राज्यसभा सांसदों के दल-बदल पर राष्ट्रपति से मिलेंगे भगवंत मान; 5 मई को ‘राइट टू रिकॉल’ की करेंगे मांग

राज्यसभा सांसदों के दल-बदल पर राष्ट्रपति से मिलेंगे भगवंत मान; 5 मई को 'राइट टू रिकॉल' की करेंगे मांग

पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान 5 मई को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मिलेंगे। वे भाजपा में शामिल हुए 6 राज्यसभा सांसदों की सदस्यता रद्द करने और राइट टू रिकॉल की मांग करेंगे।

6 सांसदों की सदस्यता रद्द करने और ‘राइट टू रिकॉल’ की करेंगे मांग

चंडीगढ़/नई दिल्ली: आम आदमी पार्टी (AAP) के राज्यसभा सांसदों द्वारा पाला बदलकर भाजपा में शामिल होने के मुद्दे पर पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान अब देश की सर्वोच्च शक्ति का दरवाजा खटखटाने जा रहे हैं। मुख्यमंत्री मान आगामी 5 मई, 2026 को दोपहर 12 बजे राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात करेंगे। इस बैठक का मुख्य एजेंडा उन 6 राज्यसभा सांसदों (मुख्यतः पंजाब से) की सदस्यता रद्द करवाना है, जिन्होंने हाल ही में कथित तौर पर भाजपा का दामन थाम लिया है। मुख्यमंत्री मान इस दौरान ‘राइट टू रिकॉल’ (प्रतिनिधि वापस बुलाने का अधिकार) के तहत इन सांसदों के इस्तीफे और खाली सीटों पर नए सिरे से चुनाव कराने की मांग राष्ट्रपति के समक्ष रखेंगे।

अकेले मिलने की मिली अनुमति, पर सभी विधायकों संग शक्ति प्रदर्शन की तैयारी

मुख्यमंत्री भगवंत मान ने शुरुआत में राष्ट्रपति भवन से अपने सभी 94 विधायकों के साथ मुलाकात करने की अनुमति मांगी थी, ताकि सामूहिक रूप से विरोध दर्ज कराया जा सके। हालांकि, राष्ट्रपति भवन ने केवल मुख्यमंत्री को ही अकेले मिलने का समय दिया है। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए मुख्यमंत्री मान ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर स्पष्ट किया कि भले ही उन्हें अकेले मिलने के लिए बुलाया गया है, लेकिन वे पंजाब के सभी ‘आप’ विधायकों को साथ लेकर राष्ट्रपति भवन जाएंगे। विधायक भवन के बाहर मौजूद रहेंगे, जबकि मान अंदर जाकर व्यक्तिगत रूप से पंजाब की जनता और विधायकों की आवाज को राष्ट्रपति के सामने रखेंगे।

लोकतंत्र की मर्यादा और ‘धोखे’ का मुद्दा उठाएगी AAP

भगवंत मान का तर्क है कि इन सांसदों को पंजाब के विधायकों ने ‘आप’ के जनादेश पर चुनकर राज्यसभा भेजा था, ऐसे में दल-बदल करना मतदाताओं के साथ विश्वासघात है। मुख्यमंत्री ने अपनी पोस्ट में लिखा कि वे राष्ट्रपति को बताएंगे कि किस तरह इन सांसदों ने जनादेश का अपमान किया है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि विधायकों के साथ दिल्ली कूच करना मुख्यमंत्री का एक बड़ा ‘शक्ति प्रदर्शन’ है, जिसके जरिए वे यह संदेश देना चाहते हैं कि सांसदों के जाने के बावजूद पंजाब सरकार और उनके विधायक पूरी तरह एकजुट हैं।

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