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शुक्रवार को शेयर बाजार में अस्थिरता रही। सेंसेक्स 75,238 और निफ्टी 23,643 पर बंद हुए। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और रुपये की कमजोरी ने निवेशकों को डराया।
शेयर बाजार क्लोजिंग अपडेट: निफ्टी और सेंसेक्स में गिरावट, शुरुआती बढ़त हुई गायब
सत्र के दौरान बाजार में काफी अस्थिरता देखी गई। सेंसेक्स लगभग 161 अंकों या 0.21% की गिरावट के साथ 75,238 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं, निफ्टी 50 भी 0.19% की गिरावट दर्ज करते हुए 23,650 के महत्वपूर्ण स्तर के नीचे 23,643 पर आ गया। सत्र के पहले हिस्से में बाजार ने अच्छी मजबूती दिखाई थी और बेंचमार्क इंडेक्स 23,839 के इंट्राडे हाई तक पहुंच गया था, लेकिन दूसरे छमाही में चौतरफा बिकवाली के कारण यह मोमेंटम पूरी तरह खो गया।
बाजार की गिरावट के प्रमुख कारण
निवेशकों की चिंता का मुख्य कारण कच्चे तेल की कीमतों में आई तेजी रही, जो भारत जैसी आयात-निर्भर अर्थव्यवस्था के लिए राजकोषीय दबाव बढ़ाती है। इसके अलावा निम्नलिखित कारकों ने बाजार पर दबाव डाला:
- रुपये में कमजोरी: अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये के गिरते स्तर ने विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की धारणा को कमजोर किया।
- मुद्रास्फीति का डर: बढ़ती महंगाई की आशंकाओं के चलते यह डर बना रहा कि ब्याज दरों में कटौती की संभावना कम हो सकती है।
- प्रॉफिट बुकिंग: इंट्राडे हाई पर पहुँचने के बाद, कई क्षेत्रों में मुनाफावसूली या प्रॉफिट बुकिंग देखी गई, विशेषकर उन क्षेत्रों में जो पिछले कुछ दिनों में तेजी से बढ़े थे।
सेक्टोरल प्रदर्शन और ‘ब्रॉड-बेस्ड’ बिकवाली
सत्र के दूसरे भाग में देखी गई बिकवाली काफी व्यापक (broad-based) थी, जिससे कई प्रमुख सेक्टोरल सूचकांकों में गिरावट आई। हालांकि सत्र की शुरुआत में कुछ मजबूती दिखी थी, लेकिन क्लोजिंग तक आते-आते बैंकिंग और कंज्यूमर गुड्स जैसे भारी वेटेज वाले शेयरों में गिरावट ने निफ्टी और सेंसेक्स को नीचे खींच लिया। विशेषज्ञों का मानना है कि वर्तमान बाजार की स्थिति काफी संवेदनशील है और कोई भी नकारात्मक वैश्विक खबर इसे और अधिक अस्थिर कर सकती है।
निवेशकों के लिए आगामी संकेत
अगले हफ्ते के लिए बाजार की दिशा काफी हद तक वैश्विक रुझानों और कच्चे तेल की कीमतों पर निर्भर करेगी। विशेषज्ञों के अनुसार:
- सपोर्ट लेवल: निफ्टी के लिए 23,600 का स्तर एक महत्वपूर्ण सपोर्ट के रूप में देखा जा रहा है।
- संस्थागत प्रवाह: बाजार की नजर इस बात पर होगी कि विदेशी संस्थागत निवेशक (FII) अपनी बिकवाली जारी रखते हैं या खरीदारी की ओर रुख करते हैं।
- तिमाही नतीजे: आने वाले दिनों में कंपनियों के वित्तीय नतीजे भी चुनिंदा शेयरों में हलचल पैदा करेंगे।