बांग्लादेश के खिलाफ जीत के बाद भारतीय कप्तान हरमनप्रीत कौर ने टीम की खराब फील्डिंग पर चिंता जताई। ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ निर्णायक मुकाबले से पहले सुधार पर जोर।
आईसीसी महिला टी20 विश्व कप में भारतीय टीम ने बांग्लादेश के खिलाफ पांच विकेट से शानदार जीत दर्ज कर अपनी दावेदारी को और मजबूत कर लिया है। ओल्ड ट्रैफर्ड में खेले गए इस मुकाबले में भारतीय टीम ने 137 रनों के लक्ष्य का पीछा करते हुए 16.5 ओवरों में ही जीत हासिल कर ली। युवा सलामी बल्लेबाज शेफाली वर्मा की तूफानी पारी (34 गेंदों में 53 रन) ने भारत की जीत की नींव रखी, जबकि गेंदबाजी में टीम ने बांग्लादेश को 136/8 पर रोककर न केवल मैच जीता, बल्कि अपने नेट रन रेट (NRR) में भी सुधार किया। हालांकि, इस जीत के बावजूद भारतीय खेमे में चिंता की एक बड़ी लकीर साफ देखी जा सकती है—और वह है टीम की खराब फील्डिंग।
फील्डिंग बनी चिंता का सबब: ‘हमें अपने सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन की जरूरत है’
मैच के बाद कप्तान हरमनप्रीत कौर ने जीत की खुशी तो जताई, लेकिन उन्होंने स्वीकार किया कि टीम की फील्डिंग स्तर अभी भी उम्मीद के मुताबिक नहीं है। मैच के दौरान भारतीय खिलाड़ियों ने कई कैच छोड़े, जिससे बांग्लादेश को महत्वपूर्ण रन बनाने का मौका मिला। हरमनप्रीत ने कहा, “हम फील्डिंग पर बहुत मेहनत कर रहे हैं, लेकिन दुर्भाग्य से आज भी हमने कैच टपकाए। ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ अगला मैच बेहद महत्वपूर्ण है और हमें उस दिन अपना सर्वश्रेष्ठ क्रिकेट दिखाना होगा।” उन्होंने अपनी टीम के खिलाड़ियों का बचाव करते हुए कहा कि फील्डिंग में गड़बड़ियां कभी-कभी दबाव में हो जाती हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि वे मेहनत नहीं कर रहे हैं। कप्तान का मानना है कि निरंतर अभ्यास और एकाग्रता ही इस समस्या का एकमात्र समाधान है।
खिलाड़ियों का मनोबल और सुधार की उम्मीद
कैच छूटने जैसी गलतियों पर बात करते हुए हरमनप्रीत ने कहा कि टीम में शामिल खिलाड़ियां ही उनकी ‘सर्वश्रेष्ठ फील्डर्स’ हैं, लेकिन खेल में ऐसी स्थितियां आना स्वाभाविक है। उन्होंने कहा, “आप ऐसी स्थितियों को पूरी तरह नियंत्रित नहीं कर सकते। हमने इस पर बात की है। हम मैदान पर कड़ी मेहनत करना जारी रखेंगे और अभ्यास के दौरान अधिक समय कैचिंग पर देंगे।” कप्तान को पूरा भरोसा है कि टीम ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ होने वाले निर्णायक मुकाबले में अपनी पिछली गलतियों से सीखकर एक बेहतर और चुस्त फील्डिंग यूनिट के रूप में उतरेगी। उनके अनुसार, सुधार एक निरंतर प्रक्रिया है और उन्हें उम्मीद है कि टीम का असली निखरा हुआ रूप अगले मैच में देखने को मिलेगा।
‘प्लेइंग इलेवन’ को लेकर लचीला दृष्टिकोण
कप्तान हरमनप्रीत कौर ने टीम चयन को लेकर भी महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण दिया। उन्होंने बताया कि इस टूर्नामेंट में भारतीय टीम किसी निश्चित कॉम्बिनेशन के साथ नहीं, बल्कि परिस्थितियों और विपक्षी टीम की ताकत को देखकर प्लेइंग इलेवन चुन रही है। हरमनप्रीत ने कहा, “जब हम यहां आए थे, तो हमारे मन में एक बात साफ थी कि हर टीम अलग है और उनके अपने सकारात्मक और नकारात्मक पहलू हैं। इसी के अनुसार हमने अपनी प्लेइंग इलेवन तय की है।” इस लचीले दृष्टिकोण के कारण भारतीय टीम विरोधियों के लिए भी एक पहेली बनी हुई है, क्योंकि वे हर मैच में रणनीति और खिलाड़ियों के संयोजन में बदलाव कर रहे हैं।
ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ ‘करो या मरो’ की स्थिति
अब भारतीय टीम का पूरा ध्यान ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ होने वाले मैच पर है। विश्व कप जैसे टूर्नामेंट में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ मुकाबला हमेशा ही कड़ा होता है। कप्तान हरमनप्रीत कौर का यह आत्मविश्वास कि टीम अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करेगी, प्रशंसकों के लिए सकारात्मक संकेत है। हालांकि, ऑस्ट्रेलिया के मजबूत बल्लेबाजी क्रम के खिलाफ फील्डिंग में की गई जरा सी भी चूक भारतीय टीम पर भारी पड़ सकती है। इसलिए, अगले कुछ दिनों का अभ्यास सत्र भारतीय टीम के लिए काफी अहम होने वाला है।
यदि भारतीय टीम अपनी फील्डिंग की कमियों को दूर कर लेती है और उसी आक्रामक बल्लेबाजी के साथ उतरती है, तो वे निश्चित रूप से ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ एक यादगार जीत दर्ज कर सकती हैं। कप्तान का विजन साफ है—टीम का लचीलापन और जीत की भूख ही उन्हें विश्व कप की दौड़ में बनाए रखेगी। अब देखना यह है कि क्या अगले मुकाबले में भारतीय खिलाड़ी फील्डिंग में अपना ‘सर्वश्रेष्ठ’ दे पाती हैं या नहीं।