Table of Contents
जेन ज़ेड और मिलेनियल्स में बदला बियर पीने का तरीका। नशे से ज्यादा अब वेलनेस और मॉडरेशन पर जोर। जानिए क्या है जेब्रा ड्रिंकिंग और लो-अल्कोहल बियर का बढ़ता क्रेज।
बियर की दुनिया में एक बड़ा बदलाव आ रहा है। एक दौर था जब बियर की मार्केटिंग का मुख्य केंद्र अत्यधिक सेवन, बड़े पिंट, लंबी रातें और भारी-भरकम ब्रू हुआ करता था। लेकिन आज यह कहानी पूरी तरह बदल चुकी है। आज की जेन ज़ेड (Gen Z) और युवा मिलेनियल्स पीढ़ी के लिए शराब पीना नशे से ज्यादा ‘इरादे’ (Intention) और समझदारी से जुड़ गया है। स्वास्थ्य (Wellness), संयम (Moderation) और सजग उपभोग अब उनके खान-पान और खरीदारी के फैसलों को तय कर रहे हैं। इसी सोच ने एक नई पीढ़ी के बियर प्रेमियों को जन्म दिया है, जो अपने स्वास्थ्य लक्ष्यों से समझौता किए बिना बेहतरीन स्वाद और अनुभव चाहते हैं।
बीयर का नया और सेहतमंद रूप: कम अल्कोहल और फंक्शनल ड्रिंक्स का दौर
इस बदलाव ने दुनिया भर की ब्रुअरीज को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि आखिर एक पिंट ग्लास में क्या होना चाहिए। पारंपरिक बियर के अलावा अब बाजार में कम अल्कोहल वाले लैगर (Low-alcohol lagers), अल्कोहल-फ्री क्राफ्ट बियर, पेट के स्वास्थ्य के अनुकूल (Gut-friendly) ब्रू और फंक्शनल पेय पदार्थों की बाढ़ आ गई है। यह नया नवाचार अब केवल स्वाद तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें पोषण, शारीरिक संतुलन और रिकवरी को भी प्राथमिकता दी जा रही है।
“यह कोई अस्थायी ट्रेंड नहीं, बल्कि संरचनात्मक बदलाव है”
आयरनहिल इंडिया (Ironhill India) की सह-संस्थापक विदहता अन्नामनेनी (Vidhatha Annamaneni) का मानना है कि यह कोई क्षणिक ट्रेंड नहीं है, बल्कि उपभोक्ता व्यवहार में आया एक स्थायी संरचनात्मक बदलाव है।
- बढ़ता दायरा: उनका कहना है कि यह प्रवृत्ति अब विभिन्न बाजारों में लगातार दिखाई दे रही है और इसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
- वेलनेस उत्पाद: बाजार में लो- और नो-अल्कोहल ब्रू के साथ-साथ ऐसे फंक्शनल बीयर आ रहे हैं जो हैंगओवर को कम करने और स्वास्थ्य लाभ देने में मदद करते हैं।
- पाचन स्वास्थ्य: उपभोक्ता अब गट हेल्थ के लिए अनफिल्टरड बियर और प्रोबायोटिक्स से भरपूर हार्ड कोम्बुचा को भी बड़े पैमाने पर पसंद कर रहे हैं।
विदहता के अनुसार, जेन ज़ेड और मिलेनियल्स गुणवत्ता, स्वास्थ्य, स्पष्ट इरादे और संतुलन को मात्रा (Volume) से ज्यादा अहमियत दे रहे हैं। क्राफ्ट ब्रूअरीज के लिए प्रीमियम सामग्री और छोटे बैचों के साथ बेहतर अनुभव देना हमेशा से प्राथमिकता रहा है और यह नया दौर उसी का विस्तार है।
क्यों बढ़ रहा है मॉडरेशन (संयम) का आकर्षण?
यह बदलाव केवल भारत तक सीमित नहीं है। यूरोप, उत्तरी अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया में भी कम और गैर-अल्कोहल वाले पेय पदार्थों की बिक्री में लगातार वृद्धि दर्ज की जा रही है। उपभोक्ता अब ‘जेब्रा ड्रिंकिंग’ (Zebra Drinking) जैसी अवधारणाओं को अपना रहे हैं, जिसमें वे एक ही सामाजिक अवसर पर मादक और गैर-मादक पेय पदार्थों के बीच बारी-बारी से चुनाव करते हैं। इसका मुख्य उद्देश्य पूरी तरह से शराब से दूर रहना नहीं, बल्कि अपने सामाजिक अनुष्ठानों और मेलजोल को बनाए रखते हुए मॉडरेशन (संयम) बरतना है।
भारतीय बाजार की स्थिति और ‘जेब्रा ड्रिंकिंग’ का चलन
फ्लाइंग फॉक्स ब्रूइंग की मास्टरब्रेवर लिनेट पाइरेस (Lynette Pires) का कहना है कि भारत वैश्विक स्तर पर हो रहे इन बदलावों को अपना रहा है, हालांकि यहाँ की गति अपनी है।
“भारत अधिक परिपक्व वैश्विक बाजारों की तुलना में एक युवा अल्कोहल बाजार है, जहां कुल खपत और ड्रिंकिंग के अवसर लगातार बढ़ रहे हैं। इसके बावजूद, नई पीढ़ी अपनी ड्रिंकिंग को लेकर बेहद सजग है और वह स्वास्थ्य तथा सूचित विकल्पों पर अधिक जोर दे रही है।”
उनके अनुसार, एल्को-बेवरिज इंडस्ट्री से जुड़े ब्रांड्स के लिए यह चुनौती नहीं बल्कि एक शानदार अवसर है, जहां वे आनंद और स्वास्थ्य की प्राथमिकताओं के बीच संतुलन बिठाने वाले उत्पाद तैयार कर सकते हैं।
बार और रेस्तरां में बदलती पसंद: शेफ निश्चल बिस्वाकर्मा का नजरिया
इस बदलाव का असर अब सीधे तौर पर बार, पब और रेस्तरां में भी साफ दिखाई देने लगा है। पुडुचेरी के ‘सोला बिस्ट्रो एंड बार’ के शेफ निश्चल बिस्वाकर्मा (Nischal Biswakarma) का कहना है कि युवा ग्राहक अब पहले से कहीं अधिक सोच-समझकर फैसले ले रहे हैं।
उनके अनुसार, उनके रेस्तरां में आने वाले लगभग 30 से 35 प्रतिशत मेहमान अब सामाजिक मेलजोल के दौरान लो-अल्कोहल बेवरेज और मॉकटेल्स का विकल्प चुनते हैं।
हालांकि, इसका यह अर्थ बिल्कुल नहीं है कि मजबूत बियर की मांग पूरी तरह खत्म हो गई है। कोरोना या मैग्नम जैसी उच्च-एबीवी (ABV) बियर पसंद करने वाला एक वर्ग आज भी मौजूद है, जो इस जनसांख्यिकी की विविधता को दर्शाता है।
स्वास्थ्य और सामाजिकता का बेहतर तालमेल
आज का आधुनिक उपभोक्ता अपनी फिटनेस, शारीरिक स्वास्थ्य और अगले दिन की प्रोडक्टिविटी से समझौता किए बिना अपनी सामाजिक जिंदगी का लुत्फ उठाना चाहता है। बीयर इंडस्ट्री में चल रहा यह नया बदलाव इस बात का पक्का प्रमाण है कि अब आधुनिक जीवनशैली में मनोरंजन और सेहत एक-दूसरे के विरोधी नहीं, बल्कि पूरक बन चुके हैं।