गाजियाबाद-नई दिल्ली रेल मार्ग पर मंगलवार सुबह मालगाड़ी के 6 डिब्बे पटरी से उतर गए। हादसे के कारण 16 पैसेंजर ट्रेनें रद्द और 24 डायवर्ट की गई हैं। डीआरएम सहित वरिष्ठ अधिकारी मौके पर मौजूद हैं।
मंगलवार की सुबह गाजियाबाद और नई दिल्ली के बीच के अति-व्यस्त रेल खंड पर एक भयानक दुर्घटना होने से बाल-बाल बच गई। इस मार्ग से तेज़ी से गुज़र रही सामान से लदी एक मालगाड़ी के छह डिब्बे अचानक अनियंत्रित होकर पटरी से उतर गए। सुबह के समय जब इस मार्ग पर यात्री ट्रेनों की आवाजाही सबसे अधिक होती है, उस वक्त हुए इस हादसे ने रेल प्रशासन के हाथ-पांव फुला दिए। ईश्वर का शुक्र और राहत की बात यह रही कि मालगाड़ी के डिब्बे बेपटरी होने के बावजूद किसी भी प्रकार की जनहानि या जान-माल के बड़े नुकसान की खबर नहीं आई। हालांकि, इस घटना ने दिल्ली-एनसीआर के दैनिक यात्रियों की दिनचर्या को पूरी तरह से अस्त-व्यस्त कर दिया।
रेलवे प्रशासन का त्वरित एक्शन और राहत कार्य
हादसे की सूचना मिलते ही उत्तर रेलवे के दिल्ली मंडल में हड़कंप मच गया। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए मंडल रेल प्रबंधक (DRM), अपर मंडल रेल प्रबंधक (ADRM) सहित रेलवे के तमाम वरिष्ठ अधिकारी, तकनीकी विशेषज्ञ और बचाव दल तुरंत दुर्घटना स्थल पर पहुंचे। अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर राहत और बहाली कार्य की कमान संभाली। भारी क्रैनों और आधुनिक उपकरणों की मदद से पटरी से उतरे डिब्बों को हटाने और क्षतिग्रस्त पटरियों की मरम्मत का कार्य युद्धस्तर पर शुरू किया गया। रेलवे का मुख्य उद्देश्य इस अति-महत्वपूर्ण मार्ग पर सुरक्षा मानकों का पालन करते हुए यातायात को जल्द से जल्द बहाल करना रहा।
सुबह के व्यस्त समय में 53 ट्रेनें प्रभावित: यात्रियों की बढ़ीं मुश्किलें
दिल्ली-गाजियाबाद रूट भारतीय रेलवे के सबसे व्यस्ततम कॉरिडोर में से एक माना जाता है, जहाँ से रोज़ाना लाखों यात्री और दर्जनों एक्सप्रेस ट्रेनें गुज़रती हैं। सुबह के व्यस्त समय (Peak Hours) में हुए इस हादसे के कारण दिल्ली मंडल का संपूर्ण रेल परिचालन बुरी तरह लड़खड़ा गया। रेलवे प्रशासन को सुरक्षा के दृष्टिकोण से तुरंत प्रभाव से व्यापक बदलाव करने पड़े। इस हादसे के कारण कुल मिलाकर 53 ट्रेनों का संचालन प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित हुआ:
- 24 ट्रेनों का मार्ग परिवर्तन: मुख्य ट्रैक बाधित होने के कारण 24 प्रमुख ट्रेनों को दिल्ली और नई दिल्ली के वैकल्पिक रास्तों से डायवर्ट करके चलाया गया।
- 16 पैसेंजर ट्रेनें रद्द: दैनिक यात्रियों और नौकरीपेशा लोगों द्वारा उपयोग की जाने वाली 16 लोकल व पैसेंजर ट्रेनों को पूरी तरह रद्द करना पड़ा।
- 5 ट्रेनें शॉर्ट-टर्मिनेट: 5 ट्रेनों को उनके अंतिम स्टेशन तक पहुँचाने के बजाय बीच के स्टेशनों पर ही रोक दिया गया या वहीं से वापस संचालित किया गया।
- 8 ट्रेनें रेगुलेट: आनंद विहार टर्मिनस की ओर आने वाली 8 मुख्य ट्रेनों को मुरादाबाद मंडल और उत्तर मध्य रेलवे (NCR) के विभिन्न आउटर स्टेशनों पर रोककर चलाया गया।
इस यातायात परिवर्तन के कारण दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद और आसपास के इलाकों से आने-जाने वाले दैनिक यात्रियों, विशेषकर दफ़्तर जाने वाले लोगों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ा। रेलवे स्टेशनों पर यात्रियों की भारी भीड़ जमा हो गई।
छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में भी बेपटरी हुई मालगाड़ी
दिल्ली-एनसीआर में हुए इस हादसे से ठीक एक दिन पहले सोमवार को छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में भी ऐसी ही एक घटना सामने आई थी। बिलासपुर-कटनी रेल खंड पर करगी रोड स्टेशन के पास पेन्ड्रा रोड से बिलासपुर की ओर जा रही एक खाली मालगाड़ी के तीन डिब्बे अचानक पटरी से उतर गए। डाउन लाइन पर हुए इस हादसे के तुरंत बाद बिलासपुर मंडल के वरिष्ठ अधिकारी, इंजीनियर, परिचालन और तकनीकी विशेषज्ञ मौके पर पहुंचे। दुर्घटनाग्रस्त डिब्बों को पुनः पटरी पर लाने और बाधित रेल यातायात को सामान्य करने के लिए तत्काल बहाली अभियान चलाया गया।
लगातार बेपटरी होती मालगाड़ियाँ: रेल इंफ्रास्ट्रक्चर पर उठते सवाल
गाजियाबाद और बिलासपुर में लगातार दो दिनों में हुई मालगाड़ियों के बेपटरी होने की घटनाओं ने एक बार फिर भारतीय रेलवे के ट्रैक मेंटेनेंस, बोगियों की तकनीकी स्थिति और सिग्नलिंग व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यद्यपि इन दोनों हादसों में कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ और अधिकारियों ने समय रहते स्थिति पर काबू पा लिया, लेकिन यह इस बात की चेतावनी है कि मालगाड़ियों के रखरखाव और पटरियों के निरीक्षण में किसी भी प्रकार की लापरवाही एक बड़े हादसे का रूप ले सकती है।
जल्द बहाली और कड़े सुरक्षा मानकों की आवश्यकता
गाजियाबाद-नई दिल्ली रेल मार्ग पर हुआ यह हादसा भले ही बिना किसी हताहत के टल गया, लेकिन इसने रेलवे सुरक्षा के प्रति और अधिक सतर्कता बरतने की आवश्यकता को रेखांकित किया है। रेलवे प्रशासन द्वारा युद्धस्तर पर पटरियों की मरम्मत का काम पूरा कर यातायात को सामान्य बनाने का प्रयास किया जा रहा है। भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो, इसके लिए पटरियों की नियमित जांच, वेदर-सेंसिंग सुरक्षा उपकरण और मालगाड़ियों के पहियों व बोगियों की गहन तकनीकी जांच बेहद अनिवार्य है।