गुजरात सरकार के UCC बिल पर AAP गुजरात ने कड़ा विरोध जताया है। चैतन्य वासवा ने कहा, समान नागरिक संहिता लागू करने से पहले संविधान की समानता सुनिश्चित करनी होगी।
गुजरात में भाजपा शासित सरकार द्वारा समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने की जल्दबाज़ी को लेकर AAP गुजरात ने कड़ा विरोध जताया है। पार्टी का कहना है कि यह कदम RSS के दबाव में लिया गया प्रतीत होता है और इससे समाज में असमानता बढ़ सकती है, साथ ही अल्पसंख्यक समुदायों की भावनाओं को ठेस पहुंचने का खतरा है।
AAP के नेता चैतन्य वासवा ने सरकार की नीति पर सवाल उठाते हुए कहा कि राज्य में “एक डंडे से पूरे राज्य को चलाया जा सकता है” जैसी सोच अपनाई जा रही है, जो समाज में भय और विभाजन को बढ़ावा देती है। उन्होंने यह भी पूछा कि यदि सरकार सच में सभी नागरिकों के लिए समान कानून लागू करना चाहती है, तो संवैधानिक समानता की धाराओं का पालन क्यों नहीं किया जा रहा है।
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वासवा ने स्पष्ट किया कि इस बिल से न तो सामाजिक समरसता बढ़ेगी और न ही राष्ट्रीय भावना मजबूत होगी। उनका मानना है कि यह कदम केवल अल्पसंख्यक समुदायों की भावनाओं को प्रभावित कर, राष्ट्रवाद साबित करने की कोशिश जैसा प्रतीत होता है। AAP ने जोर देकर कहा कि समान नागरिक संहिता लागू करने से पहले संविधान में निहित सभी अधिकारों और समानता का सम्मान सुनिश्चित होना चाहिए, तभी यह कानून समाज में न्याय और भाईचारे की मजबूत नींव रख सकता है।
AAP गुजरात ने जनता से अपील की है कि वे सरकार के इस फैसले के प्रति सतर्क रहें और ऐसे कदमों के खिलाफ अपनी आवाज उठाएं जो समाज में विभाजन पैदा कर सकते हैं। इस बयान को पार्टी ने अपने आधिकारिक X पेज पर साझा किया है, और उन्होंने कहा कि समानता और न्याय की दिशा में ही वास्तविक राष्ट्रवाद संभव है।