झगड़िया GIDC हादसा: मजदूरों को न्याय दिलाने गए चैतर वसावा पर 3 FIR, ईसुदान गढवी ने भाजपा को घेरा

झगड़िया GIDC हादसा: मजदूरों को न्याय दिलाने गए चैतर वसावा पर 3 FIR, ईसुदान गढवी ने भाजपा को घेरा

भरूच के झगड़िया GIDC में रासायनिक कंपनी में हुए विस्फोट के बाद पीड़ितों के लिए न्याय मांगने पहुंचे AAP विधायक चैतर वसावा पर पुलिस ने FIR दर्ज की है। ईसुदान गढवी ने इसे भाजपा की साजिश बताया है।

लापरवाही ने ली 2 मासूम मजदूरों की जान, 16 झुलसे; कंपनी के बचाव में उतरी पुलिस?

गुजरात के भरूच जिले में स्थित झगड़िया GIDC की एक निजी रासायनिक कंपनी (मेट्रोपॉलिटन एक्सिमकेम) में हुई भीषण आग और विस्फोट की घटना ने औद्योगिक सुरक्षा की पोल खोल दी है। इस हादसे में 16 मजदूर गंभीर रूप से झुलस गए, जिनमें से इलाज के दौरान 2 मजदूरों ने दम तोड़ दिया। जब आम आदमी पार्टी के विधायक और गुजरात प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष श्री चैतर वसावा अपनी टीम के साथ इन पीड़ित मजदूरों और उनके परिवारों को न्याय और उचित मुआवजे दिलाने के लिए कंपनी पहुंचे, तो वहाँ उनके साथ अभद्र व्यवहार किया गया। ‘आप’ का आरोप है कि कंपनी प्रबंधन ने पीड़ितों की मदद करने के बजाय पुलिस के साथ मिलकर विधायक को ही निशाना बनाया।

न्याय की आवाज़ उठाने पर चैतर वसावा को जेल भेजने की साजिश?

आम आदमी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष ईसुदान गढवी (@isudan_gadhvi) और पार्टी कार्यकर्ताओं ने सोशल मीडिया पर इस घटना की कड़ी निंदा की है। ‘आप’ ने आरोप लगाया है कि भाजपा सरकार और पुलिस प्रशासन कंपनी के मालिक के खिलाफ कार्रवाई करने के बजाय चैतर वसावा को झूठे मामलों में फंसाने की साजिश रच रहे हैं। उन पर तीन अलग-अलग FIR दर्ज की गई हैं। चैतर वसावा ने एक वीडियो संदेश में कहा, “पुलिस को कंपनी के खिलाफ FIR दर्ज करनी चाहिए थी, लेकिन वे मुझे डराने के लिए मुझ पर ही केस कर रहे हैं। मैं मजदूरों के हक की लड़ाई से पीछे नहीं हटूंगा, चाहे मुझे जेल ही क्यों न भेज दिया जाए।”

वंचितों के मसीहा को दबाने की कोशिश: आम आदमी पार्टी

चैतर वसावा हमेशा से आदिवासियों और औद्योगिक मजदूरों के अधिकारों के लिए मुखर रहे हैं। आम आदमी पार्टी ने स्पष्ट कर दिया है कि वे अपने विधायक के साथ मजबूती से खड़ी है। पार्टी का कहना है कि यह पहली बार नहीं है जब भाजपा ने जनसेवा करने वाले नेताओं को जेल की धमकियों से दबाने की कोशिश की है। स्थानीय लोगों में भी इस बात को लेकर भारी रोष है कि जिस प्रशासन को मरने वालों और अस्पतालों में लड़ रहे मजदूरों की फिक्र होनी चाहिए, वह एक जन प्रतिनिधि को प्रताड़ित करने में लगा है।

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