केरल में UDF की बंपर जीत: कौन बनेगा मुख्यमंत्री? के. मुरलीधरन ने बताया कब होगा नाम का ऐलान

केरल में UDF की बंपर जीत: कौन बनेगा मुख्यमंत्री? के. मुरलीधरन ने बताया कब होगा नाम का ऐलान

 

केरल विधानसभा चुनाव 2026 में UDF की ऐतिहासिक जीत के बाद मुख्यमंत्री के नाम पर सस्पेंस बरकरार है। के. मुरलीधरन के अनुसार, कांग्रेस आलाकमान वरिष्ठ नेताओं से चर्चा के बाद रविवार तक अंतिम फैसला लेगा।

केरल की राजनीति में एक दशक बाद आए इस बड़े सत्ता परिवर्तन ने कांग्रेस के भीतर नई ऊर्जा और चुनौतियों, दोनों को जन्म दे दिया है। 140 सदस्यीय विधानसभा में यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (UDF) की 102 सीटों पर मिली प्रचंड जीत न केवल एलडीएफ के किले को ढहाने वाली रही, बल्कि इसने कांग्रेस को राज्य में फिर से एक मजबूत धुरी के रूप में स्थापित कर दिया है। हालांकि, इस ऐतिहासिक जनादेश के बाद अब सबसे बड़ा और संवेदनशील सवाल यह है कि केरल की कमान किसके हाथों में होगी? तिरुवनंतपुरम के केरल कांग्रेस मुख्यालय (इंदिरा भवन) में हुई कांग्रेस विधायक दल (CLP) की बैठक इस दिशा में पहला औपचारिक कदम थी, जहाँ मंथन का दौर तो चला, लेकिन अंतिम निर्णय की गेंद पार्टी आलाकमान के पाले में डाल दी गई है।

आलाकमान की भूमिका और दिल्ली में हलचल

कांग्रेस के कद्दावर नेता के. मुरलीधरन ने मीडिया से बातचीत में साफ कर दिया है कि मुख्यमंत्री के चयन में किसी भी प्रकार की जल्दबाजी या स्थानीय दबाव के बजाय संगठनात्मक प्रक्रिया का पालन किया जा रहा है। मुकुल वासनिक जैसे केंद्रीय पर्यवेक्षकों की मौजूदगी में हुई बैठक में नवनिर्वाचित विधायकों ने एक स्वर में यह प्रस्ताव पारित किया कि विधायक दल के नेता का अंतिम चयन कांग्रेस आलाकमान यानी मल्लिकार्जुन खड़गे, सोनिया गांधी और राहुल गांधी करेंगे। मुरलीधरन के अनुसार, पर्यवेक्षक दिल्ली लौट चुके हैं और उनकी विस्तृत रिपोर्ट आज आलाकमान को सौंपी जाएगी। शनिवार को दिल्ली में वरिष्ठ नेताओं के साथ होने वाला परामर्श यह तय करेगा कि राज्य की राजनीतिक और सामाजिक समीकरणों के लिए कौन सा चेहरा सबसे उपयुक्त होगा। उम्मीद जताई जा रही है कि रविवार तक केरल के नए मुख्यमंत्री के नाम की घोषणा कर दी जाएगी।

गुटबाजी की आशंका और एकजुटता का संदेश

केरल कांग्रेस का इतिहास अक्सर गुटबाजी और ‘ए’ और ‘आई’ ग्रुप्स के बीच की प्रतिस्पर्धा से प्रभावित रहा है। यही कारण है कि के. मुरलीधरन को बार-बार एकजुटता का भरोसा देना पड़ रहा है। वर्तमान में मुख्यमंत्री पद की रेस में वी.डी. सतीशन और के. सुधाकरण जैसे दिग्गजों के नाम चर्चा में हैं, जिसके कारण समर्थकों के बीच एक अदृश्य तनाव महसूस किया जा रहा है। हालांकि, मुरलीधरन ने बहुत ही परिपक्वता के साथ इन चर्चाओं को ‘प्रक्रिया का हिस्सा’ बताया और स्पष्ट किया कि पार्टी में किसी भी तरह के विद्रोह या बगावत की कोई संभावना नहीं है। उन्होंने जोर देकर कहा कि आलाकमान का फैसला आने के बाद पूरी पार्टी और गठबंधन (UDF) एक इकाई के रूप में काम करेगा। कांग्रेस नेतृत्व के लिए चुनौती यह है कि वह एक ऐसे नेता को चुने जो न केवल प्रशासन चलाने में सक्षम हो, बल्कि गठबंधन के अन्य घटक दलों (जैसे मुस्लिम लीग) के साथ भी बेहतर समन्वय बिठा सके।

जनादेश का सम्मान और भविष्य की चुनौतियां

UDF की 102 सीटों की जीत, जिसमें कांग्रेस की 63 सीटें शामिल हैं, यह दर्शाती है कि केरल की जनता ने बदलाव के लिए एक स्पष्ट संदेश दिया है। अब इस भारी बहुमत को एक स्थिर और कुशल सरकार में बदलना कांग्रेस की प्राथमिकता है। मुकुल वासनिक के अनुसार, विधायकों ने सर्वसम्मति से आलाकमान को अधिकृत करके यह सुनिश्चित किया है कि नेतृत्व का चयन लोकतांत्रिक और विवाद मुक्त रहे। कांग्रेस जानती है कि केरल में यह जीत उसके राष्ट्रीय पुनरुद्धार के लिए भी संजीवनी है, इसलिए मुख्यमंत्री के चेहरे पर लगने वाली मुहर न केवल राज्य की राजनीति को प्रभावित करेगी, बल्कि 2026 के राजनीतिक परिदृश्य में पार्टी की छवि को भी मजबूती देगी। अब सभी की निगाहें दिल्ली के 10 जनपथ और एआईसीसी मुख्यालय पर टिकी हैं, जहाँ से अगले 48 घंटों में केरल का राजनीतिक भविष्य तय होने वाला है।

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