हिमाचल प्रदेश निकाय चुनाव परिणामों में भाजपा ने मंडी, सोलन और धर्मशाला नगर निगम में बड़ी जीत दर्ज की। कांग्रेस केवल पालमपुर बचाने में सफल रही।
हिमाचल प्रदेश के चार प्रमुख नगर निगमों के चुनाव परिणामों ने राज्य की राजनीतिक फिजा में हलचल पैदा कर दी है। रविवार को घोषित नतीजों में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने शानदार प्रदर्शन करते हुए चार में से तीन नगर निगमों—मंडी, धर्मशाला और सोलन—पर कब्जा जमा लिया है। सत्तारूढ़ कांग्रेस पार्टी के लिए यह एक बड़ा झटका है, जो केवल पालमपुर नगर निगम को ही अपने पास बचाने में सफल रही। इन चुनावों को 2027 के आगामी विधानसभा चुनावों के लिए एक सेमीफाइनल के रूप में देखा जा रहा है।
चुनावी नतीजों का गणित: भाजपा को स्पष्ट बहुमत
कुल 63 सीटों पर हुए मतदान में भाजपा ने अपना दबदबा साबित किया है। आंकड़ों के अनुसार, भाजपा ने 37 सीटों पर जीत दर्ज की, जबकि कांग्रेस 23 सीटों पर सिमट गई। शेष तीन सीटों पर निर्दलीय उम्मीदवारों ने बाजी मारी।
- मंडी: भाजपा ने 14 में से 12 वार्डों में धमाकेदार जीत दर्ज की। कांग्रेस के खाते में केवल एक सीट आई, जबकि एक सीट पर निर्दलीय प्रत्याशी विजयी रहा।
- सोलन: यहां कांटे की टक्कर थी, लेकिन भाजपा 17 में से 10 सीट जीतकर बहुमत हासिल करने में सफल रही। कांग्रेस छह सीट के साथ दूसरे स्थान पर रही और एक सीट निर्दलीय के पास गई।
- धर्मशाला: भाजपा ने 17 में से 11 वार्ड जीतकर स्पष्ट बहुमत प्राप्त किया। कांग्रेस पांच सीटों पर विजयी रही और एक सीट निर्दलीय को मिली।
- पालमपुर: कांग्रेस के लिए एकमात्र राहत की खबर पालमपुर से रही। कांग्रेस ने 15 में से 11 वार्ड जीतकर नगर निगम पर अपना नियंत्रण बरकरार रखा, जबकि भाजपा को चार सीटों से संतोष करना पड़ा।
भाजपा का दावा: यह सरकार के खिलाफ जनमत संग्रह
भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. राजीव बिंदल ने इन परिणामों को मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार के खिलाफ जनता का ‘जनमत संग्रह’ करार दिया है। उन्होंने कहा कि इन नतीजों ने स्पष्ट कर दिया है कि जनता कांग्रेस की “जनविरोधी नीतियों” से तंग आ चुकी है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा पर अपना भरोसा जता रही है। पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने भी इसे कांग्रेस सरकार की विफलता का प्रतीक बताया है।
कांग्रेस की प्रतिक्रिया: स्थानीय कारकों पर होगा मंथन
दूसरी ओर, कांग्रेस ने इन परिणामों को बहुत अधिक महत्व न देने की कोशिश की है। मुख्यमंत्री के प्रधान मीडिया सलाहकार नरेश चौहान ने कहा कि केवल चार नगर निगमों के 15 प्रतिशत मतदाताओं के आधार पर पूरे राज्य का मिजाज नहीं मापा जा सकता। उन्होंने कहा कि पार्टी इन नतीजों का सूक्ष्म विश्लेषण करेगी, जिसमें उम्मीदवार चयन प्रक्रिया और स्थानीय मुद्दों जैसे कारकों की समीक्षा की जाएगी। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने भी यह संकेत दिया कि पार्टी अपनी कमजोरियों की पहचान करेगी और सुधार के कदम उठाएगी।
आगामी विधानसभा चुनावों के लिए संकेत
ये चुनाव इसलिए भी महत्वपूर्ण हैं क्योंकि हिमाचल प्रदेश में 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं। राज्य के 1.31 लाख से अधिक मतदाताओं में से लगभग 63 प्रतिशत से अधिक ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। पालमपुर में सबसे अधिक 68.97 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। इन चुनावों में भाजपा की जीत न केवल पार्टी का मनोबल बढ़ाने वाली है, बल्कि यह राज्य के राजनीतिक समीकरणों में बदलाव का संकेत भी देती है। आगामी समय में इन परिणामों के आधार पर दोनों प्रमुख दल अपनी रणनीति में बड़े बदलाव कर सकते हैं।