कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल: CEAT, स्पाइसजेट और इंडिगो के शेयर धड़ाम; $126 के पार पहुंचा ब्रेंट क्रूड

कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल: CEAT, स्पाइसजेट और इंडिगो के शेयर धड़ाम; $126 के पार पहुंचा ब्रेंट क्रूड

वैश्विक तेल कीमतों में $126 प्रति बैरल तक के उछाल के बाद भारतीय टायर और विमानन कंपनियों के शेयर गिर गए। मध्य पूर्व में अमेरिका-ईरान तनाव से सप्लाई बाधित होने का डर।

कच्चे तेल की कीमतों में आए अचानक उछाल के कारण गुरुवार को भारतीय शेयर बाजार में तेल के प्रति संवेदनशील (Crude-sensitive) कंपनियों के शेयरों में भारी गिरावट दर्ज की गई। वैश्विक बाजार में ब्रेंट क्रूड (Brent crude) के भाव थोड़े समय के लिए $126 प्रति बैरल के स्तर को पार कर गए, जिससे विमानन और टायर जैसे क्षेत्रों में इनपुट लागत बढ़ने और मार्जिन घटने की चिंता गहरा गई है

कच्चे तेल की कीमतों में आग: टायर और एविएशन शेयरों में भारी गिरावट, $126 के पार पहुंचा ब्रेंट क्रूड

बाजार में बिकवाली का दबाव

गुरुवार के कारोबार में टायर निर्माता कंपनी CEAT Limited और विमानन क्षेत्र की दिग्गज कंपनियों SpiceJet व InterGlobe Aviation (IndiGo) के शेयरों पर सबसे ज्यादा दबाव देखा गया। CEAT के शेयर लगभग 4.8% टूटकर ₹3,451 पर आ गए, जबकि इंडिगो और स्पाइसजेट के शेयरों में भी 5% तक की गिरावट दर्ज की गई। टायर कंपनियों के लिए सिंथेटिक रबर और कार्बन ब्लैक जैसी कच्ची सामग्रियां पेट्रोलियम से जुड़ी होती हैं, जबकि एयरलाइंस के लिए ‘एविएशन टर्बाइन फ्यूल’ (ATF) सबसे बड़ा खर्च है। कच्चे तेल में उछाल से इन कंपनियों के मुनाफे पर सीधा असर पड़ने की आशंका है।

कीमतों में उछाल की वजह: मध्य पूर्व में तनाव

ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स में 3.63% की वृद्धि देखी गई और यह $122.31 प्रति बैरल पर पहुंच गया। दिन के दौरान इसने $126.41 का उच्च स्तर छुआ, जो मार्च 2022 के बाद का सबसे उच्चतम स्तर है। कीमतों में इस तेजी का मुख्य कारण मध्य पूर्व में बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव है। विशेष रूप से अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते संघर्ष के कारण वैश्विक तेल आपूर्ति बाधित होने का डर बना हुआ है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान पर सैन्य कार्रवाई के संकेतों और ‘स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज’ (Strait of Hormuz) के बंद होने की आशंका ने बाजार में घबराहट पैदा कर दी है।

भारतीय अर्थव्यवस्था और रुपये पर असर

कच्चे तेल की कीमतों में इस बढ़ोतरी ने भारतीय रुपये और मुद्रास्फीति (Inflation) को लेकर भी चिंता बढ़ा दी है। भारत अपनी तेल जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा आयात करता है, ऐसे में महंगा तेल देश के व्यापार घाटे को बढ़ा सकता है और रुपये की स्थिति को कमजोर कर सकता है। विश्लेषकों का मानना है कि यदि कीमतें इसी तरह $120 के ऊपर बनी रहीं, तो आने वाले समय में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में भी बढ़ोतरी देखी जा सकती है।

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