पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में भाजपा की ऐतिहासिक जीत के बाद आज कोलकाता में विधायक दल की बैठक होगी। अमित शाह की मौजूदगी में शुभेंदु अधिकारी को मुख्यमंत्री चुना जा सकता है। जानें पूरी रिपोर्ट।
पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक नए युग की शुरुआत करते हुए, भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने राज्य में ऐतिहासिक जीत दर्ज की है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के 15 साल के शासन को समाप्त कर भाजपा पहली बार बंगाल की सत्ता पर काबिज होने जा रही है।
कोलकाता में भाजपा विधायक दल की बैठक आज
पश्चिम बंगाल में नई सरकार के गठन की प्रक्रिया तेज हो गई है। शुक्रवार को कोलकाता में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की उपस्थिति में भाजपा विधायक दल की महत्वपूर्ण बैठक होने जा रही है। इस बैठक में औपचारिक रूप से विधायक दल के नेता का चुनाव किया जाएगा। पार्टी सूत्रों के अनुसार, नंदीग्राम और भवानीपुर जैसे हाई-प्रोफाइल मुकाबलों में ममता बनर्जी को मात देने वाले शुभेंदु अधिकारी मुख्यमंत्री पद की दौड़ में सबसे आगे चल रहे हैं।
ममता बनर्जी के गढ़ में सेंध और ऐतिहासिक जनादेश
हाल ही में संपन्न हुए विधानसभा चुनावों में भाजपा ने शानदार प्रदर्शन करते हुए बहुमत का आंकड़ा पार किया है। विशेष रूप से भवानीपुर सीट, जिसे ममता बनर्जी का अभेद्य किला माना जाता था, वहां शुभेंदु अधिकारी की 15,000 से अधिक मतों से जीत ने उनके कद को पार्टी के भीतर और ऊंचा कर दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, अधिकारी की संगठनात्मक पकड़ और ममता बनर्जी के खिलाफ उनके आक्रामक चुनाव प्रचार ने ही इस बड़ी जीत की नींव रखी।
ब्रिगेड परेड ग्राउंड में भव्य शपथ ग्रहण समारोह
पश्चिम बंगाल की पहली भाजपा सरकार का शपथ ग्रहण समारोह 9 मई को कोलकाता के ऐतिहासिक ब्रिगेड परेड ग्राउंड में आयोजित किया जाएगा। इस ऐतिहासिक पल का गवाह बनने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, अमित शाह, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन और एनडीए शासित राज्यों के कई मुख्यमंत्री शामिल होंगे।
नेतृत्व की दौड़ में अन्य चर्चित नाम
हालांकि शुभेंदु अधिकारी मुख्यमंत्री पद के लिए सबसे प्रबल दावेदार माने जा रहे हैं, लेकिन पार्टी के भीतर कुछ अन्य नामों पर भी चर्चा जारी है। इनमें प्रदेश भाजपा अध्यक्ष शमिक भट्टाचार्य और पूर्व राज्यसभा सांसद स्वपन दासगुप्ता का नाम शामिल है। दासगुप्ता को पार्टी का एक बौद्धिक चेहरा माना जाता है, जबकि भट्टाचार्य को चुनावी अभियान के दौरान संगठन को एकजुट रखने का श्रेय दिया जा रहा है। अंतिम निर्णय भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व विधायक दल की बैठक के बाद लेगा।