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10 अप्रैल को भारतीय बाजार में सोने और चांदी के दाम गिरे हैं। मुंबई में 24 कैरेट सोने का भाव ₹1,51,470 प्रति 10 ग्राम रहा, वहीं चांदी ₹2.54 लाख प्रति किलो के पार है। जानें आपके शहर के ताजा रेट और गिरावट की वजह
आज भारत में सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई है। 10 अप्रैल, 2026 को हाजिर बाजार (spot market) में मांग कम होने की वजह से कीमतों पर दबाव देखा गया। देश के प्रमुख सर्राफा बाजारों में कीमतों में आए इस बदलाव ने निवेशकों और खरीदारों का ध्यान खींचा है।
भारत में सोने और चांदी के ताजा भाव
देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में 24 कैरेट सोने की कीमत 1,51,470 रुपये प्रति 10 ग्राम दर्ज की गई। वहीं, आभूषण बनाने के लिए इस्तेमाल होने वाले 22 कैरेट सोने का भाव 1,38,840 रुपये प्रति 10 ग्राम रहा। ध्यान रहे कि इन कीमतों में अभी GST और मेकिंग चार्ज (making charges) शामिल नहीं किए गए हैं, जो अंतिम बिल में जुड़कर कीमत को और बढ़ा देते हैं।
चांदी की बात करें तो भारत भर में चांदी की हाजिर कीमत 2,54,900 रुपये प्रति किलोग्राम रही।
वायदा बाजार (MCX) का हाल
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर भी सुबह के कारोबार के दौरान सुस्ती देखी गई। MCX पर सोना 0.34 प्रतिशत की गिरावट के साथ 1,52,913 रुपये प्रति 10 ग्राम पर कारोबार कर रहा था। दूसरी ओर, चांदी के वायदा भाव में 0.43 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई और यह 2,42,728 रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गया।
भारत में सोने की कीमतों को प्रभावित करने वाले कारक
भारत में सोने की दरें केवल घरेलू मांग पर निर्भर नहीं होतीं, बल्कि कई अंतरराष्ट्रीय और नीतिगत कारक इसकी कीमतों को तय करते हैं:
- अंतरराष्ट्रीय बाजार दरें: भारत अपनी सोने की अधिकांश खपत के लिए आयात पर निर्भर है, इसलिए वैश्विक बाजार (जैसे लंदन और न्यूयॉर्क) में सोने के दाम बढ़ने या घटने का सीधा असर भारत पर पड़ता है।
- आयात शुल्क (Import Duty): सरकार द्वारा सोने पर लगाए जाने वाले आयात शुल्क में बदलाव कीमतों को तुरंत प्रभावित करता है। उच्च शुल्क का अर्थ है महंगी दरें।
- मुद्रा विनिमय दर (Exchange Rate): चूंकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सोने का कारोबार डॉलर में होता है, इसलिए डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये की स्थिति अहम होती है। यदि रुपया कमजोर होता है, तो सोना खरीदना महंगा हो जाता है।
- ब्याज दरें और महंगाई: वैश्विक स्तर पर केंद्रीय बैंकों (जैसे US फेडरल रिजर्व) द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी सोने की मांग को कम कर सकती है, क्योंकि निवेशक ब्याज देने वाली संपत्तियों की ओर झुकते हैं।
सांस्कृतिक और वित्तीय महत्व
भारत में सोना केवल एक धातु नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और वित्तीय सुरक्षा का प्रतीक है। शादियों के सीजन और दिवाली या धनतेरस जैसे त्योहारों के दौरान इसकी मांग चरम पर होती है। निवेश के नजरिए से भी इसे ‘सुरक्षित स्वर्ग’ (Safe Haven) माना जाता है, खासकर आर्थिक अनिश्चितता के दौर में। बाजार की बदलती परिस्थितियों को देखते हुए, निवेशकों के लिए इन उतार-चढ़ाव पर नजर रखना बहुत जरूरी है।