अभिनेत्री तनीषा मुखर्जी ने बिग बॉस 7 के अपने अनुभव को ‘ट्रॉमा’ करार दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रतियोगियों ने स्क्रीन टाइम के लिए काजोल और अजय देवगन के नाम का इस्तेमाल किया। जानें पूरी खबर।
अभिनेत्री तनीषा मुखर्जी, जो रियलिटी शो ‘बिग बॉस 7’ की उपविजेता (First Runner-up) रही थीं, ने हाल ही में अपने उस अनुभव को लेकर कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। एक ताज़ा इंटरव्यू में तनीषा ने बिग बॉस के घर में बिताए गए समय को ‘दर्दनाक’ (Traumatic) और भावनात्मक रूप से झकझोर देने वाला बताया। उन्होंने साझा किया कि उस समय वह काफी भोली थीं और बिना शो की प्रकृति को समझे ही उन्होंने इसमें प्रवेश कर लिया था।
“बिग बॉस में मेरा अनुभव डरावना था”: तनीषा मुखर्जी
तनीषा मुखर्जी ने ‘ममराजी’ (Mamaraazzi) के साथ बातचीत के दौरान स्वीकार किया कि बिग बॉस के घर के अंदर का माहौल उनके लिए बहुत सहज नहीं था। उन्होंने कहा, “आज भी बहुत से लोग मुझे बिग बॉस के लिए याद करते हैं और कहते हैं कि तनीषा बहुत कूल और ईमानदार थी। लेकिन सच यह है कि मैं वहां उतना नहीं बोल पाई जितना बोलना चाहती थी, क्योंकि मैं भाषा (हिंदी) के साथ सहज नहीं थी।” तनीषा ने बताया कि 10-12 साल पहले उनकी हिंदी उतनी अच्छी नहीं थी जितनी आज है। उस समय वह ज्यादातर अंग्रेजी में बात करती थीं, जिसके कारण शो के मेकर्स ने उनके कई संवादों को काट दिया था।
परिवार के नाम का इस्तेमाल और स्क्रीन टाइम की राजनीति
तनीषा ने एक बेहद गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि शो के अन्य प्रतियोगियों ने फुटेज और स्क्रीन टाइम पाने के लिए उनके परिवार के नाम का सहारा लिया। उन्होंने कहा, “मुझे घर से बाहर आने तक इस बात का अंदाजा नहीं था कि लोग मेरा, मेरी बहन काजोल और मेरे जीजा अजय देवगन का नाम सिर्फ चर्चा में आने के लिए इस्तेमाल कर रहे थे। यह मेरी मासूमियत थी कि मैं समझ नहीं पाई।” तनीषा ने भावुक होते हुए कहा कि आज वह खुद को कभी ऐसी स्थिति में नहीं रखेंगी जहां उनके कारण किसी को भी उनके परिवार के बारे में कुछ भी कहने का अधिकार मिले।
निजी हमलों और चैनल के व्यवहार से पहुंची चोट
शो के दौरान हुए झगड़ों को याद करते हुए तनीषा ने बताया कि उन्होंने कभी किसी प्रतियोगी पर व्यक्तिगत हमला नहीं किया और न ही कभी किसी के परिवार को बीच में घसीटा। इसके विपरीत, अन्य लोग लगातार उनके परिवार को निशाना बना रहे थे। उन्होंने कहा, “उस अनुभव ने मुझे बहुत अधिक सतर्क (Guarded) बना दिया है। लोग वास्तव में मेरे परिवार के पीछे पड़ गए थे। यहां तक कि कभी-कभी चैनल के व्यवहार ने भी मुझे बहुत दुखी किया।” तनीषा के अनुसार, रियलिटी शो अक्सर प्रतियोगियों की भावनाओं के साथ खेलकर अपनी टीआरपी बढ़ाते हैं।
सेलेब्रिटी स्टेटस और ‘फ्री’ में आने का सवाल
शो के दौरान एक बड़ा मुद्दा यह बना था कि तनीषा का परिवार उनसे मिलने बिग बॉस के घर क्यों नहीं आ रहा है। इस पर तीखा जवाब देते हुए तनीषा ने कहा, “लोग पूछते थे कि मेरा परिवार मुझसे मिलने क्यों नहीं आ रहा? मेरा जवाब सीधा था—यह एक टीवी शो है और यहां हर किसी को पैसे दिए जा रहे हैं। मेरे परिवार के सदस्य बहुत बड़े सेलेब्रिटी हैं। अगर आप उन्हें भुगतान करेंगे, तो वे आएंगे। वे मुफ्त में क्यों आएं?” उन्होंने स्पष्ट किया कि एक पेशेवर शो में व्यक्तिगत भावनाओं को व्यावसायिक लाभ के लिए इस्तेमाल करना गलत है।
‘ट्रॉमा बॉन्ड’ और रियलिटी शो की कड़वी सच्चाई
जब उनसे पूछा गया कि क्या बिग बॉस का अनुभव उनके लिए मानसिक आघात (Trauma) जैसा था, तो उन्होंने बिना झिझक ‘हाँ’ कहा। तनीषा ने तर्क दिया, “बिग बॉस जैसे रियलिटी शो ‘ट्रॉमा’ पर ही टिके होते हैं। वहां बनने वाली दोस्ती भी अक्सर ‘ट्रॉमा बॉन्डिंग’ होती है। जब आप उस आघात से बाहर निकलकर खुद को ठीक (Heal) कर लेते हैं, तो आपको एहसास होता है कि वे लोग वास्तव में आपके दोस्त नहीं थे। ठीक होने के बाद, आपको उनके व्यवहार या बातें फिर कभी दिलचस्प नहीं लगतीं।”
तनीषा मुखर्जी के इन बयानों ने एक बार फिर रियलिटी शो के पीछे छिपे तनाव और परिवारों पर पड़ने वाले इसके प्रभाव की बहस को छेड़ दिया है। 750 शब्दों के इस विस्तृत विश्लेषण से स्पष्ट है कि ग्लैमर की चमक के पीछे छिपी कड़वाहट प्रतियोगियों के मानसिक स्वास्थ्य पर गहरा असर डालती है।