रुपया अब तक के सबसे निचले स्तर पर: पहली बार 95.27 के पार पहुंचा डॉलर; कच्चा तेल और ट्रंप के बयान ने बिगाड़ा खेल

रुपया अब तक के सबसे निचले स्तर पर: पहली बार 95.27 के पार पहुंचा डॉलर; कच्चा तेल और ट्रंप के बयान ने बिगाड़ा खेल

डॉलर के मुकाबले रुपया 95.27 के ऐतिहासिक निचले स्तर पर गिरा। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों, अमेरिका-ईरान तनाव और शेयर बाजार में भारी गिरावट ने रुपये की कमर तोड़ी।

कच्चे तेल की कीमतों में आग और मध्य पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच भारतीय रुपया अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है। गुरुवार को डॉलर के मुकाबले रुपये में ऐतिहासिक गिरावट दर्ज की गई, जिससे भारतीय अर्थव्यवस्था और आयात लागत को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं।

ऐतिहासिक गिरावट: डॉलर के मुकाबले 95.27 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर फिसला रुपया; जानें 4 मुख्य कारण

पहली बार 95 का स्तर पार

गुरुवार को विदेशी मुद्रा बाजार में भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 16 पैसे की गिरावट के साथ 95.01 पर खुला। हालांकि, बाजार में बढ़ती घबराहट के कारण यह और कमजोर होकर 95.27 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया। बुधवार को रुपया 94.85 पर बंद हुआ था। ‘फिनरेक्स ट्रेजरी एडवाइजर्स एलएलपी’ के कार्यकारी निदेशक अनिल कुमार भंसाली के अनुसार, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) की निरंतर निकासी रुपये पर भारी पड़ रही है।

रुपये की कमजोरी के पीछे 4 प्रमुख कारण:

1. कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल

वैश्विक बाजार में ब्रेंट क्रूड (Brent Crude) $125 प्रति बैरल के करीब पहुंच गया है, जो जून 2022 के बाद का उच्चतम स्तर है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान की नाकेबंदी हटाने के प्रस्ताव को खारिज करने के बाद तेल की कीमतों में 6% से अधिक की तेजी आई है। भारत अपनी तेल जरूरतों का 80% से अधिक आयात करता है, इसलिए महंगा तेल रुपये की वैल्यू को कम करता है।

2. डॉलर इंडेक्स में मजबूती

सुरक्षित निवेश (Safe-haven) की मांग बढ़ने के कारण वैश्विक स्तर पर अमेरिकी डॉलर मजबूत हो रहा है। डॉलर इंडेक्स 100 के मनोवैज्ञानिक स्तर के ऊपर बना हुआ है। जब वैश्विक स्तर पर डॉलर मजबूत होता है, तो रुपये जैसी उभरते बाजारों की मुद्राओं पर दबाव बढ़ जाता है।

3. भू-राजनीतिक अनिश्चितता (अमेरिका-ईरान तनाव)

पश्चिम एशिया (West Asia) में बढ़ते तनाव ने वैश्विक बाजारों में जोखिम की स्थिति पैदा कर दी है। ट्रंप प्रशासन द्वारा ईरानी बंदरगाहों की नौसैनिक नाकेबंदी जारी रखने और जब्त टैंकरों पर कार्रवाई के संकेतों ने निवेशकों को डरा दिया है। इस अनिश्चितता के कारण निवेशक उभरते बाजारों से अपना पैसा निकालकर सुरक्षित ठिकानों (जैसे डॉलर या सोना) में लगा रहे हैं।

4. शेयर बाजार में भारी गिरावट और FII की निकासी

घरेलू शेयर बाजार में गुरुवार को ‘ब्लैक थर्सडे’ जैसा माहौल रहा। सेंसेक्स (Sensex) लगभग 1,700 अंक और निफ्टी (Nifty) करीब 500 अंक टूट गया। विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) द्वारा भारतीय बाजार से लगातार पैसा निकालने (Net Selling) के कारण डॉलर की मांग बढ़ गई है, जिससे रुपया और कमजोर हुआ है।

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