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हरियाणा की ACS डॉ. सुमिता मिश्रा के अनुसार, 100 दिवसीय ‘टीबी मुक्त भारत अभियान’ के तहत AI तकनीक से 25,666 नए टीबी मरीजों की पहचान कर इलाज शुरू किया गया।
हरियाणा ने देश को तपेदिक (टीबी) जैसी गंभीर बीमारी से पूरी तरह मुक्त करने के संकल्प को पूरा करने की दिशा में एक और बड़ी और ऐतिहासिक सफलता हासिल की है। केंद्र सरकार के सहयोग से चलाए जा रहे राष्ट्रव्यापी ‘100 दिवसीय टीबी मुक्त भारत अभियान (फेज-II)’ के तहत हरियाणा स्वास्थ्य विभाग ने जमीनी स्तर पर बड़े पैमाने पर एक्टिव स्क्रीनिंग (सक्रिय जांच) अभियान चलाया है। इस अभियान की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि इसमें आधुनिक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तकनीक का भरपूर उपयोग किया गया, जिसकी मदद से राज्य में 25,666 नए टीबी मरीजों की पहचान कर समय रहते उनका इलाज शुरू कर दिया गया है।
पारंपरिक ढर्रे से हटकर ‘एक्टिव केस फाइंडिंग’ पर रहा जोर: डॉ. सुमिता मिश्रा
हरियाणा के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव (ACS) डॉ. सुमिता मिश्रा ने राज्य की इस उपलब्धि पर विस्तृत जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि यह अभियान स्वास्थ्य विभाग की कार्यशैली में एक बड़े तकनीकी और रणनीतिक बदलाव को दर्शाता है।
डॉ. सुमिता मिश्रा ने कहा:
हरियाणा ने टीबी के खिलाफ अपनी लड़ाई में महत्वपूर्ण प्रगति हासिल की है। राज्य ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा समर्थित बड़े पैमाने पर सक्रिय स्क्रीनिंग के माध्यम से चल रहे 100-दिवसीय टीबी मुक्त भारत अभियान (चरण-II) के दौरान टीबी के 25,666 नए मरीजों का पता लगाया है।
“टीबी…
— DPR Haryana (@DiprHaryana) July 15, 2026
“आमतौर पर स्वास्थ्य सेवाओं का पारंपरिक तरीका यह होता है कि मरीज बीमारी के लक्षण दिखने पर खुद अस्पताल आता है। लेकिन इस विशेष अभियान के तहत हमने इस ढर्रे को बदल दिया। हमारी स्वास्थ्य टीमों ने ‘एक्टिव केस फाइंडिंग’ (सक्रिय केस खोज) रणनीति अपनाई और खुद उन संवेदनशील व उच्च जोखिम वाले समुदायों तक पहुँची, जहां टीबी फैलने का खतरा सबसे ज्यादा था। इसमें ऐसे लोग भी शामिल थे, जिनमें टीबी के शुरुआती लक्षण साफ तौर पर दिखाई नहीं दे रहे थे।”
AI-इनेबल्ड एक्स-रे और ‘कफ अगेंस्ट टीबी’ ऐप का हुआ इस्तेमाल
अंतिरिक्त मुख्य सचिव ने बताया कि इस अभियान में सटीकता और तेजी लाने के लिए अत्याधुनिक तकनीकों का सहारा लिया गया। स्वास्थ्य विभाग ने राज्य के सुदूर और ग्रामीण इलाकों में AI-इनेबल्ड हैंडहेल्ड एक्स-रे मशीनों को तैनात किया, जो ऑन-द-स्पॉट फेफड़ों की डिजिटल जांच कर रिपोर्ट दे देती हैं। इसके साथ ही स्मार्टफोन आधारित ‘कफ अगेंस्ट टीबी’ (CATB) मोबाइल एप्लिकेशन का उपयोग किया गया, जो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के माध्यम से व्यक्ति की खांसने की आवाज का विश्लेषण कर यह बता देता है कि उसे आगे के मेडिकल टेस्ट की जरूरत है या नहीं।
‘आयुष्मान आरोग्य शिविरों’ के साथ टीबी स्क्रीनिंग का एकीकरण
हरियाणा सरकार ने इस अभियान को और अधिक व्यापक बनाने के लिए इसे आम जनता की रोजमर्रा की स्वास्थ्य जांच से जोड़ दिया है।
डॉ. सुमिता मिश्रा ने आगे जानकारी देते हुए कहा:
“हमने टीबी की इस विशेष स्क्रीनिंग को राज्यभर में आयोजित होने वाले ‘आयुष्मान आरोग्य शिविरों’ (Ayushman Arogya Camps) के साथ पूरी तरह एकीकृत (Integrate) कर दिया है। इसका सबसे बड़ा फायदा यह हुआ है कि अब नागरिकों को अलग-अलग जांचों के लिए भटकना नहीं पड़ता। उन्हें एक ही छत के नीचे, एक ही प्लेटफॉर्म पर टीबी की जांच के साथ-साथ हाई ब्लड प्रेशर (उच्च रक्तचाप), डायबिटीज (मधुमेह), एनीमिया (खून की कमी) और अन्य सामान्य व गंभीर स्वास्थ्य स्थितियों की व्यापक हेल्थ चेक-अप की सुविधा मिल रही है।”
इस समेकित स्वास्थ्य मॉडल के कारण न सिर्फ टीबी के मामलों को शुरुआती दौर में ही पकड़ने में मदद मिली है, बल्कि मरीजों को पौष्टिक आहार सहायता प्रदान करने के लिए ‘निक्षय पोषण किट’ का वितरण भी सुचारू रूप से किया जा रहा है। डॉ. मिश्रा ने दोहराया कि राज्य सरकार का अंतिम लक्ष्य हरियाणा के हर एक नागरिक को एक स्वस्थ और टीबी-मुक्त वातावरण प्रदान करना है, और यह तकनीकी अभियान उसी दिशा में उठाया गया एक क्रांतिकारी कदम है। इस पूरी व्यवस्था को बिना किसी व्यवधान के धरातल पर उतारा जा रहा है।