INS निपुण आज भारतीय नौसेना में कमीशन होगा। जानें गहरे समुद्र में पनडुब्बी बचाव, गोताखोरी, मरम्मत और निगरानी में सक्षम इस स्वदेशी पोत की खासियतें।
भारतीय नौसेना की ताकत में सोमवार को एक और बड़ा इजाफा होने जा रहा है। नौसेना को ऐसा अत्याधुनिक पोत मिलने जा रहा है, जो समुद्र की गहराइयों में बेहद जटिल सैन्य और बचाव अभियानों को अंजाम देने में सक्षम है। INS निपुण को आज मुंबई के नेवल डॉकयार्ड में भारतीय नौसेना में औपचारिक रूप से कमीशन किया जाएगा। यह सामान्य युद्धपोत नहीं है, बल्कि इसे विशेष रूप से गहरे समुद्र में गोताखोरी, पनडुब्बी बचाव, पानी के भीतर निगरानी, मरम्मत और मलबा हटाने जैसे कठिन अभियानों के लिए तैयार किया गया है। समुद्र की तेज लहरों और खराब मौसम के बीच भी अपनी स्थिति को स्थिर बनाए रखने की क्षमता इसे नौसेना के लिए बेहद महत्वपूर्ण बनाती है।
गहरे समुद्र में नौसेना की नई ताकत बनेगा INS निपुण
INS निपुण की सबसे बड़ी खासियत इसकी गहरे समुद्र में काम करने की क्षमता है। समुद्र की सतह पर सामान्य जहाजों के लिए जहां काम करना आसान होता है, वहीं पानी के भीतर कई तरह की चुनौतियां सामने आती हैं। अधिक गहराई, कम दृश्यता, तेज धाराओं और समुद्र के दबाव के कारण बचाव या मरम्मत अभियान बेहद मुश्किल हो जाते हैं। ऐसे समय में INS निपुण महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। यह जहाज अत्याधुनिक गोताखोरी प्रणालियों से लैस है, जिनकी मदद से प्रशिक्षित नौसैनिक समुद्र की गहराई में जाकर जरूरी अभियान चला सकते हैं।
पनडुब्बी फंसने पर आएगा बेहद काम
INS निपुण को पनडुब्बी बचाव अभियानों के लिए भी तैयार किया गया है। अगर किसी तकनीकी खराबी, दुर्घटना या अन्य कारणों से कोई पनडुब्बी समुद्र की गहराई में फंस जाती है तो उसे सुरक्षित बाहर निकालना बेहद चुनौतीपूर्ण होता है। ऐसे हालात में यह पोत बचाव अभियान के लिए मदर शिप की भूमिका निभा सकता है। इसके जरिए समुद्र में फंसे नौसैनिकों तक पहुंचने, उन्हें सुरक्षित बाहर निकालने और जरूरी सहायता उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी। इस क्षमता से भारतीय नौसेना की अंडरवाटर रेस्क्यू क्षमता और मजबूत होगी।
समुद्र के अंदर ही कर सकेगा मरम्मत
INS निपुण की एक और महत्वपूर्ण खूबी यह है कि यह समुद्र की सतह के नीचे मरम्मत संबंधी कार्यों में भी सहायता कर सकता है। यदि किसी जहाज, पनडुब्बी या समुद्री मशीनरी में पानी के भीतर खराबी आती है तो हर बार उसे सतह पर लाना संभव नहीं होता। ऐसी परिस्थितियों में निपुण के जरिए विशेषज्ञों को गहराई में जाकर आवश्यक निरीक्षण और मरम्मत करने में मदद मिल सकती है। इससे समय की बचत होगी और महत्वपूर्ण समुद्री संपत्तियों को जल्द से जल्द ऑपरेशनल स्थिति में लाया जा सकेगा।
रोबोट और अत्याधुनिक तकनीक से लैस
गहरे समुद्र में कई जगह ऐसी होती हैं जहां इंसानों के लिए सीधे जाना जोखिम भरा हो सकता है। INS निपुण में पानी के भीतर संचालित होने वाले रिमोट कंट्रोल रोबोट्स की सुविधा भी मौजूद है। इन रोबोट्स की मदद से समुद्र की गहराई में मौजूद वस्तुओं की खोज, निरीक्षण और जरूरी जानकारी जुटाई जा सकती है। अगर समुद्र में कोई मशीन, उपकरण या अन्य महत्वपूर्ण वस्तु डूब जाती है तो उसकी तलाश और उसे बाहर निकालने के अभियान में भी ये प्रणालियां उपयोगी साबित हो सकती हैं।
खराब मौसम में भी स्थिर रहेगा जहाज
समुद्र में किसी भी बचाव या मरम्मत अभियान के दौरान जहाज का स्थिर रहना बेहद जरूरी होता है। INS निपुण में आधुनिक डायनेमिक पोजिशनिंग सिस्टम लगाया गया है। इसकी मदद से जहाज तेज लहरों और खराब मौसम के बावजूद अपनी स्थिति को काफी हद तक स्थिर बनाए रख सकता है। यह क्षमता खास तौर पर गहरे समुद्र में गोताखोरी और बचाव अभियानों के दौरान महत्वपूर्ण होगी, क्योंकि अभियान के दौरान जहाज की स्थिति में ज्यादा बदलाव होने से गोताखोरों और अंडरवाटर उपकरणों के लिए खतरा बढ़ सकता है।
करीब 75 प्रतिशत हिस्सा स्वदेशी
INS निपुण की एक बड़ी विशेषता इसका स्वदेशी निर्माण भी है। जहाज का करीब 75 प्रतिशत हिस्सा पूरी तरह स्वदेशी बताया गया है। इसके निर्माण में भारतीय उद्योगों और MSMEs ने महत्वपूर्ण योगदान दिया है। इससे न केवल देश की रक्षा निर्माण क्षमता मजबूत होती है, बल्कि गहरे समुद्र से जुड़े महत्वपूर्ण अभियानों के लिए विदेशी तकनीक और उपकरणों पर निर्भरता भी कम करने में मदद मिलती है। यह आत्मनिर्भर भारत और स्वदेशी रक्षा उत्पादन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा सकता है।
समुद्र की गहराइयों पर रखेगा नजर
INS निपुण सिर्फ बचाव या मरम्मत तक सीमित नहीं रहेगा। यह समुद्र के भीतर निगरानी करने और महत्वपूर्ण डेटा जुटाने में भी सक्षम होगा। समुद्र की गहराई में मौजूद वस्तुओं, मलबे या अन्य गतिविधियों की जानकारी जुटाने में इसकी तकनीकी प्रणालियां मदद करेंगी। इससे नौसेना को समुद्र के अंदर होने वाली गतिविधियों को बेहतर तरीके से समझने और जरूरत के अनुसार अभियान की योजना बनाने में सहायता मिलेगी।
कुल मिलाकर, INS निपुण भारतीय नौसेना के लिए एक ऐसा विशेष पोत है जिसकी असली ताकत समुद्र की सतह पर नहीं, बल्कि उसके नीचे दिखाई देगी। पनडुब्बी बचाव से लेकर गहरे समुद्र में गोताखोरी, मरम्मत, निगरानी और मलबा हटाने तक, यह कई महत्वपूर्ण अभियानों में नौसेना की क्षमता बढ़ाएगा। इसके कमीशन होने के साथ भारत की अंडरवाटर रेस्क्यू और डीप-सी ऑपरेशनल क्षमताओं को नई मजबूती मिलने की उम्मीद है।