India-EU FTA: साल के अंत तक लागू हो सकता है भारत-ईयू फ्री ट्रेड एग्रीमेंट, पोलैंड के राजदूत ने जताई उम्मीद

India-EU FTA: साल के अंत तक लागू हो सकता है भारत-ईयू फ्री ट्रेड एग्रीमेंट, पोलैंड के राजदूत ने जताई उम्मीद

 

India-EU FTA: पोलैंड के राजदूत ने उम्मीद जताई कि भारत-ईयू फ्री ट्रेड एग्रीमेंट 2026 के अंत तक लागू हो सकता है। जानें समझौते से जुड़ी अहम बातें।

भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते (FTA) को लेकर उम्मीदें बढ़ गई हैं। भारत में पोलैंड के राजदूत पियोत्र एंटोनी स्विताल्स्की ने गुरुवार को कहा कि भारत-ईयू FTA इस साल के अंत तक तैयार होकर लागू हो सकता है। उन्होंने कहा कि समझौते को अंतिम रूप देने में अब देरी की कोई वजह नजर नहीं आती। नई दिल्ली में भारत-ईयू FTA पर आयोजित एक कार्यक्रम में बोलते हुए स्विताल्स्की ने कहा कि वह यूरोपीय संघ के अधिकारी रह चुके हैं और उन्हें इस तरह के समझौतों की औपचारिक प्रक्रिया में लगने वाले समय की अच्छी जानकारी है। उन्होंने कहा कि उन्होंने पहले भी भारत में इस समझौते के लिए फास्ट ट्रैक प्रक्रिया अपनाने की बात कही थी।

साल के अंत तक समझौता लागू होने की उम्मीद

पोलैंड के राजदूत ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि भारत और यूरोपीय संघ के बीच व्यापार समझौता इस साल के अंत तक तैयार हो जाएगा और इसके बाद यह प्रभावी भी हो जाएगा। उन्होंने कहा कि समझौते को अंतिम रूप देने की दिशा में कोई बड़ी रुकावट दिखाई नहीं दे रही है। स्विताल्स्की के मुताबिक, भारत और यूरोपीय संघ के बीच व्यापार संबंध पहले से ही मजबूत हैं और FTA दोनों पक्षों के आर्थिक रिश्तों को नई गति दे सकता है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि व्यापार समझौते के साथ निवेश संरक्षण समझौता भी महत्वपूर्ण होगा।

निवेश संरक्षण समझौता भी जरूरी

राजदूत ने कहा कि भारत-ईयू FTA को निवेश संरक्षण समझौते के साथ जोड़ा जाना चाहिए। उनके अनुसार, निवेश संरक्षण दोनों पक्षों के व्यापक आर्थिक संबंधों का अहम हिस्सा है। उन्होंने कहा कि भारत और यूरोपीय संघ के बीच कारोबार और निवेश लगातार बढ़ रहा है, ऐसे में निवेशकों के हितों की सुरक्षा के लिए स्पष्ट व्यवस्था जरूरी है। स्विताल्स्की ने कहा कि वह मौजूदा स्थिति को लेकर आशावादी हैं और उन्हें फिलहाल किसी तरह की देरी का कारण नजर नहीं आता।

समझौते की औपचारिक प्रक्रिया अंतिम चरण में

भारत-ईयू FTA को लेकर सरकारी स्तर पर भी औपचारिक प्रक्रियाएं आगे बढ़ रही हैं। सरकारी सूत्रों के अनुसार, समझौते की कानूनी जांच यानी लीगल स्क्रबिंग पूरी हो चुकी है। अब यूरोपीय संघ की ओर से आंतरिक मंजूरी और विभिन्न भाषाओं में समझौते के अनुवाद की प्रक्रिया चल रही है। इसके बाद समझौते पर हस्ताक्षर और उसे लागू करने से जुड़ी बाकी औपचारिकताएं पूरी की जाएंगी। भारत और यूरोपीय संघ दोनों ही 2026 के अंत तक समझौते पर हस्ताक्षर से जुड़ी शेष प्रक्रियाओं को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

जनवरी में हुई थी बड़ी घोषणा

भारत-ईयू FTA को लेकर बड़ी घोषणा 27 जनवरी 2026 को हुई थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने नई दिल्ली में आयोजित 16वें भारत-ईयू शिखर सम्मेलन के दौरान इस समझौते की घोषणा की थी। यह घोषणा दोनों पक्षों के बीच लंबे समय से चल रही व्यापार वार्ता के बाद हुई। भारत और यूरोपीय संघ ने व्यापक और संतुलित व्यापार साझेदारी स्थापित करने के उद्देश्य से वर्ष 2022 में बातचीत फिर शुरू की थी।

भारत और यूरोपीय संघ के बीच FTA की बातचीत का इतिहास काफी लंबा रहा है। दोनों पक्षों के बीच कई दौर की चर्चा के बावजूद पहले यह प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी थी। हालांकि, बदलते वैश्विक आर्थिक माहौल और दोनों क्षेत्रों के बीच बढ़ते व्यापार को देखते हुए वार्ता को दोबारा गति दी गई। अब समझौते को अंतिम रूप देने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति होने का दावा किया जा रहा है।

भारत और यूरोपीय संघ के बीच मजबूत व्यापारिक रिश्ते

प्रस्तावित FTA भारत और यूरोपीय संघ के बीच व्यापारिक संबंधों के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यूरोपीय संघ भारत के प्रमुख व्यापारिक साझेदारों में शामिल है। समझौता लागू होने के बाद दोनों पक्षों के बीच वस्तुओं और सेवाओं के व्यापार में और तेजी आने की उम्मीद है। इससे भारतीय कारोबारियों और निर्यातकों को यूरोपीय बाजार में बेहतर पहुंच मिल सकती है, जबकि यूरोपीय कंपनियों के लिए भारतीय बाजार में कारोबार और निवेश के नए अवसर पैदा हो सकते हैं।

आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2024-25 में भारत और यूरोपीय संघ के बीच वस्तुओं का द्विपक्षीय व्यापार 136.54 अरब अमेरिकी डॉलर रहा। इस दौरान भारत का यूरोपीय संघ को निर्यात 75.85 अरब डॉलर और यूरोपीय संघ से भारत का आयात 60.68 अरब डॉलर रहा। ये आंकड़े दोनों क्षेत्रों के बीच मजबूत आर्थिक संबंधों को दर्शाते हैं।

FTA से बढ़ सकती हैं व्यापार और निवेश की संभावनाएं

भारत-ईयू FTA का उद्देश्य व्यापार में आने वाली बाधाओं को कम करना, बाजार तक पहुंच आसान बनाना और दोनों पक्षों के बीच आर्थिक सहयोग को बढ़ावा देना है। समझौते से भारतीय निर्यातकों को यूरोपीय बाजार में प्रतिस्पर्धात्मक लाभ मिलने की उम्मीद है। वहीं, यूरोपीय कंपनियों को भारत जैसे तेजी से बढ़ते बाजार में विस्तार के अधिक अवसर मिल सकते हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार, यदि समझौता तय समयसीमा के भीतर लागू होता है तो यह भारत की वैश्विक व्यापार रणनीति के लिए भी महत्वपूर्ण उपलब्धि होगी। ऐसे समय में जब दुनिया की अर्थव्यवस्था में आपूर्ति श्रृंखला, बाजार पहुंच और निवेश को लेकर बदलाव हो रहे हैं, भारत और यूरोपीय संघ के बीच मजबूत व्यापार साझेदारी दोनों पक्षों के लिए फायदेमंद हो सकती है।

फिलहाल भारत-ईयू FTA की प्रक्रिया अंतिम औपचारिकताओं की ओर बढ़ रही है। पोलैंड के राजदूत पियोत्र एंटोनी स्विताल्स्की के बयान से यह संकेत मिलता है कि यूरोपीय पक्ष भी समझौते को जल्द पूरा करने को लेकर सकारात्मक है। यदि शेष मंजूरियां और प्रक्रियाएं तय समय पर पूरी होती हैं, तो भारत और यूरोपीय संघ के बीच यह ऐतिहासिक व्यापार समझौता 2026 के अंत तक लागू होने की दिशा में आगे बढ़ सकता है।

 

 

 

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