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पनामा के विदेश मंत्री जेवियर मार्टिनेज-आचा वास्केज ने भारत को ‘पहले से ही एक सुपरपावर’ बताया। एस जयशंकर के साथ बैठक में उन्होंने दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी और ट्रेड वर्किंग ग्रुप बनाने की पेशकश की। पढ़ें पूरी खबर।
वैश्विक मंच पर भारत के बढ़ते प्रभाव और आर्थिक साख को उस समय एक और बड़ा समर्थन मिला, जब पनामा के विदेश मंत्री जेवियर मार्टिनेज-आचा वास्केज ने आधिकारिक तौर पर भारत को ‘पहले से ही एक सुपरपावर’ करार दिया। नई दिल्ली में भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ आयोजित प्रतिनिधिमंडल स्तर की द्विपक्षीय वार्ता के दौरान वास्केज ने दोनों देशों के ऐतिहासिक संबंधों को एक कदम आगे ले जाते हुए इसे दीर्घकालिक रणनीतिक साझेदारी में बदलने का पुरजोर आह्वान किया। यह दौरा केवल दो देशों के बीच पारंपरिक राजनयिक औपचारिकताओं तक सीमित नहीं था, बल्कि यह 21वीं सदी की नई वैश्विक व्यवस्था में भारत की केंद्रीय भूमिका और लैटिन अमेरिका में भारत के आर्थिक विस्तार की संभावनाओं को रेखांकित करने वाला एक ऐतिहासिक पड़ाव साबित हुआ।
‘भारत पहले से ही एक सुपरपावर है’: वास्केज का प्रेरक संदेश
बैठक के दौरान पनामा के विदेश मंत्री ने वैश्विक विश्लेषकों की उस धारणा को सिरे से खारिज कर दिया, जो भारत को केवल एक ‘उभरती हुई महाशक्ति’ के रूप में देखते हैं। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि पनामा के दृष्टिकोण से भारत पहले से ही दुनिया की एक स्थापित सुपरपावर है। वास्केज के अनुसार, भारत की पहचान केवल एक बड़ी और तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि वह एक विशाल ‘सभ्यतागत शक्ति’ (Civilizational Power) है, जिसकी आवाज़ आज वैश्विक नीति-निर्माण में अत्यधिक महत्वपूर्ण और प्रभावशाली हो चुकी है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि भारत में पिछले कुछ वर्षों में आए उल्लेखनीय आर्थिक और सामाजिक बदलावों ने पनामा जैसे विकासशील देशों को अपने स्वयं के भविष्य के लिए बड़े और साहसिक लक्ष्य तय करने की प्रेरणा दी है। पनामा अब भारत के साथ छह दशक पुरानी दोस्ती को केवल बनाए नहीं रखना चाहता, बल्कि आने वाले दशकों के लिए एक दूरदर्शी और मजबूत रणनीतिक ढांचा तैयार करने के लिए प्रतिबद्ध है।
भौगोलिक आकार बनाम वैश्विक क्षमता: जोड़ने की कला
वार्ता के दौरान पनामा के विदेश मंत्री ने अपने देश की विशिष्ट भौगोलिक स्थिति और अंतरराष्ट्रीय व्यापार में इसके सामरिक महत्व को बेहद प्रभावी ढंग से रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि किसी भी देश की वास्तविक ताकत उसके भौगोलिक आकार या क्षेत्रफल से तय नहीं होती, बल्कि इस बात से तय होती है कि वह दुनिया को आपस में जोड़ने की कितनी क्षमता रखता है। उन्होंने एक सुंदर तुलना करते हुए कहा:
“जिस तरह भारत अपने महान विचारों और नीतियों से दुनिया को जोड़ता है, उसी तरह पनामा अपनी रणनीतिक स्थिति से वैश्विक बाजारों को जोड़ने का काम करता है।”
इस संदर्भ में उन्होंने प्रसिद्ध पनामा नहर का उल्लेख करते हुए इसे केवल इंजीनियरिंग की एक अद्भुत मिसाल नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार का सबसे भरोसेमंद और सुरक्षित मंच बताया। उन्होंने इस बात को स्वीकार किया कि भारत और पनामा के बीच भौगोलिक दूरी भले ही अधिक हो, लेकिन दोनों देशों के साझा लोकतांत्रिक मूल्य, खुलेपन की नीति और नवाचार के प्रति प्रतिबद्धता उन्हें एक-दूसरे के बेहद करीब लाती है।
लैटिन अमेरिका का मुख्य प्रवेश द्वार: पनामा की रणनीतिक पेशकश
वास्केज ने भारत सरकार और भारतीय उद्योग जगत से अपील की कि वे पनामा को अपनी अंतरराष्ट्रीय आर्थिक और व्यापारिक रणनीति का एक अनिवार्य हिस्सा बनाएं। उन्होंने जोर देकर कहा कि पनामा, भारत के लिए पूरे लैटिन अमेरिका और मध्य अमेरिका (Central America) के विशाल बाजारों में प्रवेश करने का सबसे सुलभ और सुरक्षित ‘गेटवे’ (प्रवेश द्वार) साबित हो सकता है।
लैटिन अमेरिका में अपने कारोबार का विस्तार करने की इच्छा रखने वाली भारतीय बहुराष्ट्रीय कंपनियों के लिए पनामा एक आदर्श क्षेत्रीय मंच प्रदान करता है। वास्केज के अनुसार, पनामा के पास एक बेहद पारदर्शी और मजबूत कानूनी ढांचा है, जो विदेशी निवेश को पूर्ण सुरक्षा और प्रोत्साहन देता है। उन्होंने बहुत ही सटीक शब्दों में दोनों देशों की पूरकता को परिभाषित करते हुए कहा कि “भारत दुनिया के लिए उत्पादन करता है, और पनामा दुनिया को उन उत्पादों से जोड़ता है।”
आर्थिक सहयोग और भविष्य के नए क्षेत्र
द्विपक्षीय आर्थिक संबंधों को एक संस्थागत और व्यावहारिक रूप देने के लिए वास्केज ने भारत और पनामा के बीच एक ‘हाई-लेवल ट्रेड एंड इन्वेस्टमेंट वर्किंग ग्रुप’ (उच्चस्तरीय व्यापार एवं निवेश कार्य समूह) के गठन का आधिकारिक प्रस्ताव रखा। यह कार्य समूह दोनों देशों के बीच व्यापारिक बाधाओं को दूर करने और नए अवसरों की पहचान करने का काम करेगा।
- पनामा के विदेश मंत्री ने उन प्रमुख क्षेत्रों की पहचान की जहाँ दोनों देश मिलकर अभूतपूर्व प्रगति कर सकते हैं:
- फार्मास्युटिकल्स और मेडिकल सर्विसेज: भारत की सस्ती और गुणवत्तापूर्ण दवाओं का लैटिन अमेरिका में वितरण।
- सेमीकंडक्टर और एआई (AI): आधुनिक तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में सहयोग।
- डेटा सेंटर और एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग: डिजिटल बुनियादी ढांचे का विकास।
- क्षेत्रीय वितरण केंद्र (Regional Hubs): भारतीय सामानों को पूरे अमेरिका महाद्वीप में पहुँचाने के लिए लॉजिस्टिक्स केंद्र।
पनामा के विदेश मंत्री की यह भारत यात्रा केवल एक कूटनीतिक मुलाकात नहीं थी, बल्कि यह वैश्विक दक्षिण (Global South) के दो महत्वपूर्ण देशों के बीच आर्थिक और रणनीतिक एकीकरण का एक नया अध्याय है। लोकतांत्रिक मूल्यों, खुलेपन और इनोवेशन पर आधारित यह साझेदारी यह साबित करती है कि वैश्विक समृद्धि का रास्ता सहयोग से होकर गुजरता है। भारत की विनिर्माण क्षमता और पनामा की लॉजिस्टिक्स व कनेक्टिविटी का यह संगम आने वाले वर्षों में वैश्विक व्यापार और रणनीतिक परिदृश्य को एक नई दिशा देने में पूरी तरह सक्षम है।