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पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि ताइवान से पिछड़ने के बाद अर्थव्यवस्था बदहाल है और मोदी सरकार तथ्यों को छिपा रही है।
पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने केंद्र की भाजपा सरकार पर आर्थिक कुप्रबंधन का गंभीर आरोप लगाते हुए तीखा हमला बोला है। हाल ही में आई रिपोर्ट्स के अनुसार, ताइवान की मार्केट कैपिटलाइजेशन (बाजार पूंजीकरण) के भारत से आगे निकल जाने पर चिंता जताते हुए चीमा ने कहा कि केंद्र सरकार आर्थिक मंदी, बढ़ते कर्ज, महंगाई और गिरते निवेशक भरोसे जैसे कड़े सवालों का जवाब देने के बजाय तथ्यों को छिपाने और देश को गुमराह करने में व्यस्त है।
आर्थिक मंदी और गिरती रैंकिंग पर सवाल
Taiwan’s market capitalisation has now crossed that of India. A country of barely 2.5 crore people has overtaken a nation of 130 crore people. India, once the world’s 4th largest economy by GDP size, has now slipped to 6th position.
But instead of answering tough questions on…
— Adv Harpal Singh Cheema (@HarpalCheemaMLA) May 26, 2026
हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि एक तरफ सरकार वैश्विक मंचों पर भारत के ‘अमृत काल’ का बखान कर रही है, वहीं दूसरी ओर आर्थिक आंकड़े जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रहे हैं। उन्होंने याद दिलाया कि कभी दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था रहने वाला भारत अब फिसलकर छठे स्थान पर पहुंच गया है। चीमा के अनुसार, यह गिरावट सरकार की विफल नीतियों का प्रत्यक्ष परिणाम है, जिसका खामियाजा देश का आम नागरिक अपनी कमरतोड़ महंगाई के रूप में भुगत रहा है।
आरबीआई का खजाना और वित्तीय जोखिम
पंजाब के वित्त मंत्री ने आरबीआई (भारतीय रिजर्व बैंक) से सरकार द्वारा लगातार लिए जा रहे लाभांश (Dividend) पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि मोदी सरकार आरबीआई को अपनी ‘निजी तिजोरी’ की तरह इस्तेमाल कर रही है ताकि राजकोषीय घाटे को पाटा जा सके। चीमा ने कहा कि वर्ष 2014 के बाद से केंद्र ने आरबीआई से 14 लाख करोड़ रुपये से अधिक निकाले हैं, जिसमें से आधे से ज्यादा राशि पिछले तीन वर्षों में ली गई है। उन्होंने चेतावनी दी कि इस तरह की वित्तीय खींचतान देश की दीर्घकालिक आर्थिक मजबूती को कमजोर कर रही है।
महंगाई से पिसती जनता
पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस की कीमतों में हो रही लगातार बढ़ोतरी पर बात करते हुए चीमा ने कहा कि अर्थव्यवस्था पूरी तरह से “बदहाल” हो चुकी है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार राहत देने के बजाय हर आर्थिक झटके का बोझ सीधे आम जनता पर डाल रही है। चीमा ने तर्क दिया कि परिवहन और आवश्यक वस्तुओं की बढ़ती कीमतों के कारण आम आदमी का बजट बिगड़ गया है।
जवाबदेही और सुधार की मांग
अपने संबोधन में चीमा ने केंद्र से पारदर्शिता की मांग करते हुए कहा कि सरकार को “टॉप-ऑफ डिप्लोमेसी” से बाहर निकलकर घरेलू अर्थव्यवस्था पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। उन्होंने व्यापारियों, किसानों और मध्यम वर्ग के हितों की रक्षा करने और संघीय ढांचे के तहत राज्यों को उनका उचित हिस्सा देने पर जोर दिया। चीमा के ये आरोप केंद्र और राज्यों के बीच बढ़ते आर्थिक मतभेदों और देश की आर्थिक नीति के प्रति विपक्ष की बढ़ती नाराजगी को स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं।