दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी (AAP) के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली हाई कोर्ट की जज स्वर्ण कांता शर्मा को एक पत्र लिखकर बड़ा बयान दिया है। अपने पत्र में उन्होंने कहा है कि उन्हें अब न्याय मिलने की उम्मीद नहीं रही, इसलिए वे महात्मा गांधी के बताए सत्याग्रह के मार्ग पर चलने का निर्णय ले रहे हैं।
हाई कोर्ट के फैसले के बाद बढ़ा विवाद
यह पूरा मामला उस समय शुरू हुआ जब 20 अप्रैल को दिल्ली हाई कोर्ट की जज स्वर्ण कांता शर्मा ने केजरीवाल की वह याचिका खारिज कर दी थी, जिसमें उन्होंने आबकारी नीति से जुड़े केस को किसी अन्य बेंच में स्थानांतरित करने की मांग की थी। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया था कि केवल बिना ठोस आधार के किसी न्यायाधीश पर पूर्वाग्रह का आरोप लगाकर केस ट्रांसफर नहीं किया जा सकता।
केजरीवाल का बड़ा आरोप और पत्र
अपने पत्र में केजरीवाल ने कहा कि अब उन्हें जस्टिस शर्मा से निष्पक्ष न्याय की उम्मीद नहीं बची है। उन्होंने यह भी दावा किया कि वे अब इस मामले में न तो व्यक्तिगत रूप से और न ही अपने वकीलों के माध्यम से अदालत में पेश होंगे।
हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वे अदालत के फैसले के खिलाफ अपील करने का अधिकार सुरक्षित रखेंगे और आवश्यकता पड़ने पर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा भी खटखटाएंगे।
In all humility and with complete respect for judiciary, I have written the following letter to Justice Swarna Kanta Sharma, informing her that pursuing Gandhian principles of Satyagraha, it won’t be possible for me to pursue this case in her court, either in person or through a… pic.twitter.com/HmyOyNYug8
— Arvind Kejriwal (@ArvindKejriwal) April 27, 2026
वीडियो संदेश में लगाए गंभीर आरोप
केजरीवाल ने एक वीडियो संदेश जारी करते हुए कहा कि जीवन में कभी-कभी सही और गलत के बीच चुनाव करना पड़ता है। उन्होंने दावा किया कि उन्हें झूठे केस में फंसाया गया और महीनों तक जेल में रखा गया।
उन्होंने यह भी कहा कि एक पहले के फैसले में अदालत ने उन्हें निर्दोष बताया था और सीबीआई जांच पर भी सवाल उठाए गए थे। इसके बावजूद, केस आगे हाई कोर्ट में पहुंचा।
जज पर पूर्वाग्रह के आरोप
केजरीवाल ने अपने वीडियो और पत्र में आरोप लगाया कि उन्हें न्याय प्रणाली पर भरोसा है, लेकिन कुछ परिस्थितियों के कारण उन्हें संदेह हो रहा है। उन्होंने दावा किया कि जज स्वर्ण कांता शर्मा का कुछ संगठनों से जुड़ाव होने की बात सामने आई है और उनके पारिवारिक संबंधों को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं।
हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें व्यक्तिगत रूप से जज से कोई आपत्ति नहीं है और वे उनका सम्मान करते हैं।
अदालत का रुख
इससे पहले हाई कोर्ट ने सुनवाई के दौरान साफ कहा था कि किसी भी पक्ष को बिना सबूत के न्यायाधीश की निष्पक्षता पर सवाल उठाने की अनुमति नहीं दी जा सकती। अदालत ने यह भी कहा था कि इस तरह की आशंका के आधार पर जज को केस से अलग होने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता।