विदेश मंत्रालय ने पुष्टि की कि नई दिल्ली में चल रहे BSF-BGB के 57वें महानिदेशक स्तरीय सम्मेलन में सीमा सुरक्षा, घुसपैठ और आपसी सहयोग पर चर्चा की जा रही है।
भारत और बांग्लादेश के बीच 4,096 किलोमीटर लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा दुनिया की सबसे संवेदनशील सीमाओं में से एक है। इस सीमा पर शांति, सुरक्षा और सहयोग सुनिश्चित करने के लिए दोनों देशों ने दशकों से स्थापित द्विपक्षीय तंत्रों का सहारा लिया है। हाल ही में, विदेश मंत्रालय (MEA) के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने स्पष्ट किया है कि भारत-बांग्लादेश सीमा से जुड़े सभी संवेदनशील मामले, जिनमें कथित सीमा पार ‘पुशबैक’ (वापसी) के मुद्दे भी शामिल हैं, पूरी तरह से स्थापित द्विपक्षीय तंत्रों के माध्यम से सुलझाए जा रहे हैं। वर्तमान में नई दिल्ली में चल रही सीमा सुरक्षा बल (BSF) और बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश (BGB) के बीच 57वीं महानिदेशक (DG) स्तरीय समन्वय बैठक इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
द्विपक्षीय वार्ता का मंच और उद्देश्य
रणधीर जायसवाल ने साप्ताहिक मीडिया ब्रीफिंग के दौरान जोर देकर कहा कि महानिदेशक स्तर की यह वार्ता सीमा प्रबंधन से संबंधित परिचालन संबंधी चिंताओं को साझा करने और उनका समाधान खोजने के लिए सबसे उपयुक्त मंच है। यह चार दिवसीय सम्मेलन, जो 8 जून से शुरू होकर 11 जून तक नई दिल्ली में आयोजित किया जा रहा है, दोनों देशों के सुरक्षा बलों को सीधे संवाद करने का अवसर प्रदान करता है। इस सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य न केवल सुरक्षा चुनौतियों का समाधान करना है, बल्कि सीमा पर विश्वास बहाली के उपायों (Confidence Building Measures – CBMs) को मजबूत करना भी है।
इस महत्वपूर्ण बैठक में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व BSF के महानिदेशक प्रवीण कुमार कर रहे हैं, जबकि बांग्लादेशी पक्ष का नेतृत्व BGB के महानिदेशक मेजर जनरल मोहम्मद अशरफउज्जमान सिद्दीकी कर रहे हैं। दोनों पक्षों के वरिष्ठ अधिकारी इस वार्ता में उन समस्याओं पर गहराई से विचार कर रहे हैं जो अक्सर सीमावर्ती क्षेत्रों में तनाव का कारण बनती हैं।
चर्चा के मुख्य बिंदु
इस सम्मेलन में जिन प्रमुख मुद्दों पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है, वे भारत और बांग्लादेश दोनों की सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। इनमें शामिल हैं:
- सीमा सुरक्षा और अतिक्रमण: बाड़ में सेंध (fence breaches) की घटनाओं को रोकना और सीमावर्ती बुनियादी ढांचे के विकास में तेजी लाना।
- अपराध और घुसपैठ: सीमा पार से होने वाले अपराधों, नशीली दवाओं की तस्करी, और अवैध घुसपैठ पर प्रभावी अंकुश लगाना।
- सुरक्षा बलों और नागरिकों की सुरक्षा: BSF कर्मियों और सीमा के पास रहने वाले नागरिकों पर होने वाले हमलों को रोकने के लिए ठोस रणनीतियां बनाना।
- विद्रोही समूहों के खिलाफ कार्रवाई: दोनों देशों की सीमाओं के आसपास सक्रिय विद्रोही समूहों (insurgent groups) के खिलाफ समन्वित कार्रवाई करना, ताकि किसी भी देश की सुरक्षा को खतरा न हो।
ये मुद्दे केवल सुरक्षा तक सीमित नहीं हैं, बल्कि ये सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के जीवन और सुरक्षा से भी सीधे जुड़े हैं। दोनों देशों का साझा लक्ष्य एक ‘अपराध-मुक्त सीमा’ सुनिश्चित करना है, जो आपसी सहयोग और भरोसे पर टिकी हो।
ऐतिहासिक संदर्भ और संस्थागत तंत्र
भारत और बांग्लादेश के बीच सीमा प्रबंधन के लिए महानिदेशक स्तरीय ये बैठकें अचानक शुरू नहीं हुई हैं, बल्कि इनका एक लंबा इतिहास है। इन बैठकों की शुरुआत 1975 में हुई थी, जिसे बाद में 1993 में एक औपचारिक द्विवार्षिक तंत्र के रूप में बदल दिया गया। पिछले पांच दशकों से अधिक समय से चला आ रहा यह संस्थागत तंत्र यह दर्शाता है कि दोनों देश अपने मतभेदों को सुलझाने के लिए कूटनीतिक और सुरक्षा आधारित संवाद में कितना विश्वास रखते हैं।
यह तंत्र समय-समय पर उत्पन्न होने वाली चुनौतियों के बावजूद कारगर साबित हुआ है। भले ही सीमा पर कभी-कभी तनावपूर्ण स्थितियां उत्पन्न हों, लेकिन BSF और BGB के बीच नियमित संवाद यह सुनिश्चित करता है कि छोटी-मोटी घटनाएं बड़े विवाद का रूप न लें। प्रवक्ता ने यह भी कहा कि दोनों पक्ष सक्रिय रूप से सीमा-संबंधी चुनौतियों पर चर्चा कर रहे हैं और उम्मीद है कि इस सम्मेलन के समापन के बाद प्रगति का एक स्पष्ट अपडेट सामने आएगा।