जावेद अख्तर ने उम्र को लेकर आमिर खान को मजेदार अंदाज में सुधारा; जुनैद खान की ‘एक दिन’ को मिला ठंडा रिस्पांस

जावेद अख्तर ने उम्र को लेकर आमिर खान को मजेदार अंदाज में सुधारा; जुनैद खान की 'एक दिन' को मिला ठंडा रिस्पांस

जावेद अख्तर और आमिर खान की उम्र वाली मजेदार बातचीत वायरल। वहीं आमिर खान के बेटे जुनैद खान की नई फिल्म ‘एक दिन’ को समीक्षकों ने दिए केवल 2 स्टार।

“अभी मैं सिर्फ 80 का हूँ”: जावेद अख्तर की मजेदार टिप्पणी

कार्यक्रम के दौरान आमिर खान ने जावेद अख्तर से उनकी उम्र और काम को लेकर एक सवाल पूछा। आमिर ने कहा, “आप अपनी ‘अस्सी की उम्र’ (eighties) में भी बीस साल के युवाओं के साथ काम कर रहे हैं, आप हर पीढ़ी के साथ प्रासंगिक (relevant) कैसे बने रहते हैं?” इस पर जावेद अख्तर ने तुरंत उन्हें बीच में टोकते हुए मजाकिया अंदाज में कहा, “सबसे पहले तो यह ‘eighties’ कहना बंद करो। क्योंकि अस्सी (eighties) में तो 87 भी आता है, लेकिन मैं अभी सिर्फ 80 का हुआ हूँ। तुम्हारे इस ‘s’ लगा देने से मेरी उम्र पर बहुत नकारात्मक प्रभाव पड़ा है।” जावेद साहब की यह हाजिरजवाबी सुनकर आमिर खान भी हंस पड़े और उन्होंने तुरंत माफी मांग ली।

आमिर खान और जावेद अख्तर का गहरा रिश्ता

आमिर खान ने जावेद अख्तर के प्रति अपना सम्मान व्यक्त करते हुए कहा कि वे अक्सर यूट्यूब पर उनके वीडियो देखते हैं और उनसे बात करने के लिए फोन भी करते हैं। आमिर यह जानना चाहते थे कि दशकों से फिल्म इंडस्ट्री का हिस्सा रहने के बावजूद जावेद अख्तर कैसे हर दौर के बदलावों को इतनी सहजता से अपना लेते हैं। यह बातचीत दिखाती है कि उम्र के इस पड़ाव पर भी जावेद अख्तर का मानसिक उत्साह और शब्दों पर पकड़ आज के युवाओं के बराबर ही है।

आमिर के बेटे जुनैद की फिल्म ‘एक दिन’ का रिव्यू

एक तरफ जहाँ आमिर अपनी बातचीत को लेकर चर्चा में हैं, वहीं उनके प्रोडक्शन के बैनर तले बनी उनके बेटे जुनैद खान और साई पल्लवी की फिल्म ‘एक दिन’ को समीक्षकों से कुछ खास रिस्पॉन्स नहीं मिला है। न्यूज़18 ने इस फिल्म को केवल 2 स्टार दिए हैं। फिल्म के बारे में कहा गया है कि इसके दूसरे ट्रेलर ने ही पूरी कहानी उजागर कर दी थी, जिससे दर्शकों के लिए फिल्म में कुछ नया नहीं बचा। हालांकि फिल्म की मंशा साफ है और यह एक शांत कहानी है, लेकिन यही शांति बाद में दर्शकों को अखरने लगती है।

जुनैद खान के अभिनय पर सवाल

फिल्म समीक्षकों के अनुसार, जुनैद खान का अभिनय इस फिल्म में थोड़ा “उलझा हुआ” और “अनिश्चित” नजर आता है। फिल्म में एक संवाद है जहाँ वे अपनी और नायिका की स्थिति की तुलना करते हुए कहते हैं, “गरीब का बच्चा जिस तरह खिलौने की दुकान को देखता है…”, लेकिन भावुक दृश्यों में भी जुनैद अपनी भूमिका के साथ पूरी तरह न्याय करते नहीं दिखे। समीक्षकों का मानना है कि साई पल्लवी के साथ उनकी केमिस्ट्री में भी वह जादुई अहसास गायब था जो कहानी को बांधे रख सके।

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