मोरबी किसान लाठीचार्ज: इसुदान गढ़वी का भाजपा सरकार पर बड़ा हमला, कहा- ‘5.4 करोड़ किसानों का हुआ अपमान’

मोरबी किसान लाठीचार्ज: इसुदान गढ़वी का भाजपा सरकार पर बड़ा हमला, कहा- '5.4 करोड़ किसानों का हुआ अपमान'

 

 

मोरबी में किसानों पर लाठीचार्ज के बाद इसुदान गढ़वी ने भाजपा को घेरा। कहा- भाजपा सरकार किसानों की जमीन छीनकर कंपनियों को फायदा पहुंचा रही है।

गुजरात में किसानों के आंदोलन और उनके साथ हुए कथित दुर्व्यवहार को लेकर आम आदमी पार्टी (AAP) ने भाजपा सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। पार्टी के वरिष्ठ नेता इसुदान गढ़वी ने मोरबी में किसानों पर हुए लाठीचार्ज की कड़ी निंदा करते हुए इसे राज्य के 5.4 करोड़ किसानों का अपमान करार दिया है। उन्होंने भाजपा सरकार को ‘किसान विरोधी’ बताते हुए किसानों से एकजुट होने का आह्वान किया है।

इसुदान गढ़वी का आरोप: ‘भाजपा का मुनाफा, किसानों का विनाश’

इसुदान गढ़वी ने एक कड़े बयान में आरोप लगाया कि भाजपा के नेता और उनके सहयोगी कंपनियां किसानों को ठगकर मुनाफा कमा रही हैं। उन्होंने कहा, “भाजपा के लोग किसानों को धोखा देकर अपना जेबें भर रहे हैं और निजी कंपनियां बिना उचित मुआवजा दिए किसानों की जमीनें हड़प रही हैं। यह अन्याय की पराकाष्ठा है।”

गढ़वी ने आगे कहा कि जब किसान अपनी जमीनों और अधिकारों के लिए आवाज उठाते हैं, तो सरकार उन्हें सुनने के बजाय उन पर लाठीचार्ज करवाती है और दमनकारी नीतियों का सहारा लेती है।

‘किसानों का अपमान बर्दाश्त नहीं’

इसुदान गढ़वी ने कहा कि गुजरात का किसान देश का अन्नदाता है, लेकिन आज उसे अपनी ही जमीन पर अपराधी की तरह व्यवहार झेलना पड़ रहा है। उन्होंने कहा:

  • दमनकारी नीति: भाजपा सरकार किसानों की आवाज दबाने के लिए पुलिस बल और सत्ता के नशे का इस्तेमाल कर रही है।
  • मुनाफाखोरी का खेल: निजी कंपनियों को फायदा पहुंचाने के लिए किसानों की उपजाऊ जमीनें छीनी जा रही हैं, जो सरासर गलत है।
  • एकजुट होने का आह्वान: गढ़वी ने स्पष्ट किया कि जब तक गुजरात के किसान इस ‘किसान विरोधी’ सरकार के खिलाफ एकजुट नहीं होंगे, तब तक उनकी स्थिति में सुधार नहीं आएगा।

क्या है AAP की मांग?

आम आदमी पार्टी ने मांग की है कि मोरबी में किसानों पर लाठीचार्ज करने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई हो और सरकार किसानों को उनकी जमीनों का उचित और बाजार भाव के अनुसार मुआवजा दे। गढ़वी ने चेतावनी दी कि अगर सरकार ने अपना रवैया नहीं बदला, तो आने वाले समय में किसान आंदोलन और अधिक उग्र होगा।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इसुदान गढ़वी का यह बयान गुजरात के ग्रामीण इलाकों में भाजपा की पकड़ को कमजोर करने और किसानों को एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनाने की रणनीति का हिस्सा है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा गुजरात की राजनीति में और गरमाने की उम्मीद है।

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