“जब लहर थी तब 3 सीटें, अब जब लोकप्रियता कम है तो जीत कैसे?”: भाजपा पर केजरीवाल का सीधा वार

"जब लहर थी तब 3 सीटें, अब जब लोकप्रियता कम है तो जीत कैसे?": भाजपा पर केजरीवाल का सीधा वार

अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली और बंगाल में भाजपा की जीत पर उठाए सवाल। 2015-16 के आंकड़ों का हवाला देते हुए पूछा- गिरती लोकप्रियता के बीच भाजपा की जीत का रहस्य क्या है? पूरी रिपोर्ट यहाँ पढ़ें।

मोदी लहर’ में 3 सीटें और अब जीत? केजरीवाल का भाजपा पर तीखा हमला

आम आदमी पार्टी के आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल और अरविंद केजरीवाल के हालिया बयानों के अनुसार, भाजपा की चुनावी जीत पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। केजरीवाल ने तर्क दिया है कि जिस दिल्ली और बंगाल में भाजपा 2015 और 2016 में ‘मोदी लहर’ के चरम पर होने के बावजूद मात्र 3-3 सीटों पर सिमट गई थी, वहां आज उनकी जीत कई संदेह पैदा करती है। उनके अनुसार, यह जीत तब हुई है जब देश में महंगाई और बेरोजगारी के कारण प्रधानमंत्री की लोकप्रियता में गिरावट की बातें कही जा रही हैं।

लोकतंत्र और पारदर्शिता पर सवाल

अरविंद केजरीवाल ने अपने पोस्ट में इस बात पर जोर दिया कि लोकतंत्र में जनता का विश्वास सबसे ऊपर होता है। उन्होंने सवाल उठाया कि 2015-16 के दौर में, जब देश में एक मजबूत राजनीतिक लहर का दावा किया जा रहा था, तब दिल्ली और बंगाल की जागरूक जनता ने भाजपा को नकारते हुए महज 3-3 सीटों पर समेट दिया था। आज जब आर्थिक मोर्चे पर चुनौतियां बढ़ी हैं और जमीनी स्तर पर सत्ता विरोधी लहर (anti-incumbency) की बात हो रही है, तब भाजपा का चुनावी ग्राफ अचानक ऊपर चढ़ना तर्कसंगत नहीं लगता।

आर्थिक बदहाली और गिरती लोकप्रियता का नैरेटिव

आम आदमी पार्टी के आधिकारिक हैंडल से साझा किए गए तर्कों के अनुसार, देश इस समय रिकॉर्ड तोड़ महंगाई और बेरोजगारी के दौर से गुजर रहा है। केजरीवाल ने ‘X’ पर लिखा कि जनता बुनियादी सुविधाओं और जेब पर पड़ते बोझ से परेशान है। ऐसे में यह समझ से परे है कि प्रधानमंत्री की जिस लोकप्रियता को भाजपा अपनी जीत का आधार बताती है, वह पाताल की ओर जाने के बावजूद वोटों में कैसे तब्दील हो रही है। उन्होंने इसे एक राजनीतिक पहेली करार दिया।

संस्थाओं की भूमिका पर संदेह

AAP प्रमुख ने सीधे तौर पर चुनावी प्रक्रिया और केंद्रीय एजेंसियों के दखल पर भी निशाना साधा। उनके अनुसार, भाजपा शासित राज्यों के अलावा जहां भी विपक्ष मजबूत है, वहां सत्ता को अस्थिर करने या मतदाताओं को प्रभावित करने के लिए ‘साम-दाम-दंड-भेद’ का सहारा लिया जा रहा है। केजरीवाल का आरोप है कि दिल्ली और बंगाल जैसे राज्यों में भाजपा की जीत जनमत की स्वाभाविक अभिव्यक्ति नहीं, बल्कि किसी विशेष रणनीति या ‘मैनेजमेंट’ का परिणाम हो सकती है।

जनता से एकजुट होने की अपील

अपने संबोधन के अंत में केजरीवाल ने दिल्ली और बंगाल की जनता को याद दिलाया कि वे हमेशा से अन्याय और तानाशाही के खिलाफ खड़े रहे हैं। उन्होंने ‘X’ के माध्यम से संदेश दिया कि पंजाब, दिल्ली और बंगाल जैसे राज्य देश की राजनीति को नई दिशा देते हैं। भाजपा की इस कथित जीत को उन्होंने क्षणिक बताते हुए कहा कि सच्चाई ज्यादा दिनों तक छिप नहीं सकती और आने वाले समय में जनता इन चुनावी विरोधाभासों का जवाब जरूर देगी।

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