सोमवार, 11 मई 2026 को भारतीय शेयर बाजार में हाहाकार मचा। ट्रंप द्वारा ईरान के प्रस्ताव को खारिज करने, कच्चे तेल की कीमतों में $105 की उछाल और पीएम मोदी की गोल्ड-फ्यूल अपील से सेंसेक्स 1000 अंक से ज्यादा गिरा।
भारतीय शेयर बाजारों में सोमवार, 11 मई 2026 को भारी गिरावट देखी गई। बेंचमार्क इंडेक्स Sensex में 1,000 से अधिक अंकों की गिरावट आई, जबकि Nifty 23,900 के स्तर से नीचे फिसल गया। बाजार में इस “ब्लैक मंडे” जैसी स्थिति के पीछे कई वैश्विक और घरेलू कारण जिम्मेदार हैं, जिन्होंने निवेशकों के बीच घबराहट पैदा कर दी है।
1. ईरान-अमेरिका तनाव और शांति प्रस्ताव की विफलता
बाजार में गिरावट का सबसे बड़ा तात्कालिक कारण भू-राजनीतिक अस्थिरता है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान द्वारा दिए गए शांति प्रस्ताव को ‘पूरी तरह से अस्वीकार्य’ (Totally Unacceptable) बताकर खारिज कर दिया है। यह संघर्ष अब अपने तीसरे महीने में प्रवेश कर गया है, और शांति वार्ता विफल होने से निवेशकों को डर है कि पश्चिम एशिया में यह युद्ध लंबा खिंच सकता है। इस खबर ने वैश्विक बाजारों में जोखिम वाली संपत्तियों (Risk Assets) से पैसा निकालने की होड़ मचा दी।
2. कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल ($105 के पार)
ईरान-अमेरिका वार्ता विफल होने के तुरंत बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आग लग गई। Brent crude 4% से अधिक उछलकर $105 प्रति बैरल के स्तर को पार कर गया।
- हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz): दुनिया के इस सबसे महत्वपूर्ण तेल शिपिंग रूट के बंद होने की आशंका ने तेल की आपूर्ति को लेकर गंभीर संकट पैदा कर दिया है।
- भारत पर प्रभाव: भारत अपनी तेल जरूरतों का 80-85% आयात करता है। तेल की कीमतों में वृद्धि का सीधा मतलब है बढ़ती महंगाई और राजकोषीय घाटा (Fiscal Deficit), जिससे भारतीय बाजार पर गहरा नकारात्मक दबाव पड़ा।
3. पीएम मोदी की ‘मितव्ययिता’ (Austerity) अपील का असर
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को राष्ट्र से एक भावुक अपील की, जिसमें उन्होंने नागरिकों से एक साल तक सोना न खरीदने, पेट्रोल-डीजल का कम उपयोग करने और अनावश्यक विदेशी यात्राओं से बचने का आग्रह किया।
- निवेशकों की चिंता: पीएम की इस अपील को बाजार ने एक ‘इमरजेंसी रिस्पॉन्स’ के रूप में लिया। इससे यह संकेत गया कि देश का विदेशी मुद्रा भंडार (Forex Reserve) और अर्थव्यवस्था दबाव में है।
- कंजम्पशन सेक्टर में गिरावट: इस अपील के बाद टाइटन जैसे लग्जरी और कंज्यूमर ड्यूरेबल शेयरों में 6% तक की गिरावट देखी गई, क्योंकि निवेशकों को डर है कि मांग (Demand) में भारी कमी आएगी।
4. भारतीय रुपया और विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव
कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के कारण डॉलर की मांग बढ़ी, जिससे भारतीय रुपया आज 95 प्रति डॉलर के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया। कमजोर रुपया विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FIIs) के लिए भारतीय बाजार को कम आकर्षक बनाता है, जिसके कारण वे लगातार बिकवाली कर रहे हैं। आरबीआई (RBI) के आंकड़ों के अनुसार, विदेशी मुद्रा भंडार में भी हाल के हफ्तों में $7 बिलियन से अधिक की कमी आई है।
5. भारत VIX (डर का सूचकांक) में 12% की उछाल
बाजार में अनिश्चितता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि India VIX (जो बाजार में उतार-चढ़ाव और डर को मापता है) आज लगभग 12% उछलकर 18.81 के स्तर पर पहुंच गया। जब VIX इतनी तेजी से बढ़ता है, तो यह दर्शाता है कि ट्रेडर्स भविष्य को लेकर बहुत डरे हुए हैं और बाजार में और भी बड़ी गिरावट की उम्मीद कर रहे हैं।