रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने संसद में बताया कि रेलवे ने 12 साल में 5.56 लाख नौकरियां दी हैं। साथ ही TTE कार्यभार और वंदे भारत स्लीपर रिफंड के नए नियम जारी किए।
भारतीय रेलवे ने रोजगार, यात्री सुविधाओं और सेवाओं के प्रबंधन के मोर्चे पर पिछले एक दशक में कई बड़े सुधार किए हैं। केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बुधवार को संसद में जानकारी दी कि पिछले 12 सालों के दौरान भारतीय रेलवे ने 5 लाख से भी अधिक युवाओं को सरकारी नौकरियां प्रदान की हैं। इसके साथ ही उन्होंने लोकसभा और राज्यसभा में सांसदों द्वारा उठाए गए विभिन्न सवालों के जवाब में ट्रेन टीटीई (TTE) पर काम के बोझ को कम करने के लिए बनाए गए नियमों, वंदे भारत स्लीपर एक्सप्रेस और अमृत भारत एक्सप्रेस के नए टिकट कैंसिलेशन नियमों तथा रेलवे की भर्ती प्रक्रियाओं की पारदर्शिता पर खुलकर अपनी बात रखी।
पिछले 12 सालों में 5.56 लाख भर्तियां: रेल मंत्री का संसद में दावा
लोकसभा में भर्तियों के आंकड़े प्रस्तुत करते हुए रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि वर्ष 2014 से लेकर जून 2026 तक भारतीय रेलवे में कुल 5.56 लाख लोगों को रोजगार दिया गया है। ये भर्तियां रेलवे के विभिन्न जोनों और अलग-अलग तकनीकी व गैर-तकनीकी पदों पर की गई हैं।
- दक्षिण रेलवे का योगदान: अकेले दक्षिण रेलवे जोन में इस अवधि के दौरान 50,485 लोगों की नियुक्तियां हुई हैं।
- यूपीए कार्यकाल से तुलना: पूर्ववर्ती कांग्रेस नीत यूपीए सरकार (2004-05 से 2013-14) के 10 वर्षों के कार्यकाल से तुलना करते हुए रेल मंत्री ने कहा कि उस दौरान रेलवे में केवल 4.11 लाख लोगों को ही नौकरी मिली थी।
उन्होंने सदन को आश्वस्त किया कि रेलवे में भर्तियां जोनल जरूरतों और बदलती तकनीकों के अनुसार लगातार निकाली जाती हैं। परीक्षाएं बड़े पैमाने पर आयोजित होने के बावजूद पूरी प्रक्रिया पारदर्शी और तय दिशानिर्देशों के तहत पूरी की जाती है।
टीटीई पर काम का दबाव कम: अब 1 TTE को अधिकतम 5 एसी डिब्बे
नांदेड़ से कांग्रेस सांसद रवींद्र वसंतराव चव्हाण ने ट्रेनों में टीटीई (Ticket Checking Staff) की कमी और काम के अत्यधिक बोझ का मुद्दा उठाया था। विशेष रूप से दिल्ली सराय रोहिल्ला से उधमपुर के बीच चलने वाली ट्रेन संख्या 22401/22402 में अतिरिक्त कर्मचारियों की तैनाती को लेकर सवाल पूछा गया था।
- इसके जवाब में रेल मंत्री ने स्पष्ट किया कि नए प्रशासनिक दिशानिर्देशों के तहत टीटीई का कार्यभार तय कर दिया गया है:
- एसी कोच: अब 1 टीटीई को अधिकतम 5 एसी डिब्बों की जिम्मेदारी ही दी जाएगी।
- चेयर कार व स्लीपर: चेयर कार या स्लीपर क्लास के मामले में 1 टीटीई को केवल 3 डिब्बे आवंटित किए जाते हैं।
अश्विनी वैष्णव ने कहा कि किसी ट्रेन में कितने टीटीई तैनात होंगे, यह उस ट्रेन के कुल कोच और उनकी श्रेणियों पर निर्भर करता है। इस व्यवस्था से न केवल कर्मचारियों का सही इस्तेमाल हो पा रहा है, बल्कि यात्रियों की मदद और टिकट चेकिंग का काम भी बेहतर ढंग से संपन्न हो रहा है।
कैंसिल व वेटिंग टिकट से कमाई का जोनल रिकॉर्ड नहीं
राज्यसभा में एक अन्य लिखित प्रश्न के उत्तर में रेल मंत्री ने बताया कि भारतीय रेलवे कैंसिलेशन चार्ज या वेटिंग टिकटों से होने वाली आय का क्षेत्र-वार (Zone-wise) या अलग-अलग रिकॉर्ड नहीं रखता है। रेलवे के खाते में यह एकीकृत राजस्व का हिस्सा होता है।
इसके साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि प्रीमियम और आधुनिक ट्रेनों जैसे वंदे भारत स्लीपर एक्सप्रेस और अमृत भारत एक्सप्रेस के लिए टिकट कैंसिलेशन और रिफंड के नियम सामान्य ट्रेनों की तुलना में अलग और सख्त रखे गए हैं।
वंदे भारत स्लीपर और अमृत भारत एक्सप्रेस: टिकट रिफंड के नए नियम
रेल मंत्री ने राज्यसभा में वंदे भारत स्लीपर एक्सप्रेस और अमृत भारत एक्सप्रेस ट्रेनों के ‘कन्फर्म’ टिकटों को कैंसिल कराने पर लागू होने वाले रिफंड स्लैब की पूरी जानकारी दी:
केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने संसद में बताया कि भारतीय रेलवे ने 2014 से जून 2026 तक 5.56 लाख से अधिक लोगों को नौकरियां दी हैं, जबकि इससे पहले यूपीए सरकार के 10 वर्षों के कार्यकाल में 4.11 लाख लोगों की भर्ती हुई थी। अकेले दक्षिण रेलवे जोन में ही 50,485 लोगों को रोजगार मिला। रेल मंत्री ने कहा कि रेलवे में सभी भर्तियां पूरी पारदर्शिता और जोनल जरूरतों के अनुसार की जाती हैं।
इसके साथ ही, ट्रेनों में टीटीई (TTE) पर काम का बोझ कम करने के लिए नए नियम बनाए गए हैं, जिसके तहत अब एक टीटीई को अधिकतम 5 एसी डिब्बों या 3 स्लीपर/चेयर कार डिब्बों की ही जिम्मेदारी दी जाएगी। संसद में एक सवाल के जवाब में उन्होंने यह भी साफ किया कि रेलवे कैंसिल और वेटिंग टिकटों से होने वाली कमाई का जोनल स्तर पर अलग से रिकॉर्ड नहीं रखता है।
इसके अलावा, वंदे भारत स्लीपर और अमृत भारत एक्सप्रेस जैसी आधुनिक ट्रेनों के लिए टिकट कैंसिलेशन के नए और सख्त नियम लागू किए गए हैं। कन्फर्म टिकट ट्रेन छूटने से 72 घंटे पहले रद्द कराने पर 25% और 72 से 8 घंटे पहले कराने पर 50% किराया कटेगा, जबकि 8 घंटे से कम समय रहने पर टिकट रद्द कराने पर कोई रिफंड नहीं मिलेगा।