Table of Contents
हार के बाद भाजपा उम्मीदवार ने गांव की सड़क पर चलवाई जेसीबी; छोटा उदेपुर में मचा बवाल।
गुजरात के छोटा उदेपुर में पंचायत चुनाव हारने के बाद भाजपा उम्मीदवार द्वारा गांव की पक्की सड़क खुदवाने का मामला। विपक्ष ने इसे भाजपा की ‘बदले की राजनीति’ बताया
गुजरात के छोटा उदेपुर जिले से एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है, जहाँ स्थानीय निकाय चुनाव (Panchayat Election) में मिली हार के बाद भाजपा के एक पराजित उम्मीदवार पर गांव की मुख्य आरसीसी (RCC) रोड को जेसीबी (JCB) मशीन से खुदवाने का आरोप लगा है। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद विपक्षी दलों और स्थानीय लोगों ने भाजपा की ‘प्रतिशोध की राजनीति’ पर कड़े सवाल खड़े किए हैं।
विकास के दावों के बीच ‘विनाश’ की तस्वीर
આ છે ભાજપનો અસલી ચેહરો.
ભાજપ ઉમેદવાર જિલ્લા પંચાયતની ચૂંટણી હારી ગયા તો ભાજપ સમર્થકો JCB લઈને આવ્યા અને ગામનો મુખ્ય RCC રોડ ખોદી નાખ્યો. pic.twitter.com/heYkNoVJGQ
— AAP Gujarat (@AAPGujarat) May 2, 2026
स्थानीय सूत्रों के अनुसार, चुनाव परिणाम घोषित होने के कुछ ही घंटों बाद, पराजित उम्मीदवार और उसके समर्थकों ने कथित तौर पर उस सड़क को नष्ट कर दिया जिसे गांव के विकास के लिए बनाया गया था। ग्रामीणों का कहना है कि यह सड़क सरकारी फंड से बनी थी, लेकिन वोट न मिलने का बदला लेने के लिए इसे नुकसान पहुँचाया गया। अब ग्रामीणों को आने-जाने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
विपक्ष का प्रहार: “यही है भाजपा का असली चेहरा”
आम आदमी पार्टी (AAP) और कांग्रेस ने इस घटना को लेकर भाजपा को आड़े हाथों लिया है। विपक्षी नेताओं का कहना है कि यह घटना दर्शाती है कि भाजपा नेता जनता की सेवा के लिए नहीं, बल्कि सत्ता और अहंकार के लिए चुनाव लड़ते हैं। जब जनता उन्हें नकार देती है, तो वे सार्वजनिक सुविधाओं को नष्ट करने पर उतर आते हैं।
कानूनी कार्रवाई की मांग: “सार्वजनिक संपत्ति किसी की जागीर नहीं”
इस शर्मनाक घटना के बाद स्थानीय प्रशासन और पुलिस पर कड़ी कार्रवाई का दबाव बढ़ गया है। ग्रामीणों ने जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक से मांग की है कि सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुँचाने के जुर्म में पराजित उम्मीदवार और उसके समर्थकों के खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज की जाए और सड़क की मरम्मत का खर्च भी उन्हीं से वसूला जाए। सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि अगर चुनाव में हार-जीत के बाद नेता इस तरह का व्यवहार करेंगे, तो यह लोकतंत्र के लिए एक खतरनाक मिसाल होगी।
सरकारी पैसा जनता के टैक्स की गाढ़ी कमाई है, जिसे किसी नेता की निजी संपत्ति की तरह नष्ट करने की अनुमति नहीं दी जा सकती। छोटा उदेपुर की यह घटना आज देशभर में ‘बदले की राजनीति’ के सबसे क्रूर उदाहरण के रूप में चर्चा का विषय बनी हुई है।