हरियाणा सरकार पशुओं के इलाज के लिए मोबाइल वैन सेवा शुरू करेगी। टोल-फ्री नंबर 1962 पर कॉल करने के 30 मिनट के अंदर डॉक्टर पहुंचेंगे घर।
हरियाणा के पशुपालकों के लिए एक बड़ी खुशखबरी है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने राज्य में पशुपालन को बढ़ावा देने और बीमार पशुओं को समय पर उपचार प्रदान करने के लिए एक नई पहल की घोषणा की है। जल्द ही राज्य में मोबाइल वैन सेवा शुरू की जाएगी, जो पशु चिकित्सा विशेषज्ञों और सहायकों के साथ लैस होगी और पशुपालकों को उनके घर पर ही पशु चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराएगी।
टोल-फ्री नंबर 1962: अब कॉल करते ही घर पहुंचेंगे डॉक्टर
पशु चिकित्सा विशेषज्ञों और सहायकों से लैस मोबाइल वैन जल्द ही टोल-फ्री नंबर 1962 के माध्यम से हर दिन सुबह 6 से रात 10 बजे के बीच पशुपालकों को उनके घर पर ही पशु चिकित्सा सेवाएं प्रदान करेंगी।
कॉल मिलने पर मोबाइल पशु चिकित्सा इकाई 30 मिनट के भीतर लाभार्थी के घर पहुंचेगी, जिससे… pic.twitter.com/qILopVTrVb
— DPR Haryana (@DiprHaryana) May 24, 2026
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने जानकारी दी कि पशुपालक अब टोल-फ्री नंबर 1962 पर कॉल करके इस सेवा का लाभ उठा सकेंगे। यह सेवा प्रतिदिन सुबह 6 बजे से रात 10 बजे तक उपलब्ध रहेगी। सीएम ने बताया कि जैसे ही विभाग को कॉल प्राप्त होगा, मोबाइल पशु चिकित्सा इकाई (Mobile Veterinary Unit) 30 मिनट के भीतर लाभार्थी के घर पहुंच जाएगी। इससे न केवल पशुओं को समय पर इलाज मिल सकेगा, बल्कि आपातकालीन स्थिति में उनकी जान बचाना भी आसान हो जाएगा।
24 घंटे की सेवा का लक्ष्य
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि इस सुविधा को धीरे-धीरे 24 घंटे की सेवा में तब्दील किया जाए, ताकि राज्य भर में पशुओं को किसी भी समय चिकित्सा देखभाल मिल सके। यह निर्णय कृषि, बागवानी, मत्स्य पालन और पशुपालन विभाग की एक उच्च-स्तरीय समीक्षा बैठक के दौरान लिया गया, जिसमें राज्य के ‘विज़न 2047’ के तहत पशुपालन क्षेत्र को आधुनिक बनाने की कार्ययोजना पर चर्चा की गई।
पशुपालन विभाग की इस लंबी अवधि की रणनीति का उद्देश्य पशुधन उत्पादकता में सुधार करना, बीमारी नियंत्रण तंत्र को मजबूत करना और पशु चिकित्सा स्वास्थ्य सेवाओं का आधुनिकीकरण करना है। इस योजना के तहत राज्य भर में पशु चिकित्सा प्रयोगशालाओं को मजबूत करने और आधुनिक नैदानिक बुनियादी ढांचे के विकास पर विशेष जोर दिया जाएगा। मुख्यमंत्री की यह पहल न केवल पशुपालकों की आय में वृद्धि करेगी, बल्कि पशु स्वास्थ्य के क्षेत्र में हरियाणा को एक अग्रणी राज्य के रूप में स्थापित करेगी।