उत्तराखंड मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का बयान: रेलवे अतिक्रमण पर देवभूमि की डेमोग्राफी में बदलाव नहीं होने देंगे

उत्तराखंड मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का बयान: रेलवे अतिक्रमण पर देवभूमि की डेमोग्राफी में बदलाव नहीं होने देंगे

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हल्द्वानी रेलवे अतिक्रमण मामले पर बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि देवभूमि की डेमोग्राफी को किसी भी हाल में नहीं बदलने दिया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट इस मामले की अगली सुनवाई 9 दिसंबर को करेगा।

हल्द्वानी के रेलवे अतिक्रमण मामले पर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का बड़ा बयान सामने आया है। सीएम धामी ने कहा कि राज्य सरकार सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन करने के लिए पूरी तरह तैयार है, लेकिन किसी भी स्थिति में उत्तराखंड की डेमोग्राफी को बदलने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

“देवभूमि की डेमोग्राफी को किसी भी हाल में नहीं बदलने देंगे” – सीएम धामी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी बुधवार को नैनीताल में एक दौरे के दौरान पत्रकारों से बात कर रहे थे। उन्होंने कहा, “हम सुप्रीम कोर्ट के आदेश के लिए पूरी तरह से तैयार हैं, लेकिन उत्तराखंड की डेमोग्राफी को बदलने का प्रयास किसी भी हालत में सफल नहीं होने दिया जाएगा।”

यह बयान हल्द्वानी के रेलवे अतिक्रमण मामले से संबंधित है, जिसमें रेलवे की 29 एकड़ भूमि पर अवैध कब्जा किया गया है। सीएम ने इस मुद्दे पर राज्य सरकार की स्थिति स्पष्ट की और बताया कि उनकी सरकार किसी भी सूरत में उत्तराखंड के मूल निवासियों के अधिकारों के खिलाफ कोई कदम नहीं उठाने देगी।

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घुसपैठियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई जारी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आगे कहा, “हम उन घुसपैठियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई कर रहे हैं जिन्होंने उत्तराखंड की डेमोग्राफी को नुकसान पहुंचाया और नकली सर्टिफिकेट बनवाए हैं। हमारा दृढ़ संकल्प है कि यह अभियान जारी रहेगा और किसी भी घुसपैठिए को राज्य की भूमि पर कब्जा करने की इजाजत नहीं दी जाएगी।”

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने यह भी स्पष्ट किया कि उत्तराखंड के नागरिकों के अधिकारों का उल्लंघन कभी नहीं होने दिया जाएगा। राज्य सरकार सुनिश्चित करेगी कि राज्य के लोगों में असुरक्षा का कोई भाव न उत्पन्न हो।

9 दिसंबर को होगी मामले की अगली सुनवाई

यह मामला दो दशकों से चल रहा है, जिसमें रेलवे का आरोप है कि 29 एकड़ रेलवे भूमि पर लगभग 4365 अतिक्रमणकारी अवैध रूप से कब्जा किए हुए हैं। पहले इस मामले की सुनवाई 2 दिसंबर को होनी थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इसे स्थगित कर दिया है। अब, 9 दिसंबर 2025 को मामले की अगली सुनवाई होगी।

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