अमेरिकी जॉब्स डेटा के बाद वॉल स्ट्रीट में 2 ट्रिलियन डॉलर की गिरावट। जानें फेडरल रिजर्व, ब्याज दरों और टेक शेयरों पर इसका क्या असर हुआ है।
शुक्रवार का दिन वॉल स्ट्रीट के लिए एक बुरे सपने जैसा रहा। अमेरिकी शेयर बाजारों में आई जबरदस्त बिकवाली ने निवेशकों को हिलाकर रख दिया और बाजार से लगभग 2 ट्रिलियन डॉलर की बाजार पूंजी (market value) स्वाहा हो गई। प्रमुख सूचकांकों की बात करें तो डाउ जोंस 1%, S&P 500 में 2.4% और टेक-हैवी नैस्डैक कंपोजिट में 4% की भारी गिरावट दर्ज की गई। इस गिरावट की सबसे बड़ी मार टेक्नोलॉजी और एआई-लिंक्ड शेयरों पर पड़ी, जिन्हें ‘मैग्नीफिसेंट सेवन’ के नाम से जाना जाता है। ब्रॉडकॉम जैसे दिग्गज सेमीकंडक्टर शेयरों में 7% तक की गिरावट देखने को मिली, जिसने निवेशकों की चिंता को और गहरा कर दिया।
बाजार में गिरावट का असली कारण: मजबूत नौकरियों के आंकड़े
इस गिरावट के पीछे सबसे मुख्य उत्प्रेरक अमेरिका की ‘मजबूत जॉब्स रिपोर्ट’ रही। शुक्रवार को जारी आंकड़ों के अनुसार, मई महीने में अमेरिकी नियोक्ताओं ने 1,72,000 नई नौकरियां जोड़ीं, जो अर्थशास्त्रियों के 80,000 के अनुमान से कहीं अधिक थीं। इसके अलावा, पिछले दो महीनों के आंकड़ों को भी 93,000 नौकरियों तक ऊपर संशोधित (upward revision) किया गया। सामान्य परिस्थितियों में एक मजबूत अर्थव्यवस्था के लिए यह अच्छी खबर है, लेकिन वर्तमान में, यह फेडरल रिजर्व के लिए एक ‘सिरदर्द’ बन गई है। निवेशकों को डर है कि अर्थव्यवस्था की यह मजबूती फेडरल रिजर्व को ब्याज दरों में कटौती करने से रोकेगी और संभवतः उन्हें दरों में और बढ़ोतरी करने के लिए मजबूर कर सकती है।
बॉन्ड यील्ड में उछाल और टेक शेयरों पर प्रभाव
जॉब्स रिपोर्ट के तुरंत बाद अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में जबरदस्त उछाल आया। विशेष रूप से, फेडरल रिजर्व की नीतियों के प्रति संवेदनशील मानी जाने वाली दो साल की ट्रेजरी नोट की यील्ड 15 महीने के उच्चतम स्तर 4.16% तक पहुँच गई। वित्त की दुनिया में, बॉन्ड यील्ड का बढ़ना टेक्नोलॉजी शेयरों के लिए जहर की तरह काम करता है। इसका कारण यह है कि टेक कंपनियों का वैल्यूएशन अक्सर ‘भविष्य की कमाई’ (future earnings) पर आधारित होता है, और जब ब्याज दरें बढ़ती हैं, तो इन भविष्य की कमाई का वर्तमान मूल्य कम हो जाता है। यही कारण है कि निवेशकों ने मुनाफावसूली (profit booking) शुरू कर दी और एआई (AI) आधारित कंपनियों से पैसा निकालना बेहतर समझा।
फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति और मुद्रास्फीति की चिंता
निवेशक पहले से ही इस उम्मीद में थे कि घटती मुद्रास्फीति के चलते फेडरल रिजर्व आने वाले महीनों में दरों में कटौती करेगा। लेकिन शुक्रवार के डेटा ने इस उम्मीद को तगड़ा झटका दिया है। वेल्स फारगो के मार्केट स्ट्रैटेजिस्ट गैरी श्लॉसबर्ग का मानना है कि अर्थव्यवस्था का यह ‘अति-मजबूत’ होना, मध्य पूर्व के तनाव के कारण बढ़ते तेल और ऊर्जा के दामों के साथ मिलकर मुद्रास्फीति के जोखिम को और बढ़ा रहा है। ऐसी स्थिति में फेडरल रिजर्व के लिए दरें घटाने का विचार करना भी मुश्किल हो रहा है, और बाजार अब साल के अंत तक एक और ‘रेट हाइक’ की संभावना पर भी विचार करने लगा है।
भू-राजनीतिक तनाव और बाजार का भविष्य
ईटोरो (eToro) के एनालिस्ट ब्रेट केनवेल के अनुसार, यह डेटा अर्थव्यवस्था के लिए तो अच्छा है, लेकिन शेयर बाजारों के लिए नकारात्मक साबित हो रहा है। निवेशकों के लिए चिंता का विषय केवल ब्याज दरें नहीं हैं, बल्कि मध्य पूर्व का भू-राजनीतिक तनाव भी है, जो ऊर्जा की कीमतों को बढ़ा रहा है। यदि भू-राजनीतिक तनाव जल्दी हल नहीं होता और तेल की कीमतें ऊँची बनी रहती हैं, तो यह मुद्रास्फीति को और अधिक ऊपर धकेल सकता है। बाजार अब फेडरल रिजर्व के हर छोटे-बड़े संकेत पर कड़ी नजर रख रहा है।
क्या बाजार संभलेगा?
पिछले दो वर्षों में एआई के प्रति उत्साह ने वॉल स्ट्रीट को नई ऊंचाइयों पर पहुँचाया था। लेकिन अब बाजार एक ऐसे मोड़ पर है जहाँ ‘वैधता’ की जांच हो रही है। क्या उच्च ब्याज दरों के बीच एआई कंपनियों का वर्तमान वैल्यूएशन उचित है? शुक्रवार की बिकवाली ने इसी सवाल को खड़ा किया है। यदि फेडरल रिजर्व अपने रुख में ‘हॉकिश’ (सख्त) रहता है, तो आने वाले समय में भी शेयरों पर दबाव बना रह सकता है। संक्षेप में, वॉल स्ट्रीट अब ‘आर्थिक मजबूती’ और ‘मौद्रिक कड़ाई’ के बीच एक अनिश्चित संतुलन की तलाश कर रहा है, और जब तक मुद्रास्फीति पर स्पष्टता नहीं आती, बाजार में अस्थिरता बनी रहने की पूरी संभावना है।