एशियाई बाजारों में रिकॉर्ड ऊंचाई से गिरावट। ऐपल द्वारा कीमतों में बढ़ोतरी और बढ़ती चिप लागत के चलते निवेशकों की चिंता बढ़ी। जानें बाजार का ताजा हाल।
एशियाई शेयर बाजारों में शुक्रवार को उस समय भारी हलचल देखने को मिली, जब बाजार अपने रिकॉर्ड उच्च स्तर से नीचे गिर गए। इस गिरावट के पीछे सबसे बड़ा कारण टेक दिग्गज ‘ऐपल’ (Apple) द्वारा उत्पादों की कीमतों में की गई बढ़ोतरी रही, जिसने मजबूत चिप मांग के नकारात्मक पक्ष को उजागर कर दिया है। बाजार का यह रुख इस बात का संकेत है कि तकनीक क्षेत्र में एआई (AI) इंफ्रास्ट्रक्चर की बढ़ती भूख अब आपूर्ति श्रृंखला और मुद्रास्फीति (Inflation) पर दबाव डाल रही है।
टेक दिग्गज और बढ़ती कीमतें: क्या महंगाई का नया दौर शुरू?
ऐपल के शेयरों में रातों-रात 6.1% की भारी गिरावट देखी गई, जिससे कंपनी के बाजार मूल्य से लगभग 250 बिलियन डॉलर कम हो गए। ऐपल ने अपने आईपैड (iPads) और मैकबुक (MacBooks) की कीमतें इसलिए बढ़ाई हैं ताकि बढ़ते चिप खर्चों से निपटा जा सके। इसी राह पर चलते हुए माइक्रोसॉफ्ट ने भी अपने एक्सबॉक्स (Xbox) की कीमतों में 150 डॉलर तक की वृद्धि की घोषणा की है। विश्लेषकों का मानना है कि ‘माइक्रोन’ (Micron) जैसी कंपनियों के शानदार नतीजों ने जहां निवेशकों में उत्साह भरा था, वहीं ऐपल की यह मूल्य वृद्धि उस उत्साह पर ठंडा पानी डालने का काम कर रही है। डेवियर ग्रुप (deVere Group) के सीईओ नाइजेल ग्रीन का कहना है, “माइक्रोन दिखाता है कि मुनाफा कहां है, लेकिन ऐपल यह दर्शाता है कि मुद्रास्फीति अब कहां फैल रही है।”
जापानी येन पर संकट और सरकारी हस्तक्षेप की आशंका
वैश्विक मुद्रा बाजार में जापानी येन (Japanese Yen) का प्रदर्शन बेहद कमजोर रहा है। येन अपने 40 साल के निचले स्तर 161.82 प्रति डॉलर पर मंडरा रहा है। यह स्तर उस 160 की सीमा से काफी आगे निकल चुका है, जिसे जापानी अधिकारियों के लिए एक ‘चेतावनी रेखा’ के रूप में देखा जाता है। येन में किसी भी प्रकार की मजबूती न देखने को मिलने से अब सरकारी हस्तक्षेप (Government Intervention) का खतरा बढ़ गया है। अमेरिका में मुद्रास्फीति के आंकड़ों के अनुमान के अनुरूप रहने के बावजूद येन को कोई खास सहारा नहीं मिल पाया है।
तेल की कीमतों में नरमी और भू-राजनीतिक स्थिति
ब्रेंट क्रूड ऑयल (Brent Crude) की कीमतों में शुक्रवार को 0.5% की गिरावट देखी गई और यह 74.89 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया। इससे पहले, होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के पास एक जहाज पर हमले की खबरों के कारण कीमतों में 2% का उछाल आया था। हालांकि, ईरान की चेतावनियों के बावजूद, सैन्य सुरक्षा के साथ तेल टैंकरों की आवाजाही जारी रहने से आपूर्ति को लेकर चिंताओं में थोड़ी कमी आई है, जिसने तेल बाजार को स्थिर करने में मदद की है।
बाजार का साप्ताहिक और तिमाही प्रदर्शन
एशिया-प्रशांत सूचकांक (MSCI Asia-Pacific index) में 1.7% की गिरावट दर्ज की गई, जो इसके साप्ताहिक नुकसान को 3.4% तक ले गई है। जापान के निक्केई (Nikkei) में 3% की गिरावट आई है, जबकि दक्षिण कोरिया का कोस्पी (KOSPI) 3.5% गिर गया है। हालांकि, तिमाही प्रदर्शन पर नजर डालें तो इन बाजारों में काफी मजबूती रही है। उदाहरण के तौर पर, कोस्पी में दूसरी तिमाही में 70% का जबरदस्त उछाल आया है। विश्लेषकों का कहना है कि महीने के अंत और तिमाही के अंत के समायोजन (Adjustments) ने भी बड़ी टेक कंपनियों के शेयरों में बिकवाली को बढ़ावा दिया है।
अमेरिकी अर्थव्यवस्था के संकेत और कीमती धातुओं की स्थिति
अमेरिकी अर्थव्यवस्था के आंकड़े मिश्रित संकेत दे रहे हैं। पहली तिमाही में विकास दर अनुमान से बेहतर रही, लेकिन उपभोक्ता खर्च (Consumer Spending) लगभग थम गया है, जिससे दूसरी तिमाही में विकास की गति को लेकर संदेह पैदा हो गया है। डॉलर इंडेक्स 101.46 पर स्थिर बना हुआ है, जो मई 2025 के बाद से अपने उच्चतम स्तर के करीब है। दूसरी ओर, कीमती धातुओं के लिए यह महीना काफी खराब रहा है। सोने में 11% की गिरावट के साथ यह 4,020 डॉलर प्रति औंस पर आ गया, जबकि चांदी में 24% की बड़ी गिरावट दर्ज की गई।
निष्कर्ष के तौर पर, यह हफ्ता वैश्विक बाजारों के लिए उतार-चढ़ाव भरा रहा है। एक तरफ एआई और चिप की बढ़ती मांग मुनाफा दे रही है, तो दूसरी तरफ बढ़ती कीमतें और महंगाई का दबाव निवेशकों की चिंता का कारण बन रहा है। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या टेक कंपनियां बढ़ती लागत का बोझ ग्राहकों पर डालना जारी रखेंगी, या यह महंगाई का एक ऐसा चक्र बनेगा जो वैश्विक विकास को प्रभावित करेगा।