंने केंद्र सरकार से सीमा पर निगरानी मजबूत करने और एंटी-ड्रोन सिस्टम लगाने की मांग की।
उन्होंने दावा किया कि पंजाब सरकार अपने अधिकार क्षेत्र में नशे के खिलाफ कार्रवाई कर रही है, जबकि सीमा सुरक्षा से जुड़े विषयों में केंद्र की भूमिका महत्वपूर्ण है। धालीवाल ने कहा कि नशा तस्करी में जो भी व्यक्ति शामिल पाया जाए, उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए।
नशे के मुद्दे पर बढ़ी राजनीतिक बयानबाजी
पंजाब में नशे का मुद्दा इस समय राजनीतिक बहस के केंद्र में है। BJP की ‘नशा मुक्त पंजाब यात्रा’ के बीच AAP नेताओं ने पुराने मामलों, सीमा से कथित तस्करी और गुजरात से जुड़े सवाल उठाए हैं। दूसरी ओर, विपक्षी दल AAP सरकार की नशे के खिलाफ कार्रवाई और उसके दावों पर सवाल उठाते रहे हैं।
कुलदीप सिंह धालीवाल का कहना है कि नशे के खिलाफ कार्रवाई में किसी तरह का भेदभाव नहीं होना चाहिए। उनका जोर इस बात पर है कि जांच एजेंसियां मामले से जुड़े सभी लोगों से पूछताछ करें और जांच तथ्यों व कानूनी प्रक्रिया के आधार पर आगे बढ़े। मजीठिया और अन्य संबंधित पक्षों के खिलाफ लगाए गए राजनीतिक आरोपों का अंतिम निर्धारण जांच और न्यायिक प्रक्रिया के जरिए ही होगा।