भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन को मंजूरी: जींद-सोनीपत रूट पर शुरू होगी देश की पहली ग्रीन रेल सेवा

भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन को मंजूरी: जींद-सोनीपत रूट पर शुरू होगी देश की पहली ग्रीन रेल सेवा

 

भारतीय रेलवे की बड़ी उपलब्धि! रेल मंत्रालय ने जींद-सोनीपत के बीच देश की पहली दैनिक हाइड्रोजन ट्रेन सेवा को दी मंजूरी। जानिए रूट, स्टॉपेज और इसके फायदे।

भारतीय रेल परिवहन के इतिहास में एक नया और स्वर्णिम अध्याय जुड़ने जा रहा है। रेल मंत्रालय ने देश की पहली दैनिक हाइड्रोजन-संचालित ट्रेन सेवा (India’s First Daily Hydrogen-Powered Train Service) की शुरुआत को आधिकारिक मंजूरी दे दी है। पर्यावरण संरक्षण और शून्य कार्बन उत्सर्जन (Zero Carbon Emission) की दिशा में इसे भारतीय रेलवे का अब तक का सबसे बड़ा और क्रांतिकारी कदम माना जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक, यह ऐतिहासिक ट्रेन सेवा हरियाणा के जींद और सोनीपत रेल खंड (Jind-Sonipat Section) के बीच शुरू की जाएगी। यह कदम न केवल भारतीय रेल को आधुनिक बनाएगा, बल्कि वैश्विक स्तर पर हरित ऊर्जा (Green Energy) के क्षेत्र में भारत की स्थिति को और मजबूत करेगा।

ट्रेन शेड्यूल और वाणिज्यिक स्टॉपेज की पूरी जानकारी

मंत्रालय से प्राप्त जानकारी के अनुसार, इस पहली हाइड्रोजन ट्रेन का संचालन ट्रेन नंबर 74010 और 74009 के रूप में किया जाएगा। यह ट्रेन दैनिक आधार पर चलेगी जिससे जींद और सोनीपत के बीच यात्रा करने वाले यात्रियों को एक आधुनिक और प्रदूषण मुक्त सफर का अनुभव मिलेगा। यात्रियों की सुविधा के लिए इस ट्रेन के वाणिज्यिक ठहराव (Commercial Stoppages) भी तय कर दिए गए हैं। यह ट्रेन अपने रूट पर जींद सिटी, पांडु पिंडारा, ललित खेड़ा, भंभेवा, ईशापुर खेड़ी, बुटाना, खंदराई, गोहाना, राभड़ा, लाठ, मोहाना (हरियाणा) और बरवासनी स्टेशनों पर रुकेगी। इन सभी ठहरावों से स्थानीय यात्रियों को इस अत्याधुनिक तकनीक का लाभ उठाने का मौका मिलेगा।

सफल ट्रायल रन और ट्रेन की तकनीकी क्षमताएं

इस सेवा को हरी झंडी देने से पहले भारतीय रेलवे ने सुरक्षा और तकनीकी मानकों को परखने के लिए व्यापक तैयारियां की थीं। इसके तहत जून महीने में दिल्ली और जींद के बीच इस हाइड्रोजन ट्रेन का एक महत्वपूर्ण ट्रायल रन (सफल परीक्षण) आयोजित किया गया था। इस परीक्षण के दौरान मुख्य रूप से ट्रेन के दो सबसे नाजुक मापदंडों—आपातकालीन ब्रेकिंग दूरी (Emergency Braking Distance) और ट्रेन के दोलन (Train Oscillation)—की गहनता से जांच की गई थी।

इससे पहले मई में, रेल मंत्रालय ने उत्तर रेलवे (Northern Railway) के तहत जींद-सोनीपत सेक्शन पर 10-कार वाले हाइड्रोजन फ्यूल सेल-आधारित ट्रेनसेट (10-car Hydrogen Fuel Cell-based trainset) को शुरू करने की मंजूरी दी थी। यह ट्रेनसेट पूरी तरह बनकर तैयार है और जल्द ही पटरियों पर दौड़ने लगेगा। तकनीकी मोर्चे पर, यह ट्रेन 75 किलोमीटर प्रति घंटे (75 kmph) की अधिकतम गति से चलेगी और इसमें ‘1200 किलोवाट (KW) का हाइड्रोजन फ्यूल सेल प्रोपल्शन सिस्टम’ लगाया गया है।

पर्यावरण के अनुकूल: शून्य प्रदूषण और हरित तकनीक

पारंपरिक डीजल इंजनों की तुलना में हाइड्रोजन फ्यूल सेल तकनीक बेहद साफ और पर्यावरण के अनुकूल है। रेल मंत्रालय के अनुसार, यह तकनीक हाइड्रोजन का उपयोग करके एक रासायनिक प्रतिक्रिया के माध्यम से बिजली उत्पन्न करती है। इस पूरी प्रक्रिया में उत्सर्जन (Emission) के रूप में केवल जल वाष्प (Water Vapour) यानी पानी की भाप ही निकलती है। इसमें से किसी भी प्रकार का हानिकारक धुआं या ग्रीनहाउस गैसें बाहर नहीं आतीं, जो इसे पारंपरिक जीवाश्म ईंधन (Fossil Fuel) आधारित प्रणालियों का एक बेहतरीन और स्वच्छ विकल्प बनाती हैं। इस पहल के साथ ही भारत अब जर्मनी, जापान, चीन और संयुक्त राज्य अमेरिका (USA) जैसे दुनिया के उन चुनिंदा देशों की लीग में शामिल हो गया है जो रेल परिवहन में हाइड्रोजन ऊर्जा का उपयोग कर रहे हैं।

जींद में स्वदेशी रिफ्यूलिंग प्लांट और सुरक्षा के कड़े इंतजाम

ट्रेन के सुचारू संचालन के लिए हरियाणा के जींद में एक स्वदेशी हाइड्रोजन स्टोरेज और रिफ्यूलिंग सुविधा (Refuelling Facility) स्थापित की गई है। इस प्लांट को शुरू करने के लिए पेट्रोलियम और विस्फोटक सुरक्षा संगठन (PESO) से कंप्रेस्ड हाइड्रोजन गैस के भंडारण और वितरण के लिए आवश्यक लाइसेंस भी मिल गया है। रिफ्यूलिंग संचालन को बिना किसी बाधा के चलाने के लिए प्लांट में एक उन्नत हाइड्रोजन कंप्रेशन सिस्टम स्थापित किया गया है। इसके अलावा, किसी भी तकनीकी खराबी से निपटने और निरंतरता बनाए रखने के लिए एक स्टैंडबाय कंप्रेसर यूनिट की व्यवस्था भी की जा रही है।

सुरक्षा के मोर्चे पर भारतीय रेलवे ने कोई समझौता नहीं किया है। हाइड्रोजन उत्पादन, भंडारण और वितरण सुविधा स्थल पर बेहद संवेदनशील ‘हाइड्रोजन लीक डिटेक्टर’ और ‘फ्लेम डिटेक्टर’ (Safety Sensors) लगाए गए हैं, जिनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए नियमित रूप से जांच और सफाई की जाएगी। इसके साथ ही, अनुसंधान डिजाइन और मानक संगठन (RDSO) द्वारा अनुमोदित संचालन और रखरखाव नियमावली (O&M Manuals) तैयार की गई है, और शकूरबस्ती स्थित रखरखाव डिपो के लिए मानक संचालन प्रक्रियाएं (SOPs) और सुरक्षा ऑडिट के कड़े प्रावधान लागू किए गए हैं।

 

 

 

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